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GJU में गूंजा पर्यावरण चेतना का बिगुल: “भोपाल से सबक लो… नहीं तो अगली आपदा हमारे दरवाज़े पर होगी!”

GJU में गूंजा पर्यावरण चेतना का बिगुल: “भोपाल से सबक लो… नहीं तो अगली आपदा हमारे दरवाज़े पर होगी!”

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर छात्रों–प्रोफेसरों की जोरदार पहल, कैंपस में चला जागरूकता का महाअभियान

मुरादाबाद स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (GJU) में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर सोमवार को ऐसा माहौल देखने को मिला, जिसने न सिर्फ छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग किया, बल्कि यह भी याद दिलाया कि भोपाल गैस त्रासदी जैसी घटनाएँ केवल इतिहास नहीं—एक चेतावनी हैं।
पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित इस औपचारिक कार्यक्रम में रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान विभाग के छात्र और प्राध्यापक भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत—‘2 दिसंबर’ को उसका सच्चा अर्थ दिलाने वाला संबोधन

समारोह का आरंभ पर्यावरण विज्ञान के छात्र अरमान खान के तीखे और प्रभावशाली उद्बोधन से हुआ।
उन्होंने कहा—

“2 दिसंबर केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, मानव इतिहास की सबसे दर्दनाक चेतावनियों में से एक है—भोपाल गैस कांड।”

उनके संबोधन ने पूरे कार्यक्रम का स्वर ऐसा तय किया जिसने सभी प्रतिभागियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या आज भी समाज वही गलतियाँ दोहरा रहा है?

प्रदूषण नियंत्रण के ‘ग्राउंड लेवल’ उपाय—छात्रों ने रखे बेहतरीन प्रस्ताव

कार्यक्रम में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े व्यावहारिक जीवनशैली बदलावों का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया गया।
विद्यार्थियों को बताया गया कि—

  • प्रदूषण नियंत्रण किसी एक संस्था का काम नहीं,
  • यह हर नागरिक की व्यक्तिगत आदतों से शुरू होता है।

इसके बाद खुले मंच पर छात्रों ने अपने विचार रखे, जहाँ कई दमदार सुझाव सामने आए।

✔️ विद्यार्थियों द्वारा दिए गए प्रमुख सुझाव
  • परिसर में “Green Corridor” विकसित करने की पहल
  • कैंपस स्तर पर नो-प्लास्टिक मिशन
  • वेस्ट मैनेजमेंट के लिए Zero Waste Corners
  • प्लास्टिक की बोतलों के बदले स्टील/कॉपर बोतलों को बढ़ावा
  • छात्रों के लिए मासिक Green Audit System
  • बाइक–कार की जगह साझा वाहन / इलेक्ट्रिक साइकिल का उपयोग

इन सुझावों ने कार्यक्रम को छात्रों की सक्रियता और भविष्य की जागरूक सोच का मजबूत उदाहरण बना दिया।

प्रोफेसरों ने दिए ‘गाइडिंग प्रिंसिपल’—ज्ञान, विज्ञान और जिम्मेदारी का संगम

कार्यक्रम का सबसे गंभीर और ज्ञानवर्धक हिस्सा रहा प्राध्यापकों के विचार।
मानो पूरा मंच एक “Green Classroom” में बदल गया हो।

डॉ. अनामिका त्रिपाठी (Environmental Nodal Officer)

  • उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण केवल सरकारी नियमों से नहीं,
    “नियमित पर्यावरणीय मूल्यांकन और व्यक्तिगत अनुशासन” से संभव है।

डॉ. वैशाली पूनिया (PG Programme Coordinator)

  • सतत् जीवनशैली को “Modern Living का अनिवार्य हिस्सा” बताया।
  • छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने व्यवहार से बदलाव की शुरुआत करें।

डॉ. पी. बी. तिवारी

  • पर्यावरणीय चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत किए
  • साथ ही ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ को भविष्य की जरूरत बताया।

डॉ. अदिति

  • युवा पीढ़ी की भूमिका को सबसे निर्णायक बताया।
  • कहा कि “युवा केवल सीखते नहीं—ट्रेंड बनाते हैं।”

डॉ. अदीबा

  • दैनिक जीवन में छोटे बदलावों के बड़े प्रभाव पर ज़ोर दिया
  • जैसे: पानी बचाना, ऊर्जा बचाना, कचरे का सही निपटान करना।

कुलपति का शक्तिशाली संदेश—एक वाक्य जिसने सबका ध्यान खींच लिया

विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए VC  ने कहा—

“यदि आज की पीढ़ी पर्यावरण के प्रति सजग नहीं हुई तो कल किसी भी गैस त्रासदी को रोकना संभव नहीं होगा।”

उनके इस वक्तव्य ने पूरे सभागार में दृढ़ संकल्प का माहौल पैदा कर दिया।
उन्होंने छात्रों को केवल जागरूक ही नहीं, बल्कि सक्रिय पर्यावरण प्रहरी बनने का आह्वान किया।

समापन—वर्षा शर्मा का प्रभावी सार

कार्यक्रम का समापन पर्यावरण विज्ञान विभाग की छात्रा वर्षा शर्मा द्वारा सुगठित सार-प्रस्तुति के साथ हुआ।
उन्होंने सभी चर्चाओं, सुझावों और संदेशों को जोड़कर यह निष्कर्ष निकाला—

“पर्यावरण की रक्षा कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं—यह जीवनभर का अनुबंध है।”

📌 इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएँ—Full Takeaways

🔹 भोपाल गैस त्रासदी पर आधारित भावनात्मक व चेतावनीपूर्ण संदेश
🔹 छात्रों–प्राध्यापकों की सामूहिक भागीदारी
🔹 ग्रीन कैंपस के लिए ठोस और लागू किए जा सकने वाले सुझाव
🔹 सतत् जीवनशैली और पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर शिक्षकों के वैज्ञानिक विचार
🔹 कुलपति का प्रेरक, भविष्य-सुरक्षा केंद्रित संदेश
🔹 छात्रों की सक्रियता और ‘ग्रीन माइंडसेट’ का विकास

🌱 नतीजा—GJU ने दिया स्पष्ट संदेश: “पर्यावरण बचेगा, तभी भविष्य बचेगा”

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों की जागरूकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा।
GJU ने न केवल एक आयोजन किया, बल्कि अपने छात्रों के दिलों में एक स्थायी पर्यावरणीय चेतना का बीज बोया।

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