आपदा प्रबंधन की अग्रिम पंक्ति में महिलाओं की दस्तक: बिजनौर में स्वयं सहायता समूहों के ‘शक्ति कवच’ का शंखनाद
डिजिटल रिपोर्ट | बिजनौर | TargetTvLive रिपोर्ट: अवनीश त्यागी प्रकाशन तिथि: 05 अक्टूबर 2026
बिजनौर डीएम उमेश प्रताप सिंह के निर्देश पर आयोजित 3-दिवसीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिला फर्स्ट एड और रेस्क्यू का प्रशिक्षण। जानिए कैसे बदल रही है ग्राउंड रियलिटी।
की-हाइलाइट्स:
- आयोजन: 3-दिवसीय जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन व क्षमता विकास प्रशिक्षण कार्यशाला।
- स्थान व अवधि: सिटी बैंक्विट हॉल (राम का चौराहा के पास), बिजनौर | 05 अक्टूबर से 07 अक्टूबर 2026 तक।
- दिशा-निर्देश: जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह (IAS)।
- मुख्य प्रतिभागी: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं।
- प्रशिक्षक दल: आपदा विशेषज्ञ प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. प्रतीक, अग्निशमन विभाग व स्वास्थ्य विभाग के मास्टर ट्रेनर्स।
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: जब आपदा की घड़ी में ढाल बनेंगी गांव की ‘दीदियां‘
बिजनौर। बाढ़, भूकंप, अग्निकांड और आकाशीय बिजली—ये प्राकृतिक आपदाएं जब भी दस्तक देती हैं, सबसे गहरा और पहला आघात ग्रामीण परिवारों पर ही पड़ता है। लेकिन अब संकट के इन भयावह क्षणों में गांव की महिलाएं असहाय या लाचार नहीं रहेंगी, बल्कि अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर रक्षक की मजबूत भूमिका निभाएंगी।
जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह के निर्देशों पर बिजनौर के सिटी बैंक्विट हॉल (राम का चौराहा) में सोमवार, 05 अक्टूबर 2026 से तीन दिवसीय जिलास्तरीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला का शानदार आगाज हुआ। इस आयोजन का सीधा और स्पष्ट मकसद समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण (CBDRM) के अंतर्गत महिलाओं को ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ यानी आपदा के समय सबसे पहले मोर्चा संभालने वाली ढाल के रूप में तैयार करना है।
विश्लेषण: आपदा प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी क्यों है गेम-चेंजर?
ग्राउंड लेवल पर आपदा प्रबंधन की रणनीति को अगर बारीकी से समझा जाए, तो बिजनौर जिला प्रशासन का यह कदम केवल एक औपचारिक प्रशिक्षण सत्र नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक और दूरगामी रणनीतिक बदलाव है:
1. त्वरित प्राथमिक प्रतिक्रिया (Golden Hour Management): किसी भी आपदा के बाद शुरुआती 60 मिनट यानी ‘गोल्डन आवर’ जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। जब गांव और मोहल्ले की महिलाएं फर्स्ट एड, सीपीआर (CPR) और रेस्क्यू तकनीकों में निपुण होंगी, तो सरकारी राहत दल या एम्बुलेंस के पहुंचने से पहले ही वे कई बहुमूल्य जानें बचा लेंगी।
2. स्थानीय संसाधनों का संजीवनी जैसा उपयोग: कार्यशाला में अग्निशमन और आपदा विशेषज्ञों द्वारा महिलाओं को यह सिखाया जा रहा है कि कैसे दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली साधारण चीजों—जैसे प्लास्टिक के खाली केन, कपड़े और बाल्टी—का उपयोग करके आपातकाल में तुरंत जीवनरक्षक उपकरण तैयार किए जा सकते हैं।
3. अफवाहों पर नकेल और सटीक सूचना तंत्र: स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गांव-गांव तक फैली हुई हैं। प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक चेतावनियों और बचाव निर्देशों को बिना किसी भ्रम के जन-जन तक सटीक रूप से पहुंचाने में ये महिलाएं सबसे सशक्त माध्यम बनेंगी।
तीन दिवसीय कार्यशाला का विस्तृत रोडमैप
तीन दिनों में महिलाओं को आपदा प्रबंधन का संपूर्ण व्यवहारिक ज्ञान दिया जाएगा। कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों को प्राकृतिक व मानवजनित आपदाओं के स्वरूप, उनके खतरों की पहचान, पूर्व-तैयारियों और भूकंप व अग्निकांड जैसी अचानक आई विपदाओं में सुरक्षित रहने के बुनियादी नियम समझाए गए।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन स्वास्थ्य और आपदा विभाग के विशेषज्ञ महिलाओं को प्राथमिक उपचार, सीपीआर (CPR) देने के सही तरीके, और आग से झुलसने व गंभीर चोट लगने पर किए जाने वाले आपातकालीन उपचार का सघन अभ्यास कराएंगे।
कार्यशाला के अंतिम यानी तीसरे दिन प्रतिभागियों को व्यावहारिक मॉक ड्रिल, सुरक्षित निकासी (Evacuation) की तकनीकों और कम्युनिटी मैपिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे महिलाएं किसी भी आपदा के समय बिना घबराए तुरंत सही निर्णय ले सकें।
विशेषज्ञों व प्रशासनिक अधिकारियों का दृष्टिकोण
शुभारंभ सत्र के दौरान आपदा विशेषज्ञ प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. प्रतीक और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न प्रकार के उपकरणों और लाइव डेमो के जरिए महिलाओं को आपातकालीन स्थितियों को नियंत्रित करने की बारीकियां समझाईं।
प्रशासनिक अपील: जिला प्रशासन ने जनपदवासियों से पुरजोर अपील की है कि आपदा के समय किसी भी तरह से घबराएं नहीं और न ही अफवाहों पर भरोसा करें। लोग सजग रहें और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ही कड़ाई से पालन करें।
जन-आवाज: प्रशिक्षण पा रहीं महिलाओं का भरोसा
कार्यशाला में शामिल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस पहल को अपने दैनिक जीवन के लिए सुरक्षा कवच बताया। प्रतिभागियों का कहना था:
“अब तक आपदा के नाम से ही डर लगता था, लेकिन इस ट्रेनिंग ने हमारा डर दूर कर दिया है। अब हमें समझ आया है कि सही जानकारी और हिम्मत से हम अपने परिवार और पड़ोसियों की जान कैसे बचा सकते हैं। यह सीख हमारे दैनिक जीवन में भी बहुत काम आएगी।”
निष्कर्ष (TargetTvLive टेक):
बिजनौर जिला प्रशासन द्वारा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आपदा प्रबंधन का यह व्यावहारिक प्रशिक्षण देना एक अनुकरणीय और ऐतिहासिक पहल है। 07 अक्टूबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण से निखरकर निकलने वाली महिलाएं आने वाले समय में जिले के हर गांव और मोहल्ले में आपदा जागरूकता की मजबूत मशाल जलाएंगी।
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