‘विदेशी छोड़ो, स्वदेशी जोड़ो’ की नई हुंकार! बिजनौर से उठी डिजिटल क्रांति, हजारों युवाओं ने लिया आत्मनिर्भर भारत का संकल्प

‘मैं भी स्वदेशी: समर्थक’ अभियान का भव्य आगाज़, विवेक आयुर्वेदिक कॉलेज में गूंजी स्वदेशी की आवाज़, 20 अगस्त तक देशभर में चलेगा महाअभियान
विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
Highlights
- विवेक आयुर्वेदिक कॉलेज, बिजनौर से राष्ट्रव्यापी डिजिटल अभियान का शुभारम्भ।
- 1 से 20 अगस्त तक पूरे देश में चलेगा “मैं भी स्वदेशी: समर्थक” अभियान।
- विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्वदेशी अपनाने की सामूहिक शपथ ली।
- डिजिटल संकल्प के माध्यम से लोगों को अभियान से जोड़ने का आह्वान।
- स्वदेशी एवं विदेशी कंपनियों की जानकारी देकर उपभोक्ता जागरूकता पर जोर।
बिजनौर, 1 अगस्त। बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के बीच भारत में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में शनिवार को बिजनौर से एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रव्यापी “मैं भी स्वदेशी: समर्थक” डिजिटल अभियान का शुभारम्भ विवेक आयुर्वेदिक कॉलेज में उत्साह, जोश और राष्ट्रभक्ति के वातावरण के बीच हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने न केवल स्वदेशी अपनाने का संकल्प लिया, बल्कि डिजिटल माध्यम से इस अभियान का हिस्सा बनकर इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान भी किया।
यह अभियान केवल उत्पाद खरीदने की अपील नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा देने और आर्थिक आत्मनिर्भरता को जन-आंदोलन में बदलने की एक संगठित पहल के रूप में देखा जा रहा है।
‘स्वदेशी ही भारत की असली ताकत’—प्रशांत महर्षि
कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत संयोजक प्रशांत महर्षि, जिला संयोजक अजय वत्स तथा विवेक आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. देवाशीष पाणिग्रही ने संयुक्त रूप से किया।
प्रशांत महर्षि ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब देश का प्रत्येक नागरिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाएगा, तभी भारत आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनेगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि ‘स्वदेशी के ब्रांड एम्बेसडर’ बनें।
20 अगस्त तक चलेगा राष्ट्रीय डिजिटल जनजागरण अभियान
जिला संयोजक अजय वत्स ने बताया कि 1 अगस्त से 20 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को स्वदेशी से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का एक छोटा-सा डिजिटल संकल्प भी देश के लाखों छोटे उद्योगों, कारीगरों और उद्यमियों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।
उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से अपील की कि वे अपने परिवार, मित्रों और सामाजिक दायरे में भी स्वदेशी अपनाने का संदेश पहुंचाएं।
‘आयुर्वेद स्वयं स्वदेशी का जीवंत स्वरूप’
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. देवाशीष पाणिग्रही ने कहा कि आयुर्वेद भारत की हजारों वर्षों पुरानी स्वदेशी चिकित्सा परंपरा है। इसलिए स्वदेशी को अपनाना केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और विरासत का सम्मान भी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का छोटा-सा प्रयास भी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
जब पूरा सभागार गूंज उठा—’मैं भी स्वदेशी समर्थक’
कार्यक्रम का सबसे प्रेरक क्षण वह रहा जब छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अतिथियों ने एक स्वर में स्वदेशी अपनाने, भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की सामूहिक शपथ ली।
इसके बाद सभी प्रतिभागियों ने अभियान के डिजिटल लिंक पर ऑनलाइन संकल्प दर्ज कर अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का वादा किया। कार्यक्रम में स्वदेशी और विदेशी कंपनियों की सूची भी वितरित की गई, ताकि उपभोक्ता जागरूक होकर खरीदारी का निर्णय ले सकें।
इनकी रही अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में सह जिला संयोजक सतीश त्यागी, जिला संपर्क प्रमुख कौशल किशोर शर्मा, प्रो. शंभु सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
TargetTvLive विश्लेषण: क्या स्वदेशी फिर बन सकता है जनआंदोलन?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में स्थानीय उद्योगों को मजबूती देने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। ऐसे में “मैं भी स्वदेशी: समर्थक” जैसा डिजिटल अभियान युवाओं को सीधे जोड़ने की क्षमता रखता है। यदि बड़ी संख्या में लोग स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, तो इसका सीधा लाभ देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों, स्थानीय व्यापारियों, कारीगरों और रोजगार सृजन को मिल सकता है।
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