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“CM Dashboard में फेल हुआ बिजनौर! CDO ने खोली पोल, कई विभागों को नोटिस”

“CM Dashboard में गिरती रैंकिंग से हिला बिजनौर प्रशासन: जवाबदेही तय या सिस्टम की विफलता?”

✍️ विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: अवनीश त्यागी TargetTvLive
📍 बिजनौर | 15 अप्रैल 2026

बिजनौर जनपद में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर लगातार गिरती रैंकिंग के बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रण विजय सिंह द्वारा की गई सख्त कार्रवाई ने न केवल विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की कार्यकुशलता पर भी बहस छेड़ दी है।

जनवरी से मार्च 2026 की समीक्षा में सामने आए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि कई प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं या तो धीमी गति से लागू हो रही हैं या लाभार्थियों तक उनका प्रभावी लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

रैंकिंग में गिरावट: आंकड़ों में छिपी चेतावनी

मुख्यमंत्री डैशबोर्ड राज्य सरकार का एक अहम मॉनिटरिंग टूल है, जो जिलों के प्रदर्शन को रैंकिंग और ग्रेड के आधार पर मापता है। बिजनौर का हालिया प्रदर्शन कई स्तरों पर चिंताजनक रहा:

  • जननी सुरक्षा योजना (JSY): 28वीं रैंक, ‘C’ ग्रेड
    → संस्थागत प्रसवों के मुकाबले मात्र 30.18% भुगतान, जो वित्तीय प्रबंधन और लाभार्थी ट्रैकिंग में कमी को दर्शाता है।
  • मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): लगातार ‘D’ ग्रेड, 68वीं रैंक
    → यह संकेत देता है कि आवास निर्माण और स्वीकृति प्रक्रियाओं में गंभीर बाधाएं हैं।
  • सामूहिक विवाह योजना: ‘D’ ग्रेड
    → सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में कमजोर समन्वय।
  • वृद्धावस्था पेंशन योजना: ‘C’ ग्रेड
    → संवेदनशील वर्ग तक समय पर सहायता नहीं पहुंच रही।
  • पोषण अभियान (ICDS): लगातार तीन माह ‘C’ ग्रेड
    → यह स्थिति बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर डाल सकती है।
  • पंचायती राज एवं सेतु निर्माण: धीमी प्रगति
    → स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की गति अपेक्षाकृत कम।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया: सख्ती या सुधार की शुरुआत?

CDO रण विजय सिंह द्वारा संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश देना यह दर्शाता है कि प्रशासन अब जवाबदेही तय करने की दिशा में सक्रिय हो रहा है

उन्होंने स्पष्ट किया है कि:

  • लापरवाही पर प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दी जाएगी
  • और आवश्यक होने पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी

यह कदम अल्पकालिक रूप से सख्ती जरूर दिखाता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दीर्घकालिक सुधार की दिशा में भी कारगर साबित होगा?

विश्लेषण: समस्या के मूल कारण क्या हैं?

बिजनौर की स्थिति को केवल “कमजोर प्रदर्शन” कहकर टालना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे कई संरचनात्मक और प्रबंधन संबंधी कारण हो सकते हैं:

1. फील्ड मॉनिटरिंग की कमी

अधिकांश योजनाएं ग्राम स्तर पर लागू होती हैं, जहां निगरानी तंत्र कमजोर होने से कार्य प्रभावित होता है।

2. डेटा और जमीनी हकीकत में अंतर

डैशबोर्ड पर अपलोड डेटा और वास्तविक प्रगति में असंतुलन, जिससे रैंकिंग गिरती है।

3. विभागों के बीच समन्वय का अभाव

कई योजनाएं बहु-विभागीय होती हैं, लेकिन समन्वय की कमी से लक्ष्य अधूरा रह जाता है।

4. लाभार्थी पहचान और भुगतान में देरी

विशेषकर JSY और पेंशन योजनाओं में यह समस्या स्पष्ट रूप से दिखती है।

5. जवाबदेही तय न होना

समय पर जिम्मेदारी तय न होने से कार्यप्रणाली में ढिलाई आना स्वाभाविक है।

क्या हो सकता है समाधान?

विशेषज्ञों के अनुसार, स्थिति सुधारने के लिए निम्न कदम जरूरी हैं:

  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग और फील्ड विजिट बढ़ाना
  • डिजिटल डेटा की नियमित ऑडिटिंग
  • विभागीय समन्वय के लिए संयुक्त समीक्षा बैठकें
  • लाभार्थी भुगतान प्रणाली को पारदर्शी और तेज बनाना
  • अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करना

जनता पर असर: क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

यह मामला केवल रैंकिंग का नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर जनता के जीवन से जुड़ा है।

  • आवास योजना में देरी = गरीबों को छत नहीं
  • पेंशन में देरी = बुजुर्गों को आर्थिक संकट
  • पोषण अभियान में कमी = बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा

इसलिए यह जरूरी है कि सुधार केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव दिखे।

निष्कर्ष: चेतावनी या अवसर?

बिजनौर के लिए यह स्थिति एक चेतावनी भी है और अवसर भी
यदि प्रशासन इस मौके का उपयोग करते हुए सिस्टम को सुधारता है, तो आने वाले महीनों में रैंकिंग में सुधार संभव है।
लेकिन अगर यह केवल नोटिस और जवाब तक सीमित रह गया, तो समस्याएं और गहरी हो सकती हैं।

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