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बागपत का हिंदी मॉडल देश में नंबर-1: 592 नराकास में सर्वश्रेष्ठ, अमित शाह के मंच से मिला राष्ट्रीय सम्मान

इतिहास रच गया बागपत: 592 नराकास के बीच देश में अव्वल, मुंबई में अमित शाह के मंच से मिला राष्ट्रीय सम्मान

बागपत, 15 सितंबर 2026 | Target TV Live | विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

बागपत ने राजभाषा हिंदी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। भारत सरकार की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में बेहतर प्रदर्शन के लिए बागपत की नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) को वर्ष 2025-26 के लिए सर्वश्रेष्ठ नराकास राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है।

देशभर की 592 नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के बीच बागपत का चयन होना जिले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में यह सम्मान प्रदान किया गया।

छोटा जिला, राष्ट्रीय मंच पर बड़ी पहचान

बागपत की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन को यहां केवल कार्यालयी औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय डिजिटल संसाधनों, प्रशिक्षण, समीक्षा और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया।

14-15 सितंबर को मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री एवं अधिकारी मौजूद रहे।

इसी राष्ट्रीय मंच पर बागपत नराकास का नाम सर्वश्रेष्ठ समिति के रूप में सामने आया।

समिति अध्यक्ष एवं केनरा बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख मिन्हाजुल कमर तथा समिति सचिव एवं वरिष्ठ राजभाषा प्रबंधक अभय नाथ मिश्र ने गृह मंत्रालय से यह सम्मान संयुक्त रूप से प्राप्त किया।

बागपत मॉडल में क्या रहा खास?

बागपत की सफलता के पीछे राजभाषा कार्यान्वयन को तकनीक और नियमित प्रशिक्षण से जोड़ने की रणनीति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिंदी सेतु ऐप ने जोड़ा तकनीक से

समिति की गतिविधियों में ‘हिंदी सेतु’ जैसे डिजिटल संसाधन को प्रमुखता दी गई। इसके माध्यम से राजभाषा से जुड़े संसाधन, अनुवाद उपकरण, शब्दावली और प्रशिक्षण सामग्री को एक स्थान पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

इसका उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी में कार्यालयी कार्य को अधिक सहज बनाना रहा।

‘कालिंदी धारा’ ने रचनात्मक हिंदी को दिया मंच

राजभाषा कार्यान्वयन को केवल सरकारी पत्राचार तक सीमित न रखते हुए ‘कालिंदी धारा’ पत्रिका के माध्यम से रचनात्मक लेखन और हिंदी गतिविधियों को भी मंच दिया गया।

नियमित प्रकाशन, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अर्द्धवार्षिक समीक्षा जैसी गतिविधियों ने समिति की कार्यप्रणाली को निरंतर सक्रिय बनाए रखा।

केंद्रीय संस्थानों के बीच केनरा बैंक बना सेतु

बागपत नराकास में केनरा बैंक अग्रणी बैंक के रूप में केंद्रीय संस्थानों के बीच समन्वय की भूमिका में रहा। विभिन्न सदस्य कार्यालयों को राजभाषा गतिविधियों से जोड़ने और कार्यक्रमों के संचालन में समिति स्तर पर समन्वय किया गया।

इस अभियान में माय भारत स्वयंसेवक एवं राज्य युवा पुरस्कार विजेता अमन कुमार की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने सूचना और डिजिटल माध्यमों के जरिए हिंदी से जुड़े प्रयासों को व्यापक मंचों तक पहुंचाने में योगदान दिया।

अमित शाह ने हिंदी को तकनीक से जोड़ने पर दिया जोर

सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं की विविधता और हिंदी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाएं अलग-अलग स्वर हैं, लेकिन भारत की भावना और आवाज एक है।

राजभाषा के क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में ‘हिंदी शब्द-सिंधु’, ‘कंठस्थ 2.0’, ‘लीला राजभाषा’ और ‘लीला प्रवाह’ जैसी पहलों का भी उल्लेख किया गया।

‘हिंदी शब्द-सिंधु’ को व्यापक बनाने और उसमें स्थानीय बोलियों के शब्दों को शामिल करने की पहल को भारतीय भाषाई विविधता को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर प्रस्तुत किया गया।

सम्मान के बाद अभय नाथ मिश्र बोले—सामूहिक प्रयास का परिणाम

सम्मान प्राप्त करने के बाद समिति सचिव अभय नाथ मिश्र ने इसे किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि न बताते हुए सदस्य कार्यालयों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।

उनके अनुसार यह सम्मान समिति से जुड़े सभी कार्यालयों और कार्मिकों को राजभाषा के क्षेत्र में और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करेगा।

बागपत की उपलब्धि का बड़ा संदेश

बागपत की यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार तक सीमित नहीं है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि राजभाषा कार्यान्वयन को तकनीक, प्रशिक्षण, समीक्षा और रचनात्मक गतिविधियों के साथ जोड़कर एक व्यवस्थित मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया गया।

592 नराकास के बीच बागपत का राष्ट्रीय स्तर पर चयन यह संकेत देता है कि राजभाषा हिंदी का प्रभाव तभी व्यापक हो सकता है, जब सरकारी कामकाज के साथ उसे तकनीक और नई पीढ़ी से भी जोड़ा जाए।

बागपत ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर यह संदेश जरूर दिया है कि जिले का आकार छोटा हो सकता है, लेकिन काम की दिशा और सोच बड़ी हो तो पहचान देशभर में बन सकती है।

Target TV Live के लिए अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट।

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