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बीमारी का डर, ‘यक्ष की मौत’ का खौफ और 70 लाख का खेल! तंत्र-मंत्र के नाम पर कथित ठगी का खुलासा, चार गिरफ्तार

बीमारी का डर, ‘यक्ष की मौत’ का खौफ और 70 लाख का खेल! तंत्र-मंत्र के नाम पर कथित ठगी का खुलासा, चार गिरफ्तार

एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने पुलिस लाइन सभागार में प्रेसवार्ता कर किया खुलासा; धामपुर के परिवार को ‘यक्ष की जान खतरे में’ बताकर पूजा-पाठ के नाम पर लाखों ऐंठने का आरोप, कार और ₹1.04 लाख नकद बरामद

बिजनौर। बीमार बेटे की सलामती की चिंता को कथित तौर पर भय, अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के जाल में बदलकर एक परिवार से करीब 70 लाख रुपये की रकम हड़पने के मामले का बिजनौर पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने परिवार को बेटे की जान पर खतरा होने का भय दिखाया और झाड़-फूंक व पूजा के नाम पर उसे अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर कथित रूप से लाखों रुपये ऐंठ लिए। मामला इतना आगे बढ़ा कि परिवार का 38 लाख रुपये का मकान बिकवाने, करीब 14 लाख रुपये के जेवर बिकवाने और 13 लाख रुपये का ऋण निकलवाने का आरोप है।
पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने सोमवार को पुलिस लाइन सभागार में प्रेस वार्ता कर पूरे मामले का खुलासा किया। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए घटना में प्रयुक्त डिजायर कार और 1.04 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।

TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट।

बेटे की बीमारी बनी कथित ‘भय की पटकथा’

धामपुर थाना पुलिस के अनुसार ग्राम नंगला नैसी निवासी संदीप कुमार ने 1 अक्टूबर को शिकायत दी थी। शिकायत के मुताबिक उसके पुत्र यक्ष की तबीयत खराब रहने पर परिचित मोनू चौधरी उसे एक कथित पहाड़ी पंडित के पास ले गया।

पुलिस के मुताबिक यहीं से परिवार को यह विश्वास दिलाने का सिलसिला शुरू हुआ कि बेटे की जान खतरे में है। झाड़-फूंक और पूजा के नाम पर परिवार को दारागंज, हरिद्वार और श्यामपुर कांगड़ी स्थित काली माता मंदिर समेत कई स्थानों पर ले जाया गया।

आरोप है कि धार्मिक आस्था और भय के मिश्रण से ऐसा माहौल बनाया गया कि परिवार कथित तौर पर आरोपियों के बताए उपायों और निर्देशों का पालन करता चला गया।

38 लाख का मकान, 14 लाख के जेवर और 13 लाख का कर्ज!

पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आए विवरण के मुताबिक संदीप कुमार का धामपुर स्थित मकान करीब 38 लाख रुपये में बिकवाया गया।

इसके बाद उसकी पत्नी के 13 तोले सोने और 500 ग्राम चांदी के आभूषण करीब 14 लाख रुपये में बिकवाने का आरोप है।

इतना ही नहीं, पुलिस दस्तावेज में नौकरी पर करीब 13 लाख रुपये का ऋण निकलवाने और पूजा सामग्री के नाम पर लगभग 5 लाख रुपये लेने की बात भी दर्ज है।

इन सभी रकमों को जोड़ने पर पुलिस के अनुसार कथित रूप से करीब 70 लाख रुपये की रकम आरोपियों द्वारा हड़प लिए जाने की बात सामने आई है।

डर इतना कि ‘किसी को बताया तो जान जाएगी’!

मामले का सबसे गंभीर आरोप परिवार को धमकाने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार घटना की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को देने पर काली माता के प्रकोप से मृत्यु होने की धमकी दी गई।

पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक इस धमकी से संबंधित लेख दस रुपये के स्टांप पर भी लिखवाया गया।

यानी पुलिस की कहानी में कथित ठगी का आधार केवल पैसे की मांग नहीं था, बल्कि परिवार के भीतर लगातार भय और अंधविश्वास का दबाव बनाए रखना भी था।

पुलिस की कार्रवाई में चार आरोपी गिरफ्तार

धामपुर पुलिस ने मामले में मु0अ0सं0 390/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 351(3), 61(2), 308(5) और 317(2) के तहत कार्रवाई की।

5 अक्टूबर को पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया—

  • पहाड़ी पंडित उर्फ संजय शर्मा, निवासी एफी सराय, थाना चांदपुर, हाल निवासी कनखल, हरिद्वार।
  • मोनू चौधरी उर्फ देशपाल, निवासी भटोली, थाना नगीना देहात।
  • यश चौधरी, निवासी गजपुरा, थाना धामपुर।
  • कोमल सिंह, निवासी साकेत विहार कॉलोनी, धामपुर।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे/घटना से संबंधित डिजायर कार संख्या UP20CJ9771 और 1,04,000 रुपये नकद बरामद किए हैं।

अब जांच का असली सवाल—70 लाख कहां गए?

मामले में सबसे महत्वपूर्ण जांच यह होगी कि कथित रूप से परिवार से ली गई रकम का पूरा प्रवाह क्या था और क्या इस प्रकरण में गिरफ्तार चार लोगों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।

पुलिस के सामने यह भी महत्वपूर्ण होगा कि परिवार को अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर ले जाने, कथित भय पैदा करने और रकम जुटाने की पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित हुई।

यदि जांच में पुलिस के आरोप पुष्ट होते हैं तो मामला केवल आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बीमारी और धार्मिक आस्था के नाम पर भय पैदा कर आर्थिक शोषण करने के कथित तरीके की गंभीर तस्वीर भी सामने आएगी।

बीमारी में अंधविश्वास नहीं, प्रमाणित उपचार जरूरी

यह मामला समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश देता है। बीमारी या संकट के समय परिवार भावनात्मक रूप से कमजोर हो सकता है। ऐसे समय में किसी व्यक्ति की आस्था का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन जान का भय दिखाकर धन, संपत्ति या जेवर देने के लिए दबाव बनाना गंभीर चेतावनी का संकेत है।

बीमारी की स्थिति में प्रमाणित चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना और किसी भी संदिग्ध आर्थिक मांग की सूचना पुलिस को देना जरूरी है।

पुलिस टीम की भूमिका

पुलिस प्रेस नोट के अनुसार गिरफ्तारी में स्वाट टीम, धामपुर थाना पुलिस और सर्विलांस सेल की संयुक्त भूमिका रही। टीम में निरीक्षक सचिन मलिक, व0उ0नि0 सत्यपाल सिंह, उपनिरीक्षक हिमांशु गोस्वामी, उपनिरीक्षक कुलभूषण प्रताप सिंह समेत थाना, स्वाट और सर्विलांस सेल के पुलिसकर्मी शामिल रहे।

महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष: यह खबर पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट और उसमें दर्ज आरोपों पर आधारित है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगी।

TargetTvLive | विशेष रिपोर्ट

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर

 

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