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गरीबी, अधूरी पढ़ाई और 300 फिल्मों का सफर… कैसे बनीं हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार मां?

300 फिल्मों की ‘मां’… जिसका असली नाम दुनिया भूल गई, अमिताभ बच्चन को कहती थीं ‘बेटा’

By: ओम प्रकाश चौहान | TargetTvLive

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में जब भी पर्दे पर ममता, त्याग और संस्कारों से भरी मां की बात होती है तो सबसे पहले अभिनेत्री सुलोचना का नाम याद आता है। उन्होंने करीब छह दशक के फिल्मी करियर में लगभग 300 हिंदी और मराठी फिल्मों में अभिनय किया। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती और शशि कपूर जैसे दिग्गज सितारों की मां बनकर उन्होंने करोड़ों दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई।

कम ही लोग जानते हैं कि सुलोचना उनका जन्म का नाम नहीं था। उनका असली नाम रंगू शंकरराव दीवान था। फिल्मी दुनिया में आने के बाद उन्हें नया नाम मिला और वही उनकी स्थायी पहचान बन गया।

संघर्षों से भरा रहा बचपन

30 जुलाई 1928 को कर्नाटक के बेलगावी जिले में जन्मीं रंगू शंकरराव दीवान का बचपन आर्थिक कठिनाइयों में बीता। कम उम्र में माता-पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मौसी ने किया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह केवल चौथी कक्षा तक ही पढ़ सकीं।

फिल्मों के प्रति उनका लगाव बचपन से था। इसी जुनून ने उन्हें कोल्हापुर के फिल्म स्टूडियो तक पहुंचाया, जहां उन्होंने छोटे-छोटे किरदारों से अपने अभिनय की शुरुआत की।

ऐसे मिला ‘सुलोचना’ नाम

अपने शुरुआती दौर में वह रंगू दीवान के नाम से जानी जाती थीं। बाद में प्रसिद्ध फिल्मकार भालजी पेंढारकर ने उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर वर्ष 1949 में मराठी फिल्म ‘सासुरवास’ के दौरान उनका नाम बदलकर सुलोचना रख दिया। यही नाम आगे चलकर भारतीय सिनेमा में अमर हो गया।

पहले बनीं नायिका, फिर बनीं बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय मां

मराठी फिल्मों में सुलोचना ने पहले सफल अभिनेत्री के रूप में पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों का रुख किया। समय के साथ मां की भूमिकाएं उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गईं।

उन्होंने ‘दिल देकर देखो’, ‘बंदिनी’, ‘देवर’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘कटी पतंग’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मजबूर’ और ‘आजाद’ जैसी कई चर्चित फिल्मों में यादगार अभिनय किया।

अमिताभ बच्चन से था खास रिश्ता

सुलोचना ने अमिताभ बच्चन की कई फिल्मों में मां का किरदार निभाया। दोनों के बीच आत्मीय संबंध भी थे। अमिताभ बच्चन के 75वें जन्मदिन पर सुलोचना ने उन्हें अपने हाथ से लिखा एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने उन्हें “बेटा” कहकर संबोधित किया। यह रिश्ता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा।

300 फिल्मों का शानदार सफर

करीब 60 वर्षों के करियर में सुलोचना ने लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया।

– वर्ष 1999 में पद्मश्री
– वर्ष 2004 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
– वर्ष 2009 में महाराष्ट्र भूषण सम्मान

क्यों आज भी याद की जाती हैं सुलोचना?

भारतीय सिनेमा में मां के कई किरदार आए, लेकिन सुलोचना ने इस भूमिका को भावनात्मक ऊंचाई दी। उनकी सहज अभिनय शैली, सादगी और मातृत्व से भरे भाव आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। यही वजह है कि उन्हें हिंदी फिल्मों की सबसे प्रतिष्ठित ‘मां’ माना जाता है।

प्रमुख तथ्य

– असल नाम: रंगू शंकरराव दीवान
– फिल्मी नाम: सुलोचना
– जन्म: 30 जुलाई 1928, बेलगावी (कर्नाटक)
– फिल्में: लगभग 300
– पहचान: हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय मां
– सम्मान: पद्मश्री, फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट, महाराष्ट्र भूषण

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