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बिजनौर में भाकियू का बड़ा एक्शन: जिला उपाध्यक्ष पदमुक्त, दो पदाधिकारी निष्कासित; समानांतर संगठन के आरोप

बिजनौर में भाकियू का बड़ा संगठनात्मक एक्शन: जिला उपाध्यक्ष पदमुक्त, दो पदाधिकारी निष्कासित; समानांतर संगठन बनाने के आरोप पर कड़ा फैसला

 

बिजनौर। अवनीश त्यागी | TargetTvLive

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) बिजनौर की जिला कार्यकारिणी की आकस्मिक बैठक में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। ग्राम नांगल जट में जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान के आवास पर हुई बैठक में कुछ पदाधिकारियों पर लगातार संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने, मुख्य संगठन के समानांतर संगठन खड़ा करने का प्रयास करने और अधिकृत पदाधिकारियों के समानांतर नियम विरुद्ध नियुक्तियां करने के आरोप लगाए गए।

बैठक में मौजूद कार्यकारिणी सदस्यों ने इन गतिविधियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। चर्चा के बाद सर्वसम्मति से जिला उपाध्यक्ष चौधरी लुधियान सिंह को पद से मुक्त करने तथा मुनेन्द्र सिंह काकरान और हेमेन्द्र कुमार उर्फ फौजी को संगठन से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया।

समानांतर संगठन बनाने के प्रयास का आरोप

बैठक में आरोप लगाया गया कि संगठन के कुछ पदाधिकारी भारतीय किसान यूनियन की जनपद बिजनौर की मुख्य संगठनात्मक व्यवस्था के समानांतर अलग संगठन खड़ा करने का प्रयास कर रहे थे। इसके अलावा जिलाध्यक्ष द्वारा नियुक्त ब्लॉक अध्यक्षों के समानांतर कथित रूप से अलग पदाधिकारी घोषित कर उनकी सभाएं कराने की बात भी बैठक में उठाई गई।

कार्यकारिणी सदस्यों का आरोप था कि इन सभाओं में जिलाध्यक्ष और संगठन के शीर्ष नेतृत्व के प्रति अशोभनीय टिप्पणियां की गईं और कराई गईं। इसे संगठन के अनुशासन और निर्धारित व्यवस्था के विपरीत बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई।

11 मई के पत्र का भी बैठक में हुआ उल्लेख

सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश महासचिव चौधरी कुलदीप सिंह ने कहा कि संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए विगत 11 मई को भाकियू मुख्यालय सिसौली से भी पत्र जारी किया गया था। इसके बावजूद कुछ पदाधिकारियों द्वारा बार-बार संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर अनुशासन भंग करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई पदाधिकारी संगठन की निर्धारित व्यवस्था के समानांतर संगठन खड़ा करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो जाती है।

लुधियान सिंह को पद से हटाया, संगठन से नहीं

बैठक के फैसले को लेकर जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चौधरी लुधियान सिंह पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं। उन्हें केवल जिला उपाध्यक्ष के पद से मुक्त किया गया है, जबकि संगठन में एक बुजुर्ग और वरिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में उनके बने रहने की बात कही गई।

वहीं जिलाध्यक्ष के अनुसार मुनेन्द्र सिंह काकरान और हेमेन्द्र कुमार उर्फ फौजी को संगठन से पूर्ण रूप से निष्कासित किया गया है।

अब आगे क्या?

भाकियू की जिला कार्यकारिणी के इस फैसले से संगठन के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है। खास तौर पर समानांतर पदाधिकारियों की नियुक्ति और अलग सभाएं आयोजित किए जाने के आरोपों को संगठन ने गंभीर अनुशासनहीनता माना है।

हालांकि, जिन पदाधिकारियों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष इस बैठक की उपलब्ध सामग्री में सामने नहीं आया है। इसलिए विवाद के पूरे पक्ष को समझने के लिए संबंधित पदाधिकारियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब किसान संगठनों के लिए जमीनी स्तर पर एकजुटता और संगठनात्मक अनुशासन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि निष्कासन और पदमुक्ति के बाद संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान समाप्त होती है या विवाद और आगे बढ़ता है।

बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद

बैठक में प्रदेश महासचिव चौधरी कुलदीप सिंह, महेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह प्रधान, सोमपाल सिंह, रोहित राणा, धर्मवीर सिंह, विनित, दिनेश कुमार, अमित मान, नरदेव सिंह, चरन सिंह, जसवंत सिंह, हुकम सिंह, बृजवीर सिंह नीटू चौधरी, मौ. याकूब, रविशेखर तोमर, मास्टर देवेंद्र सिंह, शीशपाल सिंह, मौ. नासिर, अशोक कुमार, राजपाल सिंह, अनिल चौहान, सचिन चौधरी, राजवीर सिंह, सुनील कुमार, अनिल कुमार सहित अन्य कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
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