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 “810 सफाईकर्मी, 367 अतिरिक्त तैनात… फिर कांवड़ व्यवस्था के सरकारी दावों पर पैजनियां ने उठाए सवाल

सरकारी आंकड़ों में 97 शौचालय, पैजनियां के कांवड़ शिविर में सुविधा का अभाव; शहीद स्मारक की गरिमा पर भी सवाल

बिजनौर | अवनीश त्यागी | TargetTvLive

श्रावण कांवड़ यात्रा-2026 को लेकर बिजनौर में पंचायती राज विभाग ने स्वच्छता और जनसुविधाओं के पुख्ता इंतजाम के दावे किए हैं। विभाग के मुताबिक कांवड़ मार्गों पर सैकड़ों सफाईकर्मियों की तैनाती, ई-रिक्शा, कूड़ेदान, हैंडपंप और शौचालयों की व्यवस्था की गई है। लेकिन ग्राम पंचायत पैजनियां की जमीनी तस्वीर इन दावों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।

यहां कांवड़ियों की सुविधा के लिए बनाए गए एकमात्र प्रमुख शिविर के आसपास अस्थायी शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से समस्या पैदा हो गई है। वहीं गांव में पहले से मौजूद सुलभ शौचालय के पास ही एक अस्थायी शौचालय खड़ा कर दिया गया है। सवाल यह है कि जब अस्थायी शौचालय की जरूरत कांवड़ शिविर के पास थी, तो उसे ऐसी जगह क्यों लगाया गया जहां उसकी उपयोगिता सीमित दिखाई दे रही है?

शिविर के पास शौचालय नहीं, शहीद स्मारक बना मजबूरी का ठिकाना

पैजनियां में कांवड़ियों के लिए बनाए गए एकमात्र शिविर के आसपास अस्थायी शौचालय की व्यवस्था नहीं होने का असर अब दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, शौचालय की पर्याप्त सुविधा नहीं मिलने के कारण कांवड़ियों ने शिविर के पास स्थित शहीद स्मारक के आसपास के खाली स्थान को शौच के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

इस स्थिति ने केवल स्वच्छता व्यवस्था पर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि शहीद स्मारक जैसे संवेदनशील और सम्मानित स्थल की पवित्रता को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

शहीद स्मारक के आसपास दुर्गंध, स्थानीय लोग परेशान

स्थानीय आवासों के आसपास भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। शहीद स्मारक के आसपास खुले में शौच किए जाने से दुर्गंध फैलने की शिकायत सामने आ रही है। आसपास रहने वाले लोगों को लगातार दुर्गंध के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

एक तरफ प्रशासन कांवड़ यात्रा को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक इंतजामों का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ गांव में शिविर के पास शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव सवाल खड़ा करता है कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है।

एक शौचालय के पास दूसरा अस्थायी शौचालय, जरूरत वाली जगह खाली

पैजनियां की स्थिति का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहां शौचालय की वास्तविक जरूरत है, वहां व्यवस्था नजर नहीं आती और जहां पहले से सुलभ शौचालय मौजूद है, उसके पास ही अस्थायी शौचालय खड़ा कर दिया गया है।

यदि कांवड़ शिविर को केंद्र मानकर व्यवस्थाओं की योजना बनाई जाती तो अस्थायी शौचालयों को शिविर के नजदीक स्थापित किया जा सकता था। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती और शहीद स्मारक के आसपास खुले में शौच की स्थिति भी पैदा नहीं होती।

कागज पर आंकड़े बड़े, जमीन पर सवाल छोटे नहीं

पंचायती राज विभाग ने 810 सफाईकर्मियों, 367 अतिरिक्त सफाईकर्मियों, 166 ई-रिक्शा, 195 बड़े कूड़ेदानों, 465 हैंडपंपों और 97 शौचालयों की व्यवस्था का दावा किया है। आंकड़े निश्चित रूप से बड़े हैं, लेकिन पैजनियां की स्थिति यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि इन व्यवस्थाओं का लाभ जरूरत वाली जगह तक वास्तव में पहुंच रहा है या नहीं।

कांवड़ यात्रा जैसी बड़ी धार्मिक यात्रा में सिर्फ संसाधनों की संख्या बताना पर्याप्त नहीं है। असली कसौटी यह है कि कांवड़ियों को मौके पर सुविधा मिल रही है या नहीं और स्थानीय नागरिकों को उसके कारण परेशानी तो नहीं उठानी पड़ रही।

प्रशासन के दावों की असली परीक्षा अब मौके पर

पैजनियां की तस्वीर प्रशासन के लिए एक स्थानीय लेकिन महत्वपूर्ण चेतावनी की तरह देखी जा सकती है। यदि किसी गांव में कांवड़ शिविर के पास ही अस्थायी शौचालय की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है, तो संबंधित अधिकारियों की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण कर कांवड़ शिविर के पास तत्काल अस्थायी शौचालय की व्यवस्था कराएं, शहीद स्मारक के आसपास सफाई एवं सैनिटाइजेशन कराएं और खुले में शौच की स्थिति को रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम करें।

कांवड़ यात्रा श्रद्धा और आस्था का पर्व है। ऐसे में श्रद्धालुओं को सुविधाएं देना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी शहीदों की स्मृति से जुड़े स्थलों की गरिमा और स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य व सम्मान की रक्षा करना भी है।

TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की रिपोर्ट।

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