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दिशा समिति में अफसरों की खुली जवाबदेही: बाढ़, सड़क, बिजली, स्कूल और योजनाओं पर जनप्रतिनिधियों ने कसे पेंच

दिशा समिति में अफसरों की खुली जवाबदेही: बाढ़, सड़क, बिजली, स्कूल और योजनाओं पर जनप्रतिनिधियों ने कसे पेंच

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर, 18 अगस्त। सरकारी योजनाओं के आंकड़े विकास की तस्वीर जरूर दिखाते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इन आंकड़ों का असर गांव, खेत, स्कूल और आम आदमी की जिंदगी में कितना दिखाई दे रहा है? मंगलवार को विकास भवन सभागार में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमती नजर आई। सांसद नगीना एडवोकेट चंद्रशेखर की अध्यक्षता और सांसद बिजनौर चंदन चौहान की सह-अध्यक्षता में हुई बैठक में जनप्रतिनिधियों ने योजनाओं की प्रगति परखी और अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण मामलों में समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।

बैठक में चांदपुर विधायक स्वामी ओमवेश, जिलाधिकारी जसजीत कौर, मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

दिशा बैठक में साफ संदेश—‘फाइल नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए विकास’

सांसद नगीना चंद्रशेखर ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र और वंचित लोगों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई पात्र व्यक्ति सरकारी योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।

गांवों में शौचालय निर्माण की स्थिति की समीक्षा कर उन्होंने अगले 15 दिनों में पात्र एवं वंचित लोगों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। यह समयसीमा बताती है कि अब केवल योजना की प्रगति रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि लाभार्थी तक पहुंच का परिणाम भी महत्वपूर्ण होगा।

नगर निकायों में सफाई कर्मचारियों के वेतन में एकरूपता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

किरतपुर मार्ग पर प्रक्रिया पूरी, अब सड़क पर काम शुरू होने का इंतजार

दिशा समिति में लंबे समय से महत्वपूर्ण माने जा रहे किरतपुर मार्ग का मुद्दा भी उठा। एनएचएआई अधिकारियों से निर्माण की स्थिति पूछी गई तो बताया गया कि संबंधित प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और अगले माह से निर्माण शुरू होने की संभावना है।

अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह ‘संभावना’ कब वास्तविक निर्माण में बदलती है और परियोजना की गति क्या रहती है।

घर के ऊपर 11 हजार वोल्ट की लाइनें—सुरक्षा पर बड़ा सवाल

विद्युत विभाग को ढीले तार तत्काल दुरुस्त कराने और घरों के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइनों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

यह सिर्फ विद्युत व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सीधे नागरिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में निरीक्षण और रिपोर्ट से आगे बढ़कर स्थायी समाधान जरूरी है।

बाढ़ की आशंका के बीच किसानों पर नजर, नुकसान का होगा आकलन

बिजनौर और चांदपुर क्षेत्र में बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए सांसद चंदन चौहान ने किसानों के हित से जुड़ा अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने संभावित बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए।

किसानों के लिए अब चुनौती केवल नुकसान से बचाव की नहीं, बल्कि नुकसान होने की स्थिति में सही और पारदर्शी आकलन की भी है। सर्वे में देरी या वास्तविक नुकसान दर्ज न होने से राहत प्रभावित हो सकती है।

स्कूलों की सुविधाओं से लेकर मध्यान्ह भोजन तक निगरानी

बेसिक शिक्षा विभाग को परिषदीय विद्यालयों में भवन, साफ-सफाई, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं बेहतर रखने के निर्देश दिए गए।

सांसद चंदन चौहान ने विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता की अधिकारियों द्वारा समय-समय पर स्वयं जांच कराने को कहा।

यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विद्यालयों की गुणवत्ता केवल पढ़ाई से नहीं, बल्कि बच्चों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और पोषण से भी तय होती है।

500 तालाबों का लक्ष्य, आधे पर काम शुरू

जिलाधिकारी जसजीत कौर ने बैठक में योजनाओं की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जीराम जी योजना के तहत जिले में 500 तालाबों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से 250 तालाबों पर काम शुरू हो चुका है।

संबंधित अधिकारियों को दिसंबर तक कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। तालाबों की संख्या के साथ उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि जल संरक्षण की ये परियोजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में भविष्य की जल जरूरतों से जुड़ी हैं।

महिला सशक्तीकरण का बड़ा लक्ष्य, अभी हजारों कदम बाकी

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1,39,348 महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य है। अब तक 28,824 महिलाओं को समूहों से जोड़ा जा चुका है।

महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए अलग रोजगार मेले के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि समूहों की संख्या बढ़ाना पहला चरण है; असली सफलता तब मानी जाएगी जब इन समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण, बाजार और नियमित आय के अवसर भी मिलें।

जनधन के करीब 20 लाख खाते—अब वित्तीय सक्रियता की चुनौती

जिले में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत अब तक 19,72,098 खाते खोले जाने की जानकारी दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक 50,798 नए खाते खोले गए।

अटल पेंशन योजना के 26,165 लाभार्थी और सुकन्या समृद्धि योजना के 1,28,009 लाभार्थी भी बैठक के आंकड़ों में सामने आए।

इन आंकड़ों से योजनाओं की पहुंच का पता चलता है, लेकिन अगली चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि बैंक खाते और योजनाएं केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि परिवारों की आर्थिक सुरक्षा में भी बदलें।

चार दिव्यांग युवकों की सरकारी नौकरी बनी सकारात्मक मिसाल

बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ पाने वाले चार युवकों का सरकारी नौकरी में चयन हुआ है। इन युवकों को सम्मानित किया जाएगा।

यह पहल सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के उस सकारात्मक पक्ष को सामने लाती है, जहां सहायता किसी व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का आधार देती है।

चांदपुर-बास्टा मार्ग पर भी अधिकारियों को तेजी के निर्देश

चांदपुर विधायक स्वामी ओमवेश ने चांदपुर-बास्टा मार्ग के निर्माण की स्थिति पर जानकारी ली और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को कार्य शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए।

सड़क निर्माण में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल समयसीमा और गुणवत्ता का है। जनता को निर्माण की घोषणा नहीं, बल्कि बेहतर सड़क चाहिए।

गुलदार हमले और किसानों के पट्टे भी समीक्षा के केंद्र में

सांसद चंद्रशेखर ने वन विभाग से गुलदार के हमलों में हुई मौतों और घायलों की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही पिछले पांच वर्षों में किसानों को दिए गए पट्टों की सूची उपलब्ध कराने को कहा।

इससे स्पष्ट है कि दिशा समिति की समीक्षा केवल योजनाओं की प्रगति तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण सुरक्षा और किसानों से जुड़े प्रशासनिक मामलों को भी बैठक में प्रमुखता मिली।

दिशा बैठक का असली इम्तिहान अब शुरू

बैठक में सामने आए आंकड़े जिले में विकास योजनाओं की व्यापक तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन बैठक से निकलने वाला सबसे बड़ा संदेश यही है कि सरकारी योजनाओं की सफलता का पैमाना अब फाइलों में दर्ज प्रगति नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला परिणाम होना चाहिए।

15 दिन में पात्र वंचित लोगों को योजना का लाभ, बाढ़ प्रभावित किसानों के नुकसान का आकलन, जोखिम वाली विद्युत लाइनों पर कार्रवाई, स्कूलों में सुविधाओं की स्थिति, सड़कों के निर्माण और तालाबों की परियोजनाओं की प्रगति—इन सभी मोर्चों पर अब प्रशासन की अगली परीक्षा होगी।

सबसे बड़ा सवाल यही: अगली समीक्षा में कितने निर्देश होंगे पूरे?

दिशा समिति का उद्देश्य सिर्फ योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की निगरानी और प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। मंगलवार की बैठक में निर्देशों की लंबी सूची सामने आई है। अब जनता की निगाह इस बात पर होगी कि इन निर्देशों में से कितने कागज से निकलकर वास्तव में गांव, खेत, स्कूल और सड़क तक पहुंचते हैं।

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