नाइजीरिया के विवाह कानून पर डॉ. विवेक त्यागी का अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान
वैधानिक, प्रथागत और इस्लामिक कानून के अंतर्संबंधों के साथ महिलाओं के संपत्ति अधिकार, संवैधानिक समानता और बाल विवाह के कानूनी पहलुओं पर किया विश्लेषण
मेरठ | विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी, Target TV Live
नाइजीरिया में विवाह सिर्फ दो व्यक्तियों का संबंध नहीं, बल्कि वैधानिक कानून, प्रथागत परंपराओं और इस्लामिक कानून के बीच चलने वाला जटिल कानूनी समीकरण है। इसी व्यवस्था के दार्शनिक और संवैधानिक पहलुओं पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के विधि अध्ययन संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया।
अंतर्राष्ट्रीय इंटर्नशिप विश्वविद्यालय (IIU) के ग्लोबल कैंपस में आयोजित वेबिनार का विषय “Conjugal Concord and the Architecture of Law: A Philosophical-Doctrinal Inquiry into the Civil Law of Marriage in Nigeria” रहा। डॉ. त्यागी ने नाइजीरिया की कानूनी व्यवस्था को Legal Pluralism का उदाहरण बताते हुए कहा कि कॉमन लॉ की विरासत, स्थानीय प्रथाएं और इस्लामिक कानून आधुनिक संवैधानिक अधिकारों के साथ लगातार संवाद और टकराव की स्थिति में रहते हैं।
पांच न्यायशास्त्रीय सिद्धांतों से समझाया विवाह कानून
डॉ. त्यागी ने सर हेनरी मेन के Status and Contract, Natural Law, Savigny के Historical School, Legal Pluralism और Ronald Dworkin के अधिकार-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से नाइजीरियाई विवाह कानून की व्याख्या की।
उन्होंने बताया कि प्रथागत विवाह में परिवार, वंश, सामाजिक स्वीकृति और ब्राइड प्राइस जैसे तत्व महत्वपूर्ण हैं, जबकि वैधानिक विवाह व्यक्तिगत सहमति, औपचारिक प्रक्रिया और पंजीकरण पर आधारित है।
वैधानिक विवाह और बहुविवाह का कानूनी अंतर
Marriage Act और Matrimonial Causes Act के अंतर्गत वैधानिक विवाह मूलतः एकपत्नी/एकपति आधारित है, जबकि प्रथागत और इस्लामिक विवाहों में कुछ परिस्थितियों में बहुविवाह की अनुमति है।
डॉ. त्यागी ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से मौजूद प्रथागत विवाह के रहते किसी तीसरे व्यक्ति से वैधानिक विवाह करने पर विवाह की वैधता के साथ Bigamy का प्रश्न भी उठ सकता है।
महिलाओं के संपत्ति अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णायक रुख
व्याख्यान में Mojekwu v. Mojekwu, Mojekwu v. Iwuchukwu, Ukeje v. Ukeje और Anekwe v. Nweke जैसे महत्वपूर्ण मामलों का उल्लेख हुआ।
डॉ. त्यागी ने बताया कि बेटियों और महिलाओं को केवल लिंग के आधार पर पैतृक संपत्ति से वंचित करने वाली भेदभावपूर्ण प्रथाओं को नाइजीरियाई सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक समानता के मानकों पर परखा है। संविधान की धारा 42 के संदर्भ में यह न्यायिक रुख नाइजीरिया के पारिवारिक कानून में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
बाल विवाह और Forum Shopping भी चुनौती
डॉ. त्यागी ने Child Rights Act, 2003 में विवाह की न्यूनतम आयु से जुड़े प्रावधान और संविधान की धारा 29(4)(b) के बीच मौजूद जटिलता को रेखांकित किया। साथ ही बच्चों की कस्टडी और संपत्ति विवादों में Forum Shopping की समस्या तथा प्रथागत और इस्लामिक कानूनों को आधुनिक संवैधानिक समानता के अनुरूप ढालने की आवश्यकता पर जोर दिया।
परंपरा का सम्मान, लेकिन संविधान सर्वोपरि
डॉ. त्यागी के व्याख्यान का केंद्रीय संदेश रहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का संरक्षण जरूरी है, लेकिन वे मौलिक अधिकारों और संवैधानिक समानता से ऊपर नहीं हो सकतीं।
वेबिनार के समापन पर इंटरनेशनल इंटर्नशिप यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. चार्ल्स यूसीहोलो इभोरिया ने डॉ. त्यागी के व्याख्यान को विषय के विभिन्न आयामों को समेकित करने वाला बताया। इस अवसर पर प्रो. बूहारी इसास तथा प्रो. चूकोबूयूनोओसो चार्ल्स आफोइओम सहित अन्य शिक्षाविद उपस्थित रहे।
निष्कर्षतः, नाइजीरिया का विवाह कानून यह बड़ा सवाल सामने रखता है कि परंपरा, धर्म और आधुनिक संवैधानिक समानता के बीच न्यायपूर्ण संतुलन कैसे कायम किया जाए। डॉ. विवेक त्यागी का अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान इसी चुनौती को कानूनी और दार्शनिक दोनों दृष्टियों से रेखांकित करता है।
विशेष रिपोर्ट | अवनीश त्यागी
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