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413 PPM पर धधक रही है धरती! CCSU Meerut के डॉ. विवेक त्यागी ने IIU Global के मंच से दुनिया को ललकारा – हल लैब में नहीं, वेदों में है!
चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के HOD डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने अंतर्राष्ट्रीय इंटर्नशिप विश्वविद्यालय (IIU Africa) में ‘माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः’ का मंत्र फूंका, अफ्रीकी दर्शन Ubuntu से जोड़ा भारत का नाता।
IIU Global के अफ्रीकी मंच पर CCSU के विधि विभागाध्यक्ष ने दिया ग्लोबल विजन – ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ ही है क्लाइमेट जस्टिस का आखिरी हथियार
– अवनीश त्यागी | TargetTvLive
मेरठ : चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के विधि अध्ययन संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने 21 अगस्त 2026 को IIU Global की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा को जलवायु संकट के सबसे बड़े हथियार के तौर पर पेश कर दिया। जिस सत्र की अध्यक्षता खुद IIU के कुलपति Snr. Prof. General Charles Usiholo Ebhoria कर रहे थे, वहां मेरठ की इस हुंकार ने भारत को ग्लोबल साउथ का नया लीडर घोषित कर दिया।
दुनिया जब AC कमरों में बैठकर कार्बन क्रेडिट का हिसाब लगा रही है, तब मेरठ ने बता दिया कि समाधान किताबों में नहीं, हमारी संस्कृति में है।
TargetTvLive पर पढ़िए डॉ. त्यागी के भाषण की वो 5 बातें, जिसने अफ्रीका से अमेरिका तक सोचने पर मजबूर कर दिया –
1. आंकड़ों से सीधा हमला – ये कुदरत का कहर नहीं, इंसान का पाप है!
डॉ. त्यागी ने मंच पर कोई घुमा-फिरा कर बात नहीं की। सीधे दो बम फोड़े – धरती का तापमान 1.45°C बढ़ चुका है और CO2 413 PPM के पार जा चुका है। बोले, “ये जलवायु परिवर्तन नहीं, मानवीय चरित्र का पतन है। प्रकृति ने धोखा नहीं दिया, इंसान ने लालच में अपनी माँ का ही सौदा कर दिया।”
2. अथर्ववेद से ब्रह्मास्त्र – माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः
यही वो लाइन थी जिस पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। डॉ. त्यागी ने कहा – पश्चिम की दुनिया जमीन को ‘प्रॉपर्टी’ कहती है, हम ‘माता’ कहते हैं। अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त में लिखा है – ‘माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः’**। जब तक आप धरती को माता नहीं मानोगे, कोई भी कानून, कोई भी पेरिस समझौता आपको बचा नहीं सकता। भारतीय दर्शन पर्यावरण को पॉलिसी नहीं, **’ऋत’ – यानी नैतिक कर्तव्य मानता है।
3. संविधान में ही है समाधान – दुनिया अब पढ़ रही है, हमने 1950 में लिख दिया था!
उन्होंने दुनिया को भारत के संविधान की ताकत दिखाई। कहा, अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार = स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार), अनुच्छेद 48A (सरकार का कर्तव्य) और 51A(g) (हर नागरिक का धर्म) – ये कोई धारा नहीं, क्लाइमेट जस्टिस का त्रिशूल है। जो काम दुनिया अब कर रही है, बाबा साहेब ने दशकों पहले कर दिया था।
4. महासंगम – जब भारत का ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ मिला अफ्रीका के ‘उबुंटू’ से!
भाषण का सबसे कूटनीतिक और सबसे वायरल पॉइंट। डॉ. त्यागी ने भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और अफ्रीका के ‘Ubuntu – I am because we are’ को एक ही आत्मा बताया। तंज कसते हुए बोले – “प्रदूषण फैलाया ग्लोबल नॉर्थ ने, भुगत रहा है ग्लोबल साउथ। अब न्याय की लड़ाई भी हमें मिलकर ही लड़नी होगी। यही सच्ची जलवायु नैतिकता है।”
5. बावड़ी, जोहड़ और गांधी का लंगोट – असली ‘Mission LiFE‘
डॉ. त्यागी ने मोदी सरकार के ‘Mission LiFE’ और UN के SDGs को सीधे गांव से जोड़ दिया। बोले, UN जो सिखा रहा है, वो हमारे यहाँ बावड़ी, जोहड़, पवित्र उपवनों (Sacred Groves) में सदियों से है। महात्मा गांधी का ‘अपरिग्रह’ यानी जरूरत से ज्यादा मत लो और ‘ट्रस्टीशिप’ यानी प्रकृति के ट्रस्टी बनो, यही असली सस्टेनेबिलिटी है।
TargetTvLive का विश्लेषण: मेरठ से निकला ये विजन क्यों है ऐतिहासिक?
अवनीश त्यागी का Take: ये सिर्फ एक प्रेस विज्ञप्ति नहीं है। ये भारत की सॉफ्ट पावर का डेमो है। डॉ. विवेक त्यागी ने वही किया जो भारत की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का मूल है – Indian Knowledge System (IKS) को ग्लोबल प्रॉब्लम का सॉल्यूशन बनाना।
उन्होंने पर्यावरण कानून को कोर्ट-कचहरी से निकालकर आम आदमी की नैतिकता से जोड़ दिया है। ये बताता है कि CCSU मेरठ अब सिर्फ डिग्री बांटने वाला विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि ग्लोबल पॉलिसी बनाने वाला थिंक-टैंक बन रहा है।
अंत में डॉ. त्यागी ने जो आह्वान किया वो सीधे प्रधानमंत्री के विजन से जुड़ता है – “अब समय आ गया है कि भारतीय ज्ञान परंपरा के सिद्धांतों को पर्यावरण कानून और वैश्विक कूटनीति की किताबों में लिखा जाए, सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित न रखा जाए।”
क्या वाकई वेदों में है दुनिया को बचाने का मंत्र? आपकी क्या राय है? कमेंट कीजिए और ऐसी ही धारदार खबरों के लिए देखते रहिए TargetTvLive.
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Report By: Avnish Tyagi | TargetTvLive












