EXCLUSIVE Report by Avnish Tyagi / Bijnor Breaking
जिला अस्पताल में चूहे ने खाया तीमारदारों का खाना!
DM जसजीत कौर भड़कीं — सफाई व्यवस्था पर बड़ी कार्रवाई के संकेत
स्वास्थ्य प्रणाली पर गंभीर सवाल — मरीज और तीमारदार असुरक्षित, प्रशासन सख्त
बिजनौर, 03 दिसंबर 2025 — जिला अस्पताल में सफाई व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सोशल मीडिया और स्थानीय अखबारों में वायरल हुई खबर के अनुसार, जिला चिकित्सालय में मरीजों के तीमारदारों का खाना चूहों द्वारा खा लिया गया। इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों में असुरक्षा की भावना भी गहरा दी है।
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए साफ कहा कि यह स्थिति “किसी भी स्तर पर संतोषजनक नहीं” है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या, पुरुष एवं महिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
घटना कैसे उजागर हुई?
2 दिसंबर को सोशल मीडिया और कई स्थानीय समाचार पत्रों में जिला अस्पताल के एक वार्ड क्षेत्र में चूहों द्वारा तीमारदारों का रखा हुआ खाना कुतर दिए जाने की खबर सामने आई। तस्वीरों और वीडियो के वायरल होने के बाद जनता में साफ सवाल उठने लगे—
“अस्पताल में यदि मरीजों का खाना सुरक्षित नहीं तो इलाज कैसे सुरक्षित होगा?”
DM ने क्या कहा? — ‘ये सीधे-सीधे सफाई व्यवस्था की नाकामी है’
DM ने संबंधित सभी वरिष्ठ अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह घटना संकेत देती है कि अस्पताल में समुचित सफाई व्यवस्था नहीं है। इससे न केवल मरीजों में असुरक्षा बढ़ती है बल्कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की छवि भी धूमिल होती है।
उन्होंने मुख्य चिकित्साधीक्षक को कड़े शब्दों में निर्देश दिए—
DM के प्रमुख निर्देश:
- अस्पताल में तत्काल और पर्याप्त सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
- चूहों की आवाजाही रोकने के लिए रैट-कंट्रोल और मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए
- घटना में शामिल कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित कर कठोर कार्रवाई की जाए
- भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न होने पाए, अन्यथा कड़ी दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी
यह सिर्फ सफाई का मुद्दा नहीं — सिस्टम की विफलता भी उजागर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अपग्रेड करने पर जोर दे रही है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट तस्वीर पेश करती दिखाई दे रही है।
घटना से जुड़े बड़े सवाल:
- अस्पताल में चूहों की मौजूदगी क्या नियमित निरीक्षण में छूट रही है?
- सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती?
- अस्पताल में rodent-control सिस्टम कितना प्रभावी है?
- मरीजों की सुरक्षा और भोजन व्यवस्था पर आखिर कौन निगरानी रखता है?
जनता का गुस्सा — “अगर खाना सुरक्षित नहीं, मरीज कैसे सुरक्षित?”
अस्पताल आने वाले तीमारदारों का कहना है कि पहले भी कई बार चूहों, कुत्तों और आवारा जानवरों के अस्पताल परिसर में देखे जाने की शिकायतें उठी हैं, लेकिन अब तक सुधार नहीं दिखा।
प्रशासन अब सख्त, सुधार की उम्मीद?
DM के निर्देशों के बाद अब अस्पताल प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।
संकेत साफ हैं—
अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कर्मचारियों पर कार्रवाई से लेकर व्यवस्थागत सुधार तक, आगामी दिनों में बड़े बदलाव संभव हैं।
एक घटना ने खोली व्यवस्था की परतें
चूहों द्वारा खाना खाए जाने की यह घटना छोटी दिख सकती है, लेकिन इसका प्रभाव बड़ा है।
यह स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को सामने लाती है और प्रशासन को सक्रिय करती है।
अगर इस घटना के बाद अस्पताल में ठोस सुधार होते हैं, तो यह पूरे जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ा सकारात्मक कदम होगा।











