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AI के दौर में भारत का बड़ा संदेश! मेरठ के प्रो. विवेक त्यागी ने विश्व मंच पर रखा ‘धर्म आधारित न्याय मॉडल’, बोले- इंसान से बड़ा नहीं हो सकता AI

AI के दौर में भारत का बड़ा संदेश!

मेरठ के प्रो. विवेक त्यागी ने विश्व मंच पर रखा ‘धर्म आधारित न्याय मॉडल’, बोले- इंसान से बड़ा नहीं हो सकता AI

डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने वर्ल्ड कांग्रेस-2026 में धर्म आधारित AI गवर्नेंस मॉडल प्रस्तुत कर न्याय व्यवस्था में मानवीय प्रधानता का वैश्विक संदेश दिया।

मेरठ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत ने दुनिया को न्याय और तकनीक का एक नया दृष्टिकोण दिया है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू), मेरठ के लीगल स्टडीज संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड कांग्रेस-2026 में ‘धर्म आधारित AI गवर्नेंस मॉडल’ प्रस्तुत कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, न्याय का अंतिम आधार हमेशा मानवीय विवेक, संवेदनशीलता और नैतिकता ही रहेगा।

ब्राजील के मिनस गेरैस से आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वर्ल्ड कांग्रेस : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एज अ फैक्टर इन द ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ लॉ-2026’ में डॉ. त्यागी ने “धर्म, जस्टिस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : रीइमेजिनिंग हिंदू लीगल थियोलॉजी फॉर ऑटोमेटेड लीगल सिस्टम्स” विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। इस सम्मेलन में 27 देशों के 120 से अधिक कानूनी विशेषज्ञों और विद्वानों ने भाग लिया।

AI नहीं, इंसान करेगा अंतिम फैसला

अपने संबोधन में डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने कहा कि AI न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल और प्रभावी बना सकता है, लेकिन वह मानवीय संवेदनाओं और नैतिक विवेक का विकल्प नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि न्याय केवल कानून की व्याख्या नहीं, बल्कि मानवीय परिस्थितियों और संवेदनशीलता को समझने की प्रक्रिया भी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि AI का उपयोग न्यायिक शोध, केस मैनेजमेंट, अनुवाद और दस्तावेजों के विश्लेषण जैसे कार्यों तक सीमित और नियंत्रित होना चाहिए। किसी भी स्थिति में AI को अंतिम न्यायिक निर्णय लेने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।

‘धर्म’ को बताया न्याय का आधुनिक नैतिक मॉडल

डॉ. त्यागी ने कहा कि भारतीय न्याय दर्शन में ‘धर्म’ केवल धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि कर्तव्य, निष्पक्षता, नैतिकता और मानवीय गरिमा का व्यापक सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि यदि AI को न्यायिक व्यवस्था में शामिल किया जाना है तो उसे इन्हीं नैतिक मूल्यों के अधीन रहकर कार्य करना होगा।

उनके अनुसार, किसी भी कानून या तकनीक की वास्तविक सफलता उसकी गति या दक्षता से नहीं, बल्कि उसके नैतिक और मानवीय प्रभाव से तय होती है।

सुप्रीम कोर्ट के मसौदा नियमों का किया समर्थन

डॉ. त्यागी ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2026 के लिए प्रस्तावित न्यायिक AI मसौदा नियमों का समर्थन करते हुए कहा कि AI हमेशा मानवीय नियंत्रण के अधीन रहना चाहिए। उन्होंने AI द्वारा स्वतः न्यायिक निर्णय, स्वचालित सजा निर्धारण और एल्गोरिद्मिक जोखिम मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को न्याय व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया।

प्रस्तुत किया पांच सूत्रीय नैतिक ढांचा

भविष्य की कानूनी तकनीकों के लिए डॉ. त्यागी ने पांच प्रमुख सिद्धांत प्रस्तुत किए—

  • मानवीय प्रधानता (Human Primacy)
  • पारदर्शिता (Transparency)
  • निष्पक्षता (Fairness)
  • जवाबदेही (Accountability)
  • नैतिक संयम (Ethical Restraint)

उन्होंने कहा कि जिन मामलों में मानवीय संवेदनशीलता और नैतिक निर्णय महत्वपूर्ण हों, वहां AI के उपयोग पर स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की जानी चाहिए।

विश्व समुदाय को दिया महत्वपूर्ण संदेश

अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा—

“तकनीक को न्याय का स्थान लेने के बजाय न्याय को और अधिक प्रभावी तथा सुलभ बनाने का माध्यम बनना चाहिए। आधुनिक बनने के लिए अपनी दार्शनिक और सांस्कृतिक जड़ों को छोड़ना आवश्यक नहीं है।”

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कानून को केवल तकनीकी समस्या न मानकर उसे मानवीय जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों के साथ देखने का आह्वान किया।

कई देशों के विद्वान रहे उपस्थित

इस अवसर पर पेरू, ब्राजील, रूस, इटली, स्पेन और अर्जेंटीना सहित अनेक देशों के प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञ एवं विद्वान उपस्थित रहे। सम्मेलन में AI और कानून के भविष्य को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

TargetTvLive विश्लेषण

AI आज दुनिया को बदल रहा है, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या मशीनें इंसानों की जगह न्याय कर सकती हैं? डॉ. विवेक कुमार त्यागी का शोध इस प्रश्न का संतुलित और नैतिक उत्तर प्रस्तुत करता है। उनका ‘धर्म आधारित AI गवर्नेंस मॉडल’ बताता है कि तकनीक का उद्देश्य इंसान की सहायता करना है, न कि उसे प्रतिस्थापित करना।

जब दुनिया AI आधारित शासन व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, तब भारत ने अपने प्राचीन न्याय दर्शन को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए एक मानवीय और संवैधानिक मॉडल प्रस्तुत किया है। यह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक न्याय व्यवस्था के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

लेखक : अवनीश त्यागी
Editor & Digital Desk | TargetTvLive

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