खण्डीय लेखाधिकारी की कार्यशैली पर उठे सवाल, कर्मचारी-ठेकेदार लामबंद; धरने की तैयारी से सिंचाई विभाग में बढ़ी हलचल

TargetTvLive | रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर। अफजलगढ़ सिंचाई खण्ड धामपुर में खण्डीय लेखाधिकारी आकाश पंवार की कार्यशैली को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। भुगतान से जुड़े मामलों और कार्यशैली को लेकर कर्मचारियों तथा ठेकेदारों में नाराजगी की बात सामने आई है। आकाश पंवार की पुनः तैनाती की सूचना के बाद कर्मचारी और ठेकेदार लामबंद होने लगे हैं तथा अधिशासी अभियंता कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन की तैयारी की चर्चा है।
भुगतान के मुद्दे पर बढ़ी नाराजगी
विभागीय कर्मचारियों और ठेकेदारों का आरोप है कि लेखाधिकारी की कार्यशैली के कारण भुगतान संबंधी मामलों में कई बार विवाद की स्थिति बनी। उनका कहना है कि अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के बीच समन्वय के बजाय टकराव की स्थिति पैदा हुई।
ठेकेदारों का दावा है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में भी कुछ भुगतान लंबित रहे। आरोप यह भी है कि मार्च के अंतिम सप्ताह में भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हुई और बाद में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत दूसरे विभाग में तैनात खण्डीय लेखाधिकारी को जिम्मेदारी देकर भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
पूर्व लेखाधिकारी की गिरफ्तारी के बाद हुई थी तैनाती
विभागीय कर्मचारियों और ठेकेदार दीपक सिरोही के अनुसार, आकाश पंवार से पहले खण्डीय लेखाधिकारी रहे उज्जवल कंसल को विजिलेंस टीम ने एक ठेकेदार से कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके निलंबन की कार्रवाई की गई।
इसके बाद महालेखाकार उत्तर प्रदेश, प्रयागराज की ओर से आकाश पंवार की अफजलगढ़ सिंचाई खण्ड धामपुर में खण्डीय लेखाधिकारी के पद पर तैनाती किए जाने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
दोबारा तैनाती ने क्यों बढ़ाया विवाद?
कर्मचारियों और ठेकेदारों का कहना है कि जिस अधिकारी की कार्यशैली को लेकर पहले शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुंचने की बात सामने आई थी, उनकी दोबारा उसी खण्ड में जिम्मेदारी दिए जाने से असंतोष बढ़ गया है।
ठेकेदार यूनियन के करन सिंह बौध ने आरोप लगाया कि विभाग में विवादों से जुड़े मामलों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उनके अनुसार, पुनः तैनाती के बाद कर्मचारियों और ठेकेदारों में रोष है और इसी कारण आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
धरना हुआ तो सामने आएगा बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारियों और ठेकेदारों की नाराजगी महज विरोध तक सीमित रहती है या फिर यह मामला औपचारिक आंदोलन का रूप लेता है। यदि अधिशासी अभियंता कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन होता है तो भुगतान व्यवस्था, लेखा प्रक्रिया और अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर विभागीय जवाबदेही पर भी सवाल उठना तय माना जा रहा है।
मामले की निष्पक्षता के लिए संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और विभागीय आदेशों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान में देरी के पीछे वास्तविक प्रशासनिक कारण क्या रहे और जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।
आरोपों पर अधिकारी का पक्ष अभी सामने नहीं
खण्डीय लेखाधिकारी आकाश पंवार अथवा संबंधित विभागीय उच्चाधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए प्रकाशित आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित अधिकारी या विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
निष्कर्ष
अफजलगढ़ सिंचाई खण्ड में उठे विवाद ने एक बार फिर भुगतान व्यवस्था, विभागीय समन्वय और अधिकारियों की कार्यशैली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें विभागीय उच्चाधिकारियों की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन पर टिकी हैं। यदि शिकायतें तथ्यात्मक हैं तो जांच और पारदर्शी कार्रवाई से स्थिति स्पष्ट हो सकती है; वहीं यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट करना भी उतना ही जरूरी है।
डिस्क्लेमर: समाचार में उल्लेखित आरोप संबंधित कर्मचारियों और ठेकेदारों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी/विभाग का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे शामिल किया जाएगा।












