सस्ता कबाड़, भारी तबाही! बिजनौर में क्यों आसान हो गई है ट्यूबवेल और दुकानों की चोरी? शिवालाकलां कांड का अंदरूनी विश्लेषण
By अवनीश त्यागी | TargetTvLive
हाईलाइट्स (Quick Highlights)
- बड़ी कार्रवाई: थाना शिवालाकलां पुलिस ने ट्यूबवेल और दुकानों में चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर 2 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया।
- बरामदगी: आरोपियों के कब्जे से कॉपर के तार, बिजली के उपकरण और ₹19,000 की नगदी बरामद।
- खुलासा: एसपी देहात गौतम राय ने पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता कर गैंग के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का पर्दाफाश किया।
- गंभीर सवाल: आखिर चोरों के लिए ग्रामीण इलाकों में वारदात को अंजाम देना और कबाड़ियों के जरिए माल खपाना इतना आसान क्यों होता जा रहा है?

चित्र: पुलिस हिरासत में अभियुक्त और बरामदगी की जानकारी देते एसपी देहात
बिजनौर (TargetTvLive न्यूज): पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में किसानों की रातों की नींद उड़ाने वाले ‘केबिल व तांबा चोर गिरोह’ पर बिजनौर पुलिस ने एक बार फिर करारा प्रहार किया है। थाना शिवालाकलां पुलिस ने कई चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।
इस पूरे घटनाक्रम का आधिकारिक खुलासा एसपी देहात गौतम राय ने पुलिस लाइन में एक प्रेस वार्ता के दौरान किया। लेकिन इस गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ते चोरी के इस ट्रेंड के पीछे की असली जड़ क्या है? आइए समझते हैं इस मामले का पूरा विश्लेषणात्मक पहलू।
कैसे काम करता था यह गिरोह? (Modus Operandi)
एसपी देहात गौतम राय के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अमर सिंह (निवासी ग्राम चेहली, थाना चांदपुर) और सलीम (कबाड़ी, निवासी यूसुफ नगर, पीपला जागीर, थाना नूरपुर) के रूप में हुई है।
पुलिस पूछताछ में गिरोह का जो ‘वर्किंग मॉडल’ सामने आया, वह हैरान करने वाला है:
- सूनसान इलाकों की रेकी: गैंग के सदस्य गांवों के बाहरी इलाकों, खेतों में लगे ट्यूबवेलों और अलग-थलग बनी दुकानों को अपना निशाना बनाते थे।
- सबूत मिटाने के लिए आग का सहारा: ट्यूबवेलों से केबिल और स्टार्टर चुराने के बाद वे उन्हें जलाकर तांबा अलग कर लेते थे ताकि पहचान मिटाई जा सके।
- चलते-फिरते कबाड़ियों का नेटवर्क: चोरी का तांबा और बैटरी-इन्वर्टर जैसे उपकरण सीधे चलते-फिरते कबाड़ियों को सस्ते दामों में बेच दिए जाते थे।
क्राइम एनालिसिस: क्यों बढ़ता जा रहा है कॉपर व बैटरी चोरी का धंधा?
TargetTvLive के विश्लेषणात्मक अध्ययन के अनुसार, इस प्रकार के अपराधों के तेजी से बढ़ने के मुख्य तीन कारण हैं:
- 1. आसानी से मिलने वाला ‘कैश’ (Liquid Gold): बाज़ार में कॉपर (तांबे) और पुरानी बैटरियों की मांग हमेशा बनी रहती है। कबाड़ी बिना किसी कागजी कार्रवाई के तुरंत नगदी दे देते हैं, जिससे नशे या अन्य जरूरतों के शिकार अपराधियों को तुरंत पैसा मिल जाता है।
- 2. गांवों में सुरक्षा और गश्त की कमी: खेतों में लगे ट्यूबवेल पर रात के समय सुरक्षा का कोई स्थायी प्रबंध नहीं होता, जिससे चोर आसानी से वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं।
- 3. बिना सत्यापन (Verification) के कबाड़ का कारोबार: ग्रामीण और कस्बे के क्षेत्रों में कबाड़ बेचने और खरीदने वालों का कोई पुलिस सत्यापन नहीं होता। इस नेटवर्क की वजह से चोरों को माल खपाने की बिल्कुल चिंता नहीं रहती।
क्या-क्या हुई बरामदगी?
पुलिस टीम ने आरोपियों की निशानदेही पर निम्नलिखित सामग्री बरामद की है:
- मामला 1 (मु0अ0सं0 134/26): सराय गांव से चोरी किए गए बिजली के तार/केबिल और कॉपर की बिक्री से प्राप्त ₹5,000 नगद।
- मामला 2 (मु0अ0सं0 108/26): अजुपुरा की दुकान से चोरी 02 बैटरे, इन्वर्टर व घरेलू सामान की बिक्री से प्राप्त ₹14,000 नगद।
- कुल बरामदगी: ₹19,000 नगद व तांबे के तार।
बरामदगी के आधार पर पुलिस ने दोनों मुकदमों में बीएनएस (BNS) की धारा 317(2) की बढ़ोत्तरी की है।
सराहनीय भूमिका में शिवालाकलां पुलिस
इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने में थाना शिवालाकलां के थानाध्यक्ष उ०नि० त्रिवेंद्र सिंह, उ०नि० उपेंद्र मलिक, हे०का० राजकुमार नागर, रि०का० कार्तिक और रि०का० विशु गोलियान की मुख्य भूमिका रही। एसपी देहात ने पुलिस टीम के प्रयासों की सराहना की है।
TargetTvLive का सवाल और समाधान
संपादकीय दृष्टिकोण: पुलिस द्वारा चोरों की गिरफ्तारी एक सराहनीय कदम है, लेकिन जब तक स्थानीय कबाड़ियों और गैर-कानूनी कबाड़ दुकानों पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक इस तरह की चोरियों पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा। प्रशासन को चाहिए कि ग्रामीण इलाकों में चलने वाले कबाड़ कारोबारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन (Police Verification) कराया जाए।
ताजा अपडेट्स और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जुड़े रहिए TargetTvLive के साथ। (रिपोर्ट: अवनीश त्यागी, बिजनौर)












