आशा संगिनियों का बड़ा फैसला: ₹21,000 मानदेय और राज्य कर्मचारी का दर्जा पाने के लिए लखनऊ कूच की तैयारी

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: अवनीश त्यागी एक्सक्लूसिव कवरेज: TargetTvLive
बिजनौर (TargetTvLive): उत्तर प्रदेश की ध्वस्त होती स्वास्थ्य व्यवस्था को अपने कंधों पर संभालने वाली आशा कार्यकर्ताओं और संगिनियों का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। अल्प मानदेय और अनिश्चित भविष्य से जूझ रही जिले की सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ खुली बगावत का बिगुल फूंक दिया है। ‘आशा हैल्थ वर्कर्स एसोसिएशन’ के बैनर तले बिजनौर से उठी यह विरोध की लहर अब सीधे राजधानी लखनऊ के गलियारों को हिलाने की तैयारी में है।
डीएम दफ्तर पर चेतावनी, 8 अक्टूबर को लखनऊ में ‘महाजुटान’
एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष संगीता चौधरी और जिला महामंत्री रुचि चौहान के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी बिजनौर को ज्ञापन सौंपकर सीधे शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि आगामी 8 अक्टूबर 2026 को प्रदेश भर से हजारों की संख्या में आशा बहनें लखनऊ के ईको गार्डन में एकजुट होकर विशाल एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगी।
क्या हैं वो 2 जलते सवाल, जिन पर अड़ा एसोसिएशन?
स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ कही जाने वाली इन महिला कर्मियों की मुख्य मांगें निम्न प्रकार हैं:
- मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि: आशा कार्यकर्ताओं को कम से कम ₹18,000 प्रति माह और आशा संगिनियों को ₹21,000 प्रति माह का निश्चित मानदेय प्रदान किया जाए।
- राज्य कर्मचारी का दर्जा: वर्षों से शोषित हो रही इन कार्यकर्ताओं को फौरन ‘राज्य कर्मचारी’ घोषित कर सभी सरकारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
“काम का बोझ पहाड़ जैसा, और दाम कौड़ियों में!”
ग्रामीण और शहरी इलाकों में मातृ-शिशु सुरक्षा, पल्स पोलियो, टीकाकरण, और आपदा अभियानों में दिन-रात एक करने वाली कार्यकर्ताओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई में चंद रुपयों के इंसेंटिव पर परिवार चलाना नामुमकिन हो चुका है। बिजनौर जिले के कोने-कोने से आशा बहुएं इस आंदोलन में कूद पड़ी हैं।
ज्ञापन पत्र पर रजनी देवी (जिला उपाध्यक्ष), कविता शर्मा (कोषाध्यक्ष), प्रेमलता, अनिता सहित जिले की सैकड़ों कार्यकर्ताओं और संगिनियों (कुसुम लता चंदक, रीता चौहान, शीतला रानी आदि) के हस्ताक्षरित तेवर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि इस बार आंदोलन केवल सांकेतिक नहीं, बल्कि निर्णायक होगा।
प्रशासन सतर्क, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संगठन की प्रांतीय व जिला स्तरीय पदाधिकारियों का साफ कहना है कि यदि 8 अक्टूबर को सरकार ने उनकी जायज मांगों पर मुहर नहीं लगाई, तो यह एक दिवसीय प्रदर्शन अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और उग्र आंदोलन में बदल जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।












