
500 साल बाद भी क्यों गूंजती है तुलसी की चौपाई? रामचरितमानस के रचयिता का जीवन और कृतित्व जानिए
तुलसीदास: एक कवि नहीं, भारतीय जनमानस की धड़कन—रामचरितमानस से आज तक क्यों कायम है उनका प्रभाव? तुलसीदास जयंती विशेष | जिसने संस्कृत के शास्त्रों की कथा को लोकभाषा की चौपाल तक पहुंचाया, राम को मर्यादा का प्रतीक बनाया और हिंदी साहित्य को ऐसी विरासत दी, जिसकी गूंज सदियों बाद भी सुनाई देती है लेखक: अवनीश त्यागी | TargetTvLive जिस कवि ने साहित्य को किताब से निकालकर जन-जन की जुबान बना दिया भारतीय साहित्य के विशाल आकाश में अनेक कवि आए और अपनी रचनाओं की छाप छोड़कर चले गए, लेकिन कुछ रचनाकार ऐसे होते हैं जो केवल साहित्य का हिस्सा नहीं बनते, बल्कि समाज की सामूहिक स्मृति का स्थायी हिस्सा बन जाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास ऐसे ही कालजयी रचनाकार हैं। तुलसीदास को केवल रामचरितमानस के रचयिता के रूप में देखना उनके विराट व्यक्तित्व और कृतित्व को सीमित करना होगा। वह कवि थे, भक्त थे, दार्शनिक थे और सबसे बढ़कर ऐसे लोकचिंतक












































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