बिजनौर में खाद कारोबारियों पर प्रशासन का सबसे बड़ा एक्शन! 46 दुकानों पर छापे, 3 लाइसेंस निलंबित, 9 को नोटिस

खरीफ सीजन में किसानों से खिलवाड़ करने वालों पर सख्ती, 19 उर्वरकों के नमूने जांच को भेजे गए; डीएम के निर्देश के बाद जिलेभर में मचा हड़कंप
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। खरीफ सीजन के बीच जब किसान अपनी फसलों के लिए यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर हैं, ऐसे समय में बिजनौर प्रशासन ने उर्वरक कारोबारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए पूरे जिले में एक साथ छापेमारी कर दी। जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने 46 उर्वरक विक्रय केंद्रों और गोदामों पर अचानक दबिश दी। कार्रवाई के दौरान 19 उर्वरकों के नमूने जांच के लिए सील किए गए, 9 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और गंभीर अनियमितताएं मिलने पर 3 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए।
इस कार्रवाई के बाद जिले के उर्वरक कारोबारियों में हड़कंप मच गया। प्रशासन का साफ संदेश है कि किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी।
क्यों पड़ा छापा? किसानों की शिकायतों के बीच प्रशासन की बड़ी पहल
खरीफ सीजन में उर्वरकों की मांग चरम पर रहती है। ऐसे समय में कई स्थानों पर कालाबाजारी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी, स्टॉक छिपाने और अनियमित वितरण की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश और जिलाधिकारी के नेतृत्व में जनपदभर में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया गया।
नगीना, धामपुर, बिजनौर, नजीबाबाद और चांदपुर तहसीलों में गठित संयुक्त टीमों ने एक साथ कार्रवाई कर उर्वरक वितरण व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखी।
कार्रवाई एक नजर में
- 46 उर्वरक विक्रय केंद्रों एवं गोदामों का निरीक्षण
- 19 उर्वरकों के नमूने गुणवत्ता जांच के लिए संग्रहित
- 9 उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस
- 3 उर्वरक लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबि
- किसानों को रसीद देना और पीओएस मशीन से बिक्री अनिवार्य करने के निर्देश
इन विक्रेताओं पर गिरी कार्रवाई की गाज
जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं मिलने पर—
- मै. सिंह फर्टिलाइजर, बिलाई (बिजनौर)
- मै. कृषि केंद्र एग्री जंक्शन वन स्टॉप शॉप, हबीबवाला
- मै. एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर, ताजपुर
के उर्वरक प्राधिकार पत्र (लाइसेंस) निलंबित कर दिए गए।
वहीं दुकान बंद मिलने, अभिलेख अधूरे पाए जाने या अन्य कमियां मिलने पर 9 प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया।
किसानों के लिए प्रशासन का स्पष्ट संदेश
निरीक्षण के दौरान सभी उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि—
- निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर बिक्री नहीं होगी।
- बिना पीओएस मशीन के उर्वरक नहीं बेचे जाएंगे।
- किसानों की जोत और फसल के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
- थोक (बल्क) बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।
- हर किसान को खरीद की रसीद देना अनिवार्य होगा।
राहत की खबर भी आई सामने
व्यापक छापेमारी के दौरान किसी भी केंद्र पर ओवररेटिंग या प्रमुख उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग का मामला सामने नहीं आया। हालांकि अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
TargetTvLive Analysis | कार्रवाई सिर्फ शुरुआत, अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
यह कार्रवाई केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि पूरे जिले के उर्वरक कारोबार के लिए एक कड़ा संदेश है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 19 उर्वरकों के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। यदि इनमें गुणवत्ता में कमी, मिलावट या मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण से लेकर आपराधिक कार्रवाई तक हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन में गुणवत्तापूर्ण उर्वरक की उपलब्धता सीधे उत्पादन और किसानों की आय को प्रभावित करती है। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई किसानों का भरोसा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जिला कृषि अधिकारी ने क्या कहा?
जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने कहा कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनपद में निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी उर्वरक विक्रेता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी
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