क्षेत्र पंचायतों पर अब कसेगा शिकंजा, विकास निधि के खर्च की होगी कड़ी निगरानी
बिजनौर में जिलाधिकारी के सख्त निर्देश: बीडीओ-एडीओ पंचायत संभालेंगे निगरानी, जिला पंचायत राज अधिकारी करेंगे निरीक्षण
रिपोर्ट। अवनीश त्यागी। TargetTvLive
बिजनौर। क्षेत्र पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों और पंचायती राज विभाग की योजनाओं को लेकर अब निगरानी और सख्त होगी। शासन के निर्देशों के बाद जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जिले के सभी संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र पंचायतों के कामकाज और विकास योजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
पैसा मिला है तो काम भी दिखना चाहिए
शासन के 29 जुलाई 2026 के आदेश के बाद जारी जिलाधिकारी के पत्र में साफ किया गया है कि क्षेत्र पंचायतों को मिलने वाली विकास योजनाओं की धनराशि का नियमानुसार इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।
खास तौर पर केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग से क्षेत्र पंचायतों को मिलने वाली धनराशि के उपयोग पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। शासन के पत्र में कहा गया है कि आवंटित धनराशि का नियमानुसार पूरा उपयोग नहीं हो रहा है, इसलिए योजनाओं की प्रभावी निगरानी जरूरी है।
अब किसकी क्या जिम्मेदारी?
नई व्यवस्था में जिम्मेदारियां भी साफ कर दी गई हैं।
खंड विकास अधिकारी/मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नियंत्रण में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) क्षेत्र पंचायत के नियामक कार्यों को देखेंगे। इसके साथ ही पंचायती राज विभाग से वित्त पोषित योजनाओं के काम और उनकी प्रगति पर नजर रखेंगे।
वहीं जिला पंचायत राज अधिकारी क्षेत्र पंचायतों से जुड़े नियामक कार्यों और वित्त पोषित योजनाओं का अनुश्रवण एवं निरीक्षण करेंगे।
निरीक्षण हुआ तो रिकॉर्ड भी दिखाना होगा
व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अभिलेखों की जांच भी है। क्षेत्र पंचायत कार्यालय के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने होंगे।
इसका मतलब साफ है कि अब केवल योजना पूरी होने की रिपोर्ट देना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित अधिकारियों को योजनाओं और कार्यों से जुड़े अभिलेख भी व्यवस्थित रखने होंगे, ताकि निरीक्षण के समय उनकी जांच की जा सके।
शासन ने क्यों बढ़ाई निगरानी?
शासन के पत्र में पहले जारी आदेशों के प्रभावी अनुपालन को लेकर चिंता जताई गई है। पत्र के अनुसार क्षेत्र पंचायतों को केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग के तहत मिली धनराशि का नियमानुसार खर्च नहीं किया जा रहा है।
यही वजह है कि अब शासन ने क्षेत्र पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक निगरानी की जिम्मेदारी को स्पष्ट किया है।
बिजनौर में अब होगी दो स्तर पर निगरानी
एक तरफ विकास खंड स्तर पर बीडीओ और एडीओ पंचायत योजनाओं की निगरानी करेंगे, वहीं दूसरी तरफ जिला पंचायत राज अधिकारी निरीक्षण और अनुश्रवण करेंगे।
यानी क्षेत्र पंचायतों में विकास कार्यों की प्रगति और योजनाओं में खर्च होने वाली धनराशि को लेकर निगरानी का दायरा बढ़ाया गया है।
जिलाधिकारी ने दिए कड़ाई से पालन के निर्देश
बिजनौर जिलाधिकारी जसजीत कौर ने संबंधित अधिकारियों को शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही क्षेत्र पंचायतों के नियामक कार्यों और पंचायती राज विभाग की वित्त पोषित योजनाओं का लगातार अनुश्रवण और निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या असर पड़ेगा?
इस आदेश का सबसे बड़ा असर क्षेत्र पंचायतों के विकास कार्यों की निगरानी पर पड़ सकता है। जिम्मेदारी तय होने से अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति और धनराशि के उपयोग का रिकॉर्ड दुरुस्त रखना होगा।
अगर यह निगरानी जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती है तो विकास योजनाओं की गति और वित्तीय अनुशासन दोनों को मजबूती मिल सकती है। फिलहाल आदेश का फोकस धनराशि के नियमानुसार उपयोग, योजनाओं की निगरानी और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर है।
एक नजर में बड़ा फैसला
- क्षेत्र पंचायतों के नियामक कार्यों की नियमित निगरानी होगी।
- बीडीओ/मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नियंत्रण में एडीओ पंचायत काम करेंगे।
- पंचायती राज विभाग की वित्त पोषित योजनाओं का निरीक्षण होगा।
- जिला पंचायत राज अधिकारी को अनुश्रवण और निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है।
- निरीक्षण के दौरान संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने होंगे।
- केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग की धनराशि के उपयोग पर विशेष नजर रहेगी।
- जिलाधिकारी ने शासनादेश का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।












