यूपी में लोक संस्कृति की नई लहर: ‘सुर साधना’ से 22 जिलों में गूंजे सुर, 2200+ कलाकारों को मिला मंच
लखनऊ | डिजीटल न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश में लोक संस्कृति को नया जीवन देने के लिए शुरू की गई पहल ‘सुर साधना’ तेजी से लोकप्रिय हो रही है। प्रदेश के 22 जिलों में साप्ताहिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय कलाकारों को मंच दिया जा रहा है। पिछले 156 दिनों में 374 सांस्कृतिक दलों के लगभग 2200 से अधिक कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।
इस पहल से न सिर्फ लोक कलाकारों को पहचान मिल रही है, बल्कि प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर भी नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं।
लोक संस्कृति का भव्य मंच बना ‘सुर साधना’
साप्ताहिक कार्यक्रमों में कलाकार विभिन्न पारंपरिक और सांस्कृतिक विधाओं की प्रस्तुति दे रहे हैं। इनमें शामिल हैं—
- लोकगायन
- भजन-कीर्तन
- लोकनृत्य
- लोकनाट्य
- कठपुतली कला
- जादू प्रदर्शन
- शास्त्रीय गायन और वादन
- किस्सागोई और दास्तानगोई
- काव्य पाठ
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को उत्तर प्रदेश की विविध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक रंगों से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है।
कलाकारों को मिल रहा सम्मानजनक मानदेय
‘सुर साधना’ कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाती है। कलाकारों को उनकी कला के अनुसार मानदेय भी दिया जा रहा है।
निर्धारित मानदेय:
- लोक नृत्य प्रस्तुति – ₹15,000
- लोक भजन / लोक गायन – ₹10,000
- अन्य विधाएं (जादू, कठपुतली, किस्सागोई, काव्य पाठ) – ₹5,000
इससे कलाकारों को आर्थिक सहयोग मिलने के साथ उनकी कला को आगे बढ़ाने का भी अवसर मिल रहा है।
प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर हो रहे आयोजन
‘सुर साधना’ के कार्यक्रम प्रदेश के कई प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं—
- कुसुमवन सरोवर – मथुरा
- झांसी का किला – झांसी
- रामघाट – चित्रकूट
- नया अस्सी घाट – वाराणसी
- त्रिवेणी घाट – प्रयागराज
- जनेश्वर मिश्र पार्क – लखनऊ
- शिल्पग्राम – आगरा
- नैमिषारण्य धाम – सीतापुर
- राम की पैड़ी – अयोध्या
- रामगढ़ताल – गोरखपुर
इसके अलावा विंध्यवासिनी धाम, प्रेम मंदिर वृंदावन, शुक्र तीर्थ मुजफ्फरनगर, देवीपाटन मंदिर बलरामपुर, गढ़मुक्तेश्वर हापुड़ और मां शाकुंभरी देवी मंदिर सहारनपुर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
लोक परंपराओं को नया जीवन: जयवीर सिंह
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश की लोक कला और लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान की मजबूत नींव हैं।
उनके अनुसार—
“‘सुर साधना’ जैसे आयोजन लोक कलाकारों को मंच देने के साथ हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर क्षेत्र के कलाकारों को पहचान मिले और लोक संस्कृति जीवंत बनी रहे।”
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे कलाकार
सरकार ने कलाकारों को जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया है। इच्छुक कलाकार UP संस्कृति ऐप के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।
इस पहल का उद्देश्य है—
- स्थानीय कलाकारों को मंच देना
- सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना
- पारंपरिक लोक कलाओं का संरक्षण
- गांव और शहर के लोगों को लोक संस्कृति से जोड़ना
विश्लेषण: संस्कृति और पर्यटन दोनों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार ‘सुर साधना’ जैसे कार्यक्रम डबल इम्पैक्ट मॉडल पर काम करते हैं।
- लोक कलाकारों को रोजगार और पहचान मिलती है
- पर्यटन स्थलों पर सांस्कृतिक आकर्षण बढ़ता है
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलता है
- नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है
यदि यह पहल इसी तरह जारी रहती है तो उत्तर प्रदेश लोक संस्कृति आधारित सांस्कृतिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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