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24 घंटे भी नहीं टिका बिजनौर DM का कड़ा आदेश! कलेक्ट्रेट में घुसकर भारतीय किसान संघ ने किया प्रदर्शन

24 घंटे भी नहीं टिका बिजनौर DM का कड़ा आदेश! कलेक्ट्रेट में घुसकर भारतीय किसान संघ ने किया प्रदर्शन 

विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive (डिजिटल डेस्क, बिजनौर)

बिजनौर (25 सितंबर 2026)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और किसान आंदोलनों के बीच का संघर्ष एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। बिजनौर में नवागत जिला मजिस्ट्रेट उमेश प्रताप सिंह द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर को ‘नो-प्रोटेस्ट ज़ोन’ (निषिद्ध क्षेत्र) घोषित कर केवल ‘इंदिरा बाल भवन’ में प्रदर्शन सीमित करने के आदेश की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि भारतीय किसान संघ ने इस प्रशासनिक फरमान को सीधे कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर ही ललकार दिया।

आदेश जारी होने के 24 घंटे के भीतर भारतीय किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने कलेक्ट्रेट में न केवल प्रवेश किया, बल्कि शासन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

भीम आर्मी-ASP के बाद किसान संघ की ललकार: बैकफुट पर प्रशासन?

बीते दिनों आजाद समाज पार्टी (ASP) और भीम आर्मी के उग्र शक्ति-प्रदर्शन से हलकान जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट की नज़ीरों और 2018 के शासनादेश का हवाला देकर कलेक्ट्रेट को ‘धरना-मुक्त’ करने का ऐतिहासिक दांव खेला था।

लेकिन 24 घंटे के भीतर भारतीय किसान संघ ने यह साफ कर दिया कि बिजनौर की धरती पर प्रशासनिक आदेशों से आंदोलनों की दिशा तय नहीं होती। किसान नेताओं का सीधा संदेश था—“कलेक्ट्रेट जन-समस्याओं के समाधान की चौखट है, इसे बाउंड्री में कैद नहीं किया जा सकता।”

12 सूत्रीय हुंकार: ₹500 गन्ने के दाम से लेकर 50+ किसानों की जान लेने वाले गुलदार तक

धरना-प्रदर्शन के उपरांत भारतीय किसान संघ (पत्रांक: BKS/41/2026) के जिलाध्यक्ष राज कुमार सिंह एवं जिला मंत्री नरेश कुमार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम 12 सूत्रीय कड़ा मांग पत्र सौंपा गया।

ज्ञापन की 12 प्रमुख मांगें:

  1. सम्मान निधि दोगुनी हो: ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ की राशि ₹6,000 से बढ़ाकर ₹12,000 वार्षिक की जाए।
  2. गन्ना मूल्य ₹500/क्विंटल: कृषि लागत और महंगाई को देखते हुए गन्ने का दाम ₹500 प्रति क्विंटल तय हो और चीनी मिलें चलने से पहले मूल्य घोषित किया जाए।
  3. किसानों को आयुष्मान सुरक्षा: समाज के अन्य वर्गों की भांति सभी किसानों के आयुष्मान कार्ड अनिवार्य रूप से बनाए जाएं।
  4. कोकलपुर कासिम साइफ़न चौड़ीकरण: खादर क्षेत्र को जलभराव की तबाही से बचाने हेतु मध्य गंगा नहर के साइफन को 25 मीटर से बढ़ाकर 125 मीटर किया जाए।
  5. रावली तटबंध भ्रष्टाचार की जांच: इसी वित्तीय वर्ष में निर्मित रावली तटबंध की सतर्कता/वित्तीय अनियमितता विभाग से उच्चस्तरीय जांच हो।
  6. खतौनी त्रुटि निवारण कैंप: राजस्व रिकॉर्ड में अघोषित गलतियों को ठीक करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष कैंप आयोजित हों।
  7. KCC ब्याजमुक्त और GST मुक्ति: कृषि यंत्रों व उपकरणों से GST समाप्त हो तथा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को पूरी तरह ब्याजमुक्त किया जाए।
  8. एकसमान भूमि अधिग्रहण नीति: जिलेभर में भूमि अधिग्रहण की पारदर्शी व एकसमान नीति लागू हो।
  9. अनाज मंडियों का आधुनिकीकरण: जनपद की सभी कृषि मंडियों में आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
  10. नकली खाद-बीज पर सर्जिकल स्ट्राइक: दुकानों पर बिक रहे नकली उर्वरकों और कीटनाशकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
  11. गुलदार के खौफ से मुक्ति: जंगलों में गुलदार (तेंदुए) के हमलों में 50 से अधिक किसानों की दर्दनाक मौत हो चुकी है; प्रशासन इसके लिए स्थायी और ठोस सुरक्षा इंतजाम करे।
  12. बंगाली क्षेत्र की भूमि श्रेणी परिवर्तन: बंगाली क्षेत्र की भूमि को श्रेणी ‘ख’ से तत्काल ‘क’ श्रेणी में दर्ज किया जाए।

धरने में उत्तर प्रदेश संगठन मंत्री शिवकांत, प्रांत अध्यक्ष संजीव, प्रांत संगठन मंत्री सुनील, जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह, जिला मंत्री नरेश कुमार और जिला महिला प्रमुख सीमा त्यागी सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इतिहास की पुनरावृत्ति: जब पूर्व DM अंकित अग्रवाल को भी झुकना पड़ा था

बिजनौर कलेक्ट्रेट का इतिहास गवाह है कि यहाँ प्रशासनिक कड़ाई और किसान संगठनों की लामबंदी का टकराव नया नहीं है। इससे पूर्व तत्कालीन डीएम अंकित अग्रवाल ने भी कलेक्ट्रेट को नो-प्रोटेस्ट ज़ोन बनाने का प्रयास किया था। लेकिन किसान यूनियनों के अभूतपूर्व घेराव और जनआक्रोश के आगे तत्कालीन प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे।

आज के घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिजनौर में किसानों की जमीनी ताकत के आगे प्रशासनिक फरमानों की मियाद बेहद सीमित साबित होती रही है।

TargetTvLive का कड़ा विश्लेषण: डीएम उमेश प्रताप सिंह के सामने धर्मसंकट

भीम आर्मी और ASP के आंदोलनों से निपटने के लिए उठाए गए इस सख्त कदम के 24 घंटे में ही निष्प्रभावी होने से प्रशासनिक साख पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं:

  • क्या प्रशासन कानूनी कार्रवाई करेगा? यदि प्रशासन आदेश उल्लंघन पर एफआईआर या दंडात्मक कार्रवाई करता है, तो किसान संगठनों का आक्रोश और भड़क सकता है।
  • क्या कलेक्ट्रेट फिर बनेगा आंदोलनों का गढ़? यदि प्रशासन चुप्पी साधे रहता है, तो यह आदेश महज कागजी घोड़ा साबित होगा और अन्य संगठन भी कलेक्ट्रेट में डेरा जमाने लगेंगे।

TargetTvLive के लिए बिजनौर से अवनीश त्यागी की विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट।

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