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जब महिलाओं ने संभाली कमान… नजीबाबाद में अंबेडकर जयंती ने रच दिया इतिहास

नजीबाबाद में ‘अंबेडकर जयंती’ बनी सामाजिक जागरण का महाअभियान: महिला शक्ति के नेतृत्व में गूंजा बदलाव का बिगुल!

नजीबाबाद | TargetTvLive | स्पेशल स्टोरी

कोतवाली रोड स्थित सिद्धबली विहार कॉलोनी में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और बदलाव का सशक्त मंच बनकर उभरी। “डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति जनजाति जनकल्याण समिति” के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र में जागरूकता और एकजुटता की नई लहर पैदा कर दी।

महिलाओं ने संभाली कमान, बदली परंपरा की तस्वीर

इस बार जयंती समारोह की सबसे खास बात रही—महिला शक्ति का नेतृत्व। केक काटकर और बाबा साहब को पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं ने की, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि अब समाज में बदलाव की कमान महिलाएं भी पूरी मजबूती से संभाल रही हैं।

विचारों की गूंज: ‘संविधान और समानता’ बना केंद्र बिंदु

आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने बाबा साहब के संघर्ष, उनके संविधान निर्माण में योगदान और सामाजिक न्याय की अवधारणा को विस्तार से रखा।
हर वक्ता के शब्दों में एक ही संदेश साफ था—
👉 “जब तक समाज में समानता नहीं, तब तक अंबेडकर के विचार अधूरे हैं।”

प्रमुख वक्ताओं में ऊष्मा कशेरवाल, भुवनेश्वरी, हेमलता, इंद्रबंधु शास्त्री, राकेश कुमार, प्रो. जेपी गुप्ता, प्रो. मनोज कुमार और धनीराम ने अपने विचारों से कार्यक्रम को ऊंचाई दी।

जनभागीदारी बनी ताकत, एक मंच पर दिखी एकता

कार्यक्रम में हर वर्ग, हर आयु और हर समुदाय के लोगों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि अंबेडकर के विचार अब केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान की जरूरत हैं।

समिति के अध्यक्ष रामनाथ सिंह (सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक), कोषाध्यक्ष राजेश कुमार, व्यवस्थापक राम भरोसे सिंह और शेर सिंह का विशेष योगदान रहा।
सैकड़ों की संख्या में उपस्थित महिलाओं और युवाओं ने आयोजन को जनआंदोलन का रूप दे दिया।

संचालन ने बांधे रखा समां, संदेश पहुंचा हर दिल तक

प्रवक्ता डॉ. जितेंद्र कुमार के प्रभावी संचालन ने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा और हर वक्ता के विचारों को लोगों तक असरदार तरीके से पहुंचाया।

TargetTvLive विश्लेषण: जयंती से जनजागरण तक का सफर

नजीबाबाद का यह आयोजन इस बात का संकेत है कि अब अंबेडकर जयंती केवल औपचारिकता नहीं रही।
👉 यह सामाजिक बदलाव, अधिकारों की मांग और समानता की लड़ाई का सशक्त मंच बनती जा रही है।
👉 खासकर महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी आने वाले समय में बड़े सामाजिक परिवर्तन का संकेत दे रही है।

निष्कर्ष: ‘श्रद्धांजलि’ नहीं, ‘संकल्प’ बना यह आयोजन

सिद्धबली विहार कॉलोनी का यह कार्यक्रम एक साफ संदेश दे गया—
👉 “अंबेडकर को याद करना ही नहीं, उनके रास्ते पर चलना ही असली सम्मान है।”

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