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​’आरक्षण छीनने’ का फैलाया गया डर? बिजनौर कलेक्ट्रेट में उतरी भीड़ के रुख ने खोला बड़ा राज!

बिजनौर कलेक्ट्रेट में असपा,भीम आर्मी का प्रदर्शन: ‘आरक्षण खतरे में है’ का नैरेटिव या सियासी स्टंट? भीड़ के रुख ने खोला भ्रामक दावों का सच

 

बिजनौर (targetTvLive)। बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में गुरुवार को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी द्वारा आयोजित ‘संपूर्ण भागीदारी आंदोलन’ को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कलेक्ट्रेट में जुटी भीड़ और संगठन के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि यह प्रदर्शन जनहित से ज्यादा आम लोगों को “आरक्षण खत्म होने” का काल्पनिक डर दिखाकर राजनीतिक रोटियां सेकने और भ्रामक प्रचार के जरिए भीड़ जुटाने की एक सोची-समझी कोशिश थी।

आरक्षण का काल्पनिक डर और भ्रम फैलाने की रणनीति

कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और आम नागरिकों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान जिस तरह से ‘आरक्षण छीने जाने’ का माहौल बनाया गया, वह पूरी तरह निराधार है। संविधान में सुरक्षित आरक्षण व्यवस्था को लेकर कोई खतरा न होने के बावजूद, आम जनता को गुमराह कर भावनात्मक रूप से भड़काने का प्रयास किया गया।

हालांकि, प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट में मौजूद जनसमूह के ठंडे रुख ने यह साफ कर दिया कि अब आम जनता ऐसे भ्रामक दावों और राजनीतिक बहकावे में आने वाली नहीं है। वहां मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया से साफ झलका कि जनता अब नारों के पीछे छिपा असल सियासी एजेंडा समझ चुकी है।

भीड़ जुटाने का दांव पड़ा फीका: जागरूक हुई जनता

प्रदर्शन के दौरान 50% महिला आरक्षण, जातिगत जनगणना और बैकलॉग भरने जैसी मांगों का पुलिंदा तो रखा गया, लेकिन जानकारों के मुताबिक इन मांगों की आड़ में केवल क्षेत्र में सिमटती राजनीतिक जमीन को बचाने का प्रयास किया गया।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर बार किसी आंदोलन या चुनाव से ठीक पहले आरक्षण को खतरे में बताकर निर्दोष लोगों को कलेक्ट्रेट की धूप में खड़ा कर देना एक पुराना हथकंडा बन चुका है। लेकिन इस बार जनता का सतर्क रवैया यह बताने के लिए काफी था कि भ्रामक बयानों के सहारे जनाधार खड़ा करने का दौर अब बीत चुका है।

विश्लेषण: क्या दांव पर लगी है साख?

targetTvLive के वरिष्ठ पत्रकार अवनीश त्यागी के जमीनी विश्लेषण के अनुसार, बिजनौर में हुआ यह प्रदर्शन भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के लिए एक आईना साबित हुआ है। केवल काल्पनिक मुद्दों और अफवाहो के दम पर भीड़ जुटाने की रणनीति अब नाकाम होती दिख रही है। जनता अब केवल राजनीतिक नारेबाजी के बजाय जमीनी विकास, पारदर्शिता और वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ऐसे में भ्रामक प्रचार के सहारे सियासी बढ़त हासिल करने का यह दांव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है।

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी डिजिटल डेस्क: targetTvLive News Network, उत्तर प्रदेश

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