करोड़ों का राजस्व देने वाली तहसील की बदहाल तस्वीर, जनता बोली- अब बहुत हुआ

अमरोहा/मंडी धनौरा, 16 जून। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले की सबसे अधिक राजस्व देने वाली तहसील मंडी धनौरा इन दिनों एक गंभीर बुनियादी समस्या से जूझ रही है। नगर का प्रमुख कलाली रोड क्षेत्र जलनिकासी व्यवस्था की बदहाली, नालों पर अतिक्रमण और बंद पड़ी पुलियाओं के कारण जलभराव के स्थायी संकट में फंस गया है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि हल्की बारिश भी पूरे इलाके को तालाब में तब्दील कर देती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और कुछ प्रभावशाली लोगों की मनमानी के कारण यह समस्या वर्षों से नासूर बनी हुई है।
हाल ही में हुई प्री-मानसून बारिश और तेज आंधी ने नगर की सफाई व्यवस्था और जलनिकासी तंत्र की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी। सड़कों पर बहते गंदे पानी, उफनते नालों और जगह-जगह जमा कूड़े के ढेरों ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कागजों और फोटो सेशन में सफाई अभियान जरूर दिखाई देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।
नाले बंद, पुलियाएं पटीं, पानी का रास्ता हुआ खत्म
क्षेत्रवासियों के अनुसार कलाली रोड से जुड़े मुख्य नालों की नियमित सफाई नहीं कराई गई। कई स्थानों पर नालों के ऊपर स्थायी अतिक्रमण कर दिए गए हैं, जिससे उनकी सफाई और जल प्रवाह दोनों बाधित हो गए हैं। आरोप है कि हीरो मोटोकॉर्प एजेंसी और आसपास के क्षेत्र से गुजरने वाले बाढ़ खंड नाले को कई स्थानों पर मिट्टी डालकर लगभग बंद कर दिया गया है।
इतना ही नहीं, डॉ. सिद्धराज वाली गली के पास स्थित महत्वपूर्ण पुलिया, जो वर्षों से इलाके के पानी की निकासी का मुख्य माध्यम थी, उसे भी पाट दिया गया। चांदपुर रोड को पार करने वाली पुलिया के अवरुद्ध होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। परिणामस्वरूप बारिश का पानी आगे बढ़ने के बजाय वापस कॉलोनियों और बाजारों में भरने लगा है।
व्यापारियों को भारी नुकसान, दुकानें तक छोड़नी पड़ीं
जलभराव का सबसे बड़ा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ा है। कलाली रोड पर कई प्रतिष्ठान बारिश के दिनों में ग्राहकों से लगभग कट जाते हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क पर कई-कई फुट पानी भर जाने से ग्राहक पहुंच ही नहीं पाते।
बताया जाता है कि लगातार जलभराव की समस्या से परेशान होकर एक प्रतिष्ठित खाद्य व्यवसायी को अपना पुराना प्रतिष्ठान बंद कर दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित करना पड़ा। वहीं अस्पतालों, टाइल्स शोरूम, बर्फ फैक्ट्री और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
घट रही संपत्तियों की कीमत, बढ़ रही लोगों की परेशानी
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि लगातार जलभराव के कारण इस क्षेत्र की भूमि और मकानों की कीमतों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। जिन क्षेत्रों को कभी नगर का विकसित और महत्वपूर्ण इलाका माना जाता था, वहां अब खरीदार भी सावधानी बरतने लगे हैं।
कलाली रोड केवल एक सड़क नहीं बल्कि कई कॉलोनियों, विद्यालयों, चिकित्सालयों, पार्कों और दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान न होना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर
जलभराव केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी बड़ा संकट बनता जा रहा है। गंदे पानी के लंबे समय तक जमा रहने से संक्रामक बीमारियों, मच्छरों और दुर्गंध की समस्या बढ़ जाती है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ता है।
क्या है समाधान?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि:
- सभी प्रमुख नालों से अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं।
- बंद की गई पुलियाओं और बाढ़ खंड नाले को तत्काल खोला जाए।
- बरसात से पहले व्यापक सफाई अभियान चलाया जाए।
- पूरे क्षेत्र की जलनिकासी का तकनीकी सर्वे कर स्थायी मास्टर प्लान बनाया जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
जनता का सवाल
मंडी धनौरा, जो अमरोहा जिले की राजस्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, यदि वहीं की मुख्य सड़कें मामूली बारिश में डूब जाएं तो यह केवल स्थानीय समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है। मानसून दस्तक देने वाला है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी जलभराव की समस्या केवल शिकायतों और आश्वासनों तक सीमित रहेगी या फिर प्रशासन वास्तव में स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगा?












