Target Tv Live

मशीन फैसला करेगी, जवाबदेह कौन होगा? ब्राजील में डॉ. विवेक त्यागी ने AI न्याय का मॉडल रखा

ब्राजील की वर्ल्ड कांग्रेस में भारतीय न्यायशास्त्र की दस्तक, डॉ. विवेक त्यागी ने रखा AI के ‘न्याय’ का 5-स्तरीय मॉडल

नियमों का पालन ही पर्याप्त नहीं, AI के फैसले से किसे न्याय मिला—ब्राजील में उठाया गया बड़ा सवाल
अवनीश त्यागी | TargetTvLive

मिनास जेराइस, ब्राजील।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI अब केवल तकनीक का विषय नहीं रह गई है। बैंकिंग से लेकर स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा और आपराधिक न्याय तक AI आधारित प्रणालियां निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे दौर में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी एल्गोरिदम का नियमों के मुताबिक काम करना ही उसे न्यायपूर्ण बना देता है?

ब्राजील के मिनास जेराइस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड कांग्रेस में इसी सवाल को भारतीय न्यायशास्त्र और दर्शन के संदर्भ में सामने रखा गया। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के विधि अध्ययन विभाग के अध्यक्ष एवं सह आचार्य डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने अपने शोधपत्र के माध्यम से AI शासन की बहस को तकनीकी अनुपालन से आगे ले जाकर न्याय, जवाबदेही और मानवीय गरिमा के सवाल से जोड़ने का प्रयास किया।

उनकी प्रस्तुति का विषय था—“न्याय, धर्म और एल्गोरिदम न्याय: हिंदू विधि दर्शन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का शासन।”

ब्राजील के मंच से उठा सीधा सवाल—‘सही’ AI क्या हमेशा ‘न्यायपूर्ण’ भी है?

डॉ. त्यागी ने AI शासन की मौजूदा बहस में एक बुनियादी अंतर की ओर ध्यान आकर्षित किया—नीति का अनुपालन और न्याय की प्राप्ति एक ही बात नहीं है।

यदि कोई AI प्रणाली निर्धारित नियमों के अनुसार निर्णय लेती है, लेकिन उसके परिणाम से किसी वर्ग, समुदाय या व्यक्ति को लगातार नुकसान पहुंचता है, तो केवल नियमों का पालन उस निर्णय को न्यायपूर्ण साबित नहीं करता।

प्रस्तुति के प्रमुख सवाल

  • AI निर्णय का आधार क्या है?
  • निर्णय में इस्तेमाल आंकड़े कितने विश्वसनीय हैं?
  • क्या एल्गोरिदम में छिपा पूर्वाग्रह परिणाम को प्रभावित कर रहा है?
  • प्रभावित व्यक्ति को निर्णय का कारण बताया जा सकता है या नहीं?
  • AI के फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार है या नहीं?
  • गलत निर्णय की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी?
  • समय के साथ AI प्रणाली वास्तव में निष्पक्ष बनी हुई है या नहीं?

यहीं से डॉ. त्यागी के प्रस्तावित पांच-स्तरीय AI न्याय मॉडल की अवधारणा सामने आती है।

भारतीय न्याय-दर्शन से AI शासन तक—पांच सीढ़ियों का मॉडल

डॉ. त्यागी ने ऋग्वेद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र, गौतम के न्याय सूत्र, याज्ञवल्क्य स्मृति और श्रीमद्भगवद्गीता में निहित विचारों का विश्लेषण करते हुए AI शासन के लिए पांच स्तरों वाला ढांचा प्रस्तुत किया।

1. साधारण धर्म—AI के लिए सार्वभौमिक आधार

मॉडल की पहली सीढ़ी उन मूलभूत सिद्धांतों से जुड़ी है जो किसी भी AI प्रणाली पर लागू होने चाहिए।

मुख्य आधार:

  • सत्यता और विश्वसनीयता
  • अहिंसा एवं नुकसान को न्यूनतम करना
  • गैर-भेदभाव
  • मानव गरिमा का सम्मान
  • निष्पक्षता
  • सुरक्षित तकनीकी व्यवहार

अर्थात तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, उसके केंद्र में मानव हित और गरिमा का प्रश्न बना रहना चाहिए।

2. स्वधर्म निर्धारण—हर क्षेत्र के लिए एक जैसा AI नियम क्यों नहीं?

AI का इस्तेमाल स्वास्थ्य और बैंकिंग में एक जैसा नहीं है। रोजगार, शिक्षा और आपराधिक न्याय की परिस्थितियां भी अलग हैं।

इसलिए दूसरे स्तर पर क्षेत्र-विशेष जिम्मेदारी और नियमों की अवधारणा सामने आती है।

उदाहरण के तौर पर

  • स्वास्थ्य: मरीज की सुरक्षा और निजता
  • बैंकिंग/क्रेडिट: आर्थिक भेदभाव से सुरक्षा
  • रोजगार: समान अवसर
  • शिक्षा: विद्यार्थियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार
  • आपराधिक न्याय: निष्पक्षता और अपील का अधिकार

इस दृष्टिकोण का आधार यह है कि एक ही AI नीति हर क्षेत्र की जटिलताओं का समाधान नहीं कर सकती।

3. प्रमाण समीक्षा—AI ने फैसला आखिर किस आधार पर लिया?

तीसरे स्तर में गौतम के न्याय सूत्र में वर्णित चार प्रमाणों—प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द—के आधार पर AI निर्णयों की विश्वसनीयता और तार्किकता की समीक्षा का विचार सामने आता है।

सरल शब्दों में सवाल होगा—

AI ने यह फैसला किस तथ्य, किस आंकड़े और किस तर्क के आधार पर लिया?

यह स्तर AI की explainability और evidence-based decision making से जुड़ता है।

4. राजधर्म जवाबदेही—‘मशीन ने किया’ कहकर जिम्मेदारी खत्म नहीं हो सकती

AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ सबसे कठिन सवालों में एक है—गलत निर्णय होने पर जिम्मेदार कौन होगा?

डॉ. त्यागी के मॉडल का चौथा स्तर इसी सवाल पर केंद्रित है।

AI चाहे स्वचालित निर्णय ले, लेकिन उसके संचालन और इस्तेमाल के पीछे किसी व्यक्ति, संस्था या नियामक ढांचे की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए।

जवाबदेही के सवाल

  • AI प्रणाली किसने विकसित या तैनात की?
  • निर्णय की निगरानी कौन कर रहा है?
  • गलती सामने आने पर सुधार कौन करेगा?
  • प्रभावित व्यक्ति शिकायत कहां करेगा?
  • अंतिम संस्थागत जिम्मेदारी किसकी होगी?

यानी AI को निर्णयकर्ता मानकर मानव जवाबदेही से बचने का रास्ता नहीं होना चाहिए।

5. न्याय ऑडिट—AI का हिसाब सिर्फ शुरुआत में नहीं, लगातार

पांचवें स्तर पर डॉ. त्यागी ने न्याय ऑडिट की अवधारणा रखी।

किसी AI प्रणाली को एक बार जांचकर हमेशा के लिए निष्पक्ष मान लेना पर्याप्त नहीं होगा। उसके वास्तविक परिणामों की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक होगी।

न्याय ऑडिट में पूछे जा सकते हैं ये सवाल

  • क्या किसी वर्ग के साथ लगातार भेदभाव हो रहा है?
  • क्या प्रभावित व्यक्ति को निर्णय का कारण मिलता है?
  • क्या निर्णय के खिलाफ अपील संभव है?
  • क्या AI के कारण सामाजिक या आर्थिक असमानता बढ़ रही है?
  • क्या समय के साथ प्रणाली के परिणाम बदल रहे हैं?
  • क्या आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं?

यही पांचवां स्तर मॉडल को निरंतर निगरानी और परिणाम आधारित जवाबदेही से जोड़ता है।

प्राचीन ज्ञान, लेकिन आधुनिक कसौटी जरूरी

डॉ. त्यागी की प्रस्तुति का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों से विचार लेते समय उन्हें आधुनिक लोकतांत्रिक और समावेशी मूल्यों की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

इसका अर्थ है कि ऐतिहासिक सामाजिक असमानताओं या पदानुक्रम को AI व्यवस्था में दोहराने की गुंजाइश नहीं हो सकती।

AI के लिए प्रासंगिक भारतीय न्याय-दर्शन से यदि कोई सिद्धांत लिया जाए तो उसका परीक्षण समानता, गैर-भेदभाव, मानवाधिकार और गरिमा के आधुनिक मानकों पर भी आवश्यक होगा।

AI का सबसे बड़ा खतरा तकनीक नहीं, पक्षपाती डेटा भी हो सकता है

AI जिस डेटा से सीखती है, उसमें यदि पहले से सामाजिक या संस्थागत पूर्वाग्रह मौजूद हैं तो एल्गोरिदम उन पैटर्न को दोहरा सकता है।

उदाहरण के लिए यदि किसी ऋण प्रणाली के पुराने डेटा में किसी समूह को लगातार कम ऋण दिया गया है, तो AI उसी पुराने पैटर्न को ‘सामान्य’ मानकर भविष्य के निर्णयों में भी दोहरा सकती है।

यहीं प्रमाण समीक्षा, मानव जवाबदेही और न्याय ऑडिट जैसे तीन स्तर महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

23 देशों के 127 विशेषज्ञों की भागीदारी

उपलब्ध सम्मेलन सामग्री के अनुसार, दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन में 23 देशों के 127 विशेषज्ञों ने AI और डिजिटल परिवर्तन के सामाजिक, कानूनी एवं आर्थिक प्रभावों पर विचार-विमर्श किया।

डॉ. त्यागी की प्रस्तुति के दौरान पेरू, ब्राजील, रूस, इटली, स्पेन और अर्जेंटीना सहित विभिन्न देशों के विशेषज्ञों की उपस्थिति का उल्लेख किया गया है।

सम्मेलन में प्रोफेसर जॉर्ज इसाक टोरेस मैनरिक, प्रोफेसर मार्सियो एडुआर्डो सेनरा नोगीरा, डेल्टन रिबेरो, प्रोफेसर मौरिसियो दा कुन्हा सविनो फिलो, प्रोफेसर क्लाइड कैलगारो, प्रोफेसर लारिसा सानिकोवा, प्रोफेसर रॉबर्टो गैरेटो, प्रोफेसर रूबेन मिरांडा गोंकाल्वेस, प्रोफेसर टार्सिस बैरेटो ओलिवेरा और प्रोफेसर एडुआर्डो जे. आर. ललुगदार सहित अन्य विद्वानों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

विश्लेषण: AI को ‘कुशल’ बनाने से आगे ‘न्यायपूर्ण’ बनाना बड़ी चुनौती

AI की वैश्विक बहस में पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और नियमन जैसे विषय लगातार महत्वपूर्ण हो रहे हैं। लेकिन इनके साथ एक और प्रश्न तेजी से सामने आ रहा है—AI के निर्णय का सामाजिक परिणाम क्या है?

यहीं भारतीय न्यायशास्त्र आधारित यह प्रस्ताव एक अलग वैचारिक दिशा सामने रखता है।

किसी AI मॉडल का निर्णय तकनीकी रूप से सटीक हो सकता है, फिर भी उसका प्रभाव किसी व्यक्ति या समूह के लिए अनुचित हो सकता है। इसलिए केवल “AI ने सही गणना की या नहीं” से आगे बढ़कर यह पूछना जरूरी है कि “AI के निर्णय का परिणाम न्यायपूर्ण था या नहीं।”

पांच स्तरों को एक नजर में समझिए

  • साधारण धर्म: सार्वभौमिक नैतिक आधार
  • स्वधर्म: क्षेत्र-विशेष नियम और जिम्मेदारी
  • प्रमाण समीक्षा: निर्णय के तथ्य और तर्क की जांच
  • राजधर्म: मानव/संस्थागत जवाबदेही
  • न्याय ऑडिट: परिणामों की निरंतर स्वतंत्र समीक्षा

ब्राजील से उठी बहस भारत तक क्यों महत्वपूर्ण?

AI अब भविष्य की तकनीक नहीं, वर्तमान की निर्णय प्रणाली का हिस्सा बनती जा रही है। ऐसे में कानून और तकनीक के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, AI आधारित व्यवस्थाओं में जवाबदेही के सवाल उतने ही स्पष्ट हो सकेंगे।

डॉ. विवेक कुमार त्यागी का प्रस्तुत मॉडल इसी बिंदु पर भारतीय न्यायशास्त्रीय अवधारणाओं को आधुनिक AI शासन की बहस से जोड़ने का प्रयास करता है।

इस मॉडल की वास्तविक उपयोगिता का आकलन हालांकि तभी संभव होगा, जब इसके सिद्धांतों को आधुनिक AI प्रणालियों, कानूनों और संस्थागत नियमन पर व्यावहारिक रूप से लागू करके परखा जाए।

निष्कर्ष

ब्राजील की वर्ल्ड कांग्रेस में भारतीय न्यायशास्त्र से AI शासन को देखने का प्रस्ताव केवल तकनीकी बहस नहीं, बल्कि न्याय की कसौटी पर तकनीक को परखने का विमर्श है।

डॉ. विवेक कुमार त्यागी का पांच-स्तरीय मॉडल इस मूल प्रश्न को केंद्र में रखता है कि AI कितना तेज, स्मार्ट या कुशल है, यह महत्वपूर्ण है; लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि उसके निर्णय कितने पारदर्शी, जवाबदेह, गैर-भेदभावपूर्ण और न्यायसंगत हैं।

AI के दौर में मशीनें निर्णय ले सकती हैं, लेकिन न्याय की अंतिम कसौटी अभी भी मानव समाज के मूल्यों से ही तय होगी।

अवनीश त्यागी
TargetTvLive

Leave a Comment

यह भी पढ़ें