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साझा समृद्धि या चीन को सीधा जवाब? जानिए नई दिल्ली सेमिनार के 5 सबसे बड़े खुलासे!

Target TV Live – एक्सक्लूसिव डिजिटल रिपोर्ट

नेपाल-भारत संबंधों में नया युग: क्या ड्रैगन के प्रभाव को बेअसर करेगी यह महा-साझेदारी?

नई दिल्ली में RIS सेमिनार का बड़ा संदेश!

कैटेगिरी: अंतरराष्ट्रीय / कूटनीति रिपोर्ट : अवनीश त्यागी | Target TV Live स्थान: नई दिल्ली | तिथि: 20 सितंबर 2026

नेपाल-भारत संबंधों में नया युग: क्या ड्रैगन के प्रभाव को बेअसर करेगी यह महा-साझेदारी?

 Highlights

नई दिल्ली (Target TV Live): तेजी से बदलते वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य, भू-आर्थिक विखंडन और दक्षिण एशियाई कूटनीति के बीच भारत और नेपाल ने अपनी सदियों पुरानी ऐतिहासिक साझेदारी को नए आर्थिक व डिजिटल पंख देने का महा-रोडमैप तैयार किया है। नई दिल्ली में रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (RIS) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार से दोनों देशों के शीर्ष नीति-निर्माताओं और रणनीतिक विशेषज्ञों ने साझा समृद्धि का नया विजन रेखांकित किया है।

नई दिल्ली (Target TV Live/ अवनीश त्यागी): दक्षिण एशिया के कूटनीतिक कैनवास पर भारत और नेपाल के रिश्ते केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक, सामाजिक और गहरे आर्थिक ताने-बाने से बुने हुए हैं। 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘उभरती वैश्विक व्यवस्था में भारत–नेपाल संबंधों की नवीन परिकल्पना’ ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि दोनों देशों को अब पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर एक अत्यधिक महत्वाकांक्षी ‘नेक्स्ट-जनरेशन पार्टनरशिप’ की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाना होगा।

 डॉ. स्वर्णिम वागले का विजन: “पुराने पुलों से नई ऊंचाइयों तक”

सेमिनार में मुख्य वक्तव्य देते हुए नेपाल सरकार के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और नेपाल के पास पहले से मौजूद मजबूत संबंधों के आधार पर अपनी साझेदारी को नए सिरे से आगे बढ़ाने का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सीमा-पार कनेक्टिविटी, अवसंरचना विकास और आर्थिक एकीकरण को गति देकर ही दोनों देश अपनी व्यापक आर्थिक संभावनाओं को धरातल पर उतार सकते हैं।

“भारत और नेपाल के पास ऐतिहासिक नींव पर एक अत्यधिक महत्वाकांक्षी आर्थिक ढांचा खड़ा करने का अनूठा अवसर है। हमें अपने व्यापारिक व आर्थिक अवरोधों को दूर कर साझा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करना होगा।” — डॉ. स्वर्णिम वागले, वित्त मंत्री, नेपाल सरकार

ठप पड़ी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार: भारतीय विदेश मंत्रालय का रुख

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (उत्तर) श्री मुनु महावर ने भारत–नेपाल संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भले ही ऊर्जा व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हाल के वर्षों में ऐतिहासिक प्रगति हुई है, लेकिन अब हमें उन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को तुरंत प्राथमिकता देनी होगी जो दशकों से किसी न किसी कारणवश रुकी या धीमी पड़ी हुई हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के संबंधों की संभावनाएं अत्यंत व्यापक हैं, इसलिए लक्ष्य निर्धारित करने में अधिक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है। वहीं, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो. राम सिंह ने रेखांकित किया कि दोनों देशों के रिश्ते समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और भारत को नेपाल की विकास यात्रा में निरंतर मजबूत संबल प्रदान करते रहना चाहिए।

सहयोग के 5 प्रमुख रणनीतिक स्तंभ

  • १. ऊर्जा एवं पावर ग्रिड का विस्तार: हाइड्रोपावर परियोजनाओं के निर्माण में तेजी लाना, क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइनों को मजबूत करना और नेपाल से क्लीन एनर्जी के निर्यात को सुगम बनाना।
  • २. कनेक्टिविटी व लॉजिस्टिक्स क्रांति: एकीकृत चेक पोस्ट (ICP), भारत-नेपाल रेलवे नेटवर्क, एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी और सीमा पर माल ढुलाई की बाधाओं को खत्म करना।
  • ३. डिजिटल व वित्तीय एकीकरण: UPI और डिजिटल पेमेंट नेटवर्क के जरिए सीमा-पार व्यापार व पर्यटन को त्वरित, सुरक्षित और सहज बनाना।
  • ४. वैल्यू चेन और उत्पादन एकीकरण: दोनों देशों के बीच सीमा-पार उत्पादन श्रृंखलाओं (Cross-border Value Chains) का निर्माण करना और क्षेत्रीय व्यापारिक नीतियों का सरलीकरण।
  • ५. क्षेत्रीय स्थिरता व वैश्विक चुनौतियां: भू-आर्थिक विखंडन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट और खाद्य सुरक्षा जैसी उभरती चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करना।

साझा समृद्धि का दक्षिण एशियाई मॉडल: राजदूत श्याम सरन का विश्लेषण

भारत के पूर्व विदेश सचिव एवं आरआईएस के पूर्व अध्यक्ष राजदूत श्याम सरन ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच की पूरकताएं (Complementarities) इतनी विशिष्ट हैं कि यह द्विपक्षीय मॉडल पूरे दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग का एक अनुकरणीय उदाहरण पेश कर सकता है।

आरआईएस गवर्निंग बोर्ड के सदस्य डॉ. शेषाद्रि चारी ने कहा कि अब केवल सैद्धांतिक चर्चाओं से आगे बढ़कर धरातल पर क्रियान्वित होने वाले व्यावहारिक उपायों पर काम करने का समय आ गया है।

आरआईएस के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा ने अपने स्वागत वक्तव्य में व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल तकनीक में व्याप्त अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि व्यापारिक अवरोधों को कम करने से भौगोलिक निकटता (Proximity) सीधे आर्थिक समृद्धि (Prosperity) में परिवर्तित होगी।

 आगे की राह (Target TV Live की विशेष कूटनीतिक टिप्पणी)

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य भू-आर्थिक विखंडन (Geo-economic fragmentation), बदलती व्यापारिक नीतियों और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे दौर में भारत और नेपाल का एक-दूसरे के साथ पूरी ताकत से खड़े होना दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। नई दिल्ली का यह सेमिनार इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि भारत और नेपाल के रिश्ते अब सिर्फ कूटनीतिक बयानों तक सीमित न रहकर ठोस आर्थिक साझेदारी और साझा समृद्धि के नए युग में प्रवेश कर चुके हैं।

 मीडिया समन्वय: डॉ. संजय सिंह, आरआईएस 

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