सरकारी इंजीनियर ने योग में रचा अनोखा रिकॉर्ड, 1 घंटे 25 मिनट 5 सेकेंड पद्मासन में रहकर बढ़ाया यूपी सिंचाई विभाग का मान
धामपुर के अधिशासी अभियंता अरुण सचदेवा की योग साधना को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, 8 पद्मासन वैरिएशन के प्रदर्शन का रिकॉर्ड
TargetTvLive | विशेष रिपोर्ट
अवनीश त्यागी
बिजनौर (धामपुर)। सरकारी सेवा की जिम्मेदारियों के बीच योग को साधना बनाकर अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड तक पहुंचने की कहानी धामपुर के अधिशासी अभियंता अरुण सचदेवा को खास पहचान दिला रही है। उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अफजलगढ़ सिंचाई खंड में तैनात अरुण सचदेवा ने योग के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने विभाग के साथ-साथ धामपुर और बिजनौर का नाम भी चर्चा में ला दिया है।
1 घंटे 25 मिनट 5 सेकेंड तक पद्मासन में रहकर आठ अलग-अलग पद्मासन वैरिएशन का प्रदर्शन करने वाले अरुण सचदेव का नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है। रिकॉर्ड प्रमाणपत्र के अनुसार यह उपलब्धि 2 जुलाई 2026 को नोएडा में हासिल की गई।
इसके बाद 17 जुलाई 2026 को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी उनकी उपलब्धि दर्ज हुई। यानी जुलाई का महीना अरुण सचदेवा की योग साधना के लिए दोहरी उपलब्धि लेकर आया।
पद्मासन में सिर्फ बैठे नहीं रहे, लगातार दिखाए अलग-अलग वैरिएशन
रिकॉर्ड की खास बात केवल पद्मासन में लंबे समय तक बने रहना नहीं है। इस दौरान अरुण सचदेवा ने पद्मासन की विभिन्न शैलियों का प्रदर्शन किया। प्रमाणपत्र के अनुसार उन्होंने आठ पद्मासन वैरिएशन प्रस्तुत किए।
उनकी योग साधना में पूर्ण पद्मासन, बद्ध पद्मासन, सुप्त पद्मासन और ऊर्ध्व पद्मासन सहित विभिन्न आसनों का प्रदर्शन शामिल रहा। इसके साथ अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसी योग क्रियाओं का भी अभ्यास करते हैं।
यही वजह है कि उनकी उपलब्धि को केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एकाग्रता, संतुलन, धैर्य और निरंतर अभ्यास का परिणाम माना जा रहा है।
इंजीनियरिंग की नौकरी और योग साधना—दोनों में अनुशासन का मेल
अरुण सचदेवा की कहानी का दिलचस्प पहलू यह है कि योग उनका पेशा नहीं, बल्कि साधना है। सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारियों के साथ योग के लिए निरंतर अभ्यास करना उनके अनुशासन को दर्शाता है।
विभागीय कार्यों में तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ योग साधना ने उनके व्यक्तित्व को एक अलग पहचान दी है। सहयोगियों के बीच भी उनकी पहचान कार्य के प्रति गंभीरता, अनुशासन और मृदु व्यवहार रखने वाले अधिकारी के रूप में बताई जाती है।
अरुण सचदेवा के लिए योग का मतलब सिर्फ आसन नहीं
अरुण सचदेवा योग को केवल शरीर को स्वस्थ रखने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं मानते। उनके विचार में योग जीवन और कर्म दोनों को बेहतर बनाने की साधना है।
वह “योगः कर्मसु कौशलम्” को अपने जीवन का महत्वपूर्ण सूत्र मानते हैं। उनके अनुसार किसी भी कार्य को पूरी तल्लीनता, समभाव और उत्कृष्टता के साथ करना ही वास्तविक योग है।
उनका मानना है कि नियमित योग साधना व्यक्ति के भीतर अनुशासन, धैर्य, सहनशीलता, एकाग्रता और कर्तव्य के प्रति समर्पण की भावना मजबूत करती है।
रिकॉर्ड से आगे है इस उपलब्धि की कहानी
अरुण सचदेवा की उपलब्धि को सिर्फ एक रिकॉर्ड के तौर पर देखना इस कहानी के बड़े पक्ष को नजरअंदाज करना होगा। सरकारी सेवा में रहते हुए अपने कार्यक्षेत्र की जिम्मेदारियों के साथ व्यक्तिगत रुचि को साधना और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना अपने आप में प्रेरक उदाहरण है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां निरंतर एकाग्र रहना चुनौती बनता जा रहा है, वहीं 1 घंटे 25 मिनट 5 सेकेंड तक पद्मासन में स्थिर रहना मानसिक नियंत्रण और लंबे अभ्यास की ओर भी संकेत करता है।
उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि उम्र, पद या पेशा किसी व्यक्ति की दूसरी प्रतिभा के रास्ते में बाधा नहीं होना चाहिए। यदि नियमित अभ्यास, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो सरकारी अधिकारी भी योग, खेल, कला या किसी अन्य क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
बिजनौर से अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड तक पहुंची योग साधना
अरुण सचदेवा की उपलब्धि अब केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं रह गई है। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय रिकॉर्ड पुस्तकों में नाम दर्ज होने से उनके विभागीय सहयोगियों और क्षेत्र के लोगों में भी उत्साह है।
एक तरफ सिंचाई परियोजनाओं और विभागीय दायित्वों की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ योग की कठिन साधना—अरुण सचदेवा ने दोनों क्षेत्रों में अनुशासन को अपनी ताकत बनाया है।
TargetTvLive विश्लेषण
रिकॉर्ड 1 घंटे 25 मिनट 5 सेकेंड का है, लेकिन इसके पीछे की असली कहानी वर्षों के अनुशासन, अभ्यास और आत्मनियंत्रण की है। अरुण सचदेवा की उपलब्धि यह बताती है कि योग केवल मंच पर प्रदर्शन करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति की कार्यशैली और जीवन-दृष्टि को भी प्रभावित करने वाली साधना हो सकता है।
धामपुर में तैनात एक अधिशासी अभियंता का योग के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाना निश्चित रूप से स्थानीय स्तर पर भी गर्व का विषय है।












