स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद बैठक: भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की नई दिशा

संपादन:अवनीश त्यागी
रायपुर, छत्तीसगढ़। स्वदेशी जागरण मंच की दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद बैठक 9-10 मार्च को संपन्न हुई, जिसमें देशभर से 380 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक में भारत की आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक संरचना को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। मंच ने स्पष्ट किया कि भारत को “स्वदेशी” को केंद्र में रखकर वैश्विक व्यापार, ग्रामीण विकास, और तकनीकी नवाचार की नीतियां बनानी होंगी, ताकि देश की जड़ों को मजबूत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक ताकत बढ़ाई जा सके।

द्विपक्षीय व्यापार और किसान-लघु उद्योगों की प्राथमिकता
मंच ने प्रस्ताव पारित किया कि भारत को बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के बजाय द्विपक्षीय समझौतों को तरजीह देनी चाहिए, जिससे किसानों और लघु उद्योगों के हितों की रक्षा हो सके। डॉ. अश्विनी महाजन ने कहा, “अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक मुक्त व्यापार प्रणाली कई बार स्थानीय उद्योगों को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए भारत को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में अपने हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।”
मंच ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी कृषि नीति को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से जोड़ते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, ताकि किसानों को सस्ते आयात से नुकसान न हो। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका से आने वाली सस्ती कृषि उपज भारतीय किसानों की आजीविका के लिए खतरा बन सकती है, इसलिए किसी भी समझौते में भारतीय कृषि और लघु उद्योगों की सुरक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।
ग्राम आधारित विकास और विकेंद्रीकृत अर्थव्यवस्था की आवश्यकता
राष्ट्रीय परिषद बैठक में भारत के सामाजिक-आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए 8 बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई। मंच ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, और जब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक भारत का समग्र विकास संभव नहीं है। प्रो. राजकुमार मित्तल ने बताया कि जिला उद्योग केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र, और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) क्षेत्र को सशक्त कर ग्रामीण भारत को समृद्ध किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “अगर हर गांव में एक छोटा उद्योग फले-फूले, तो लोगों को रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत नहीं होगी। इससे न केवल ग्रामीण विकास को बल मिलेगा, बल्कि शहरीकरण से उपजने वाली समस्याएं भी कम होंगी।”
विशेष सुझाव:
- स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ जैसी योजनाओं को मजबूत बनाकर स्थानीय शिल्प और कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहुंचाना।
- कृषि स्टार्टअप और FPOs: किसानों को आधुनिक तकनीक और कृषि स्टार्टअप्स से जोड़कर उनकी आय को दोगुना करना।
- स्वरोजगार केंद्र: हर जिले में स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर युवाओं को स्थानीय उद्योगों से जोड़ना।
युवाओं की शक्ति और उद्यमशीलता का प्रोत्साहन
भारत की युवा आबादी को “जनसांख्यिकीय लाभांश” में बदलने के लिए मंच ने कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, और उद्यमिता को बढ़ावा देने की सिफारिश की। बैठक में इस पर सहमति बनी कि भारत की युवा पीढ़ी को डिजिटल युग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए, लेकिन इस प्रक्रिया में सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा भी की जाए।
महत्वपूर्ण पहल:
- स्टार्टअप्स को आसान वित्तीय सहायता: छोटे उद्यमों और स्टार्टअप्स के लिए बिना जमानत के ऋण और सरकारी प्रोत्साहन।
- महिला उद्यमिता: महिलाओं के लिए विशेष उद्यमिता कार्यक्रम, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और सामाजिक बदलाव की वाहक बनें।
डिजिटल सांस्कृतिक प्रदूषण पर नियंत्रण
मंच ने इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफार्मों के जरिए बढ़ते सांस्कृतिक प्रदूषण पर चिंता जताई। उदाहरण के तौर पर, सोशल मीडिया के माध्यम से अनियंत्रित सामग्री युवाओं को भारतीय संस्कारों से दूर कर रही है। मंच ने सरकार से मांग की कि इंटरनेट सामग्री के लिए सख्त नीतियां बनाई जाएं, जैसे ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर इंटरनेट उपयोग की सीमाएं हैं।
चीन से आयात पर प्रतिबंध और भारतीय उत्पादन को बढ़ावा
स्वदेशी जागरण मंच ने चीन से होने वाले अनियंत्रित आयात पर रोक लगाने की मांग की। मंच ने तर्क दिया कि चीन से सस्ते उत्पादों के आयात ने भारतीय लघु और कुटीर उद्योगों को भारी नुकसान पहुंचाया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कृष्ण गोपाल ने कहा, “भारत को अपने उत्पादन की ताकत को समझना होगा। हमें विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करके, अपने स्थानीय उद्योगों को पुनर्जीवित करना चाहिए।”
एआई और रोबोटिक्स के लिए संतुलित नीति
मंच ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के बढ़ते उपयोग पर संतुलित नीति की मांग की। उन्होंने कहा कि AI का अत्यधिक इस्तेमाल बेरोजगारी बढ़ा सकता है, इसलिए AI नीति ऐसी होनी चाहिए, जो उत्पादकता बढ़ाए, लेकिन मानवीय श्रम को खत्म न करे।
स्थानीय विकास के लिए 2000 नए केंद्रों की योजना
बैठक में सुझाव दिया गया कि भारत में 1500-2000 नए औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र विकसित किए जाएं, जो स्थानीय आबादी को रोजगार प्रदान कर सकें। इससे न केवल ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि शहरों की ओर बढ़ता पलायन भी रुकेगा।
आत्मनिर्भर भारत की ओर ठोस कदम
स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद बैठक ने भारत के विकास के लिए एक ठोस रोडमैप प्रस्तुत किया। मंच ने स्पष्ट किया कि भारत को अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक जड़ों से जुड़े रहकर, वैश्विक व्यापार और तकनीकी नवाचार में आगे बढ़ना चाहिए। आत्मनिर्भरता, ग्राम विकास, और स्थानीय उद्यमशीलता पर आधारित यह दृष्टिकोण भारत को एक समृद्ध, शक्तिशाली, और स्थायी राष्ट्र बना सकता है।











