“पश्चिम यूपी में सियासी संग्राम का बिगुल: ‘जनता त्रस्त, बदलाव तय’—नसीमुद्दीन सिद्दीकी का बड़ा दावा, 2027 पर सीधा वार”
✍️ रिपोर्ट: M P Singh | TargetTvLive
📍 अमरोहा | 16 अप्रैल 2026
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में चुनावी गर्मी अब खुलकर सामने आने लगी है। समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने हसनपुर में आयोजित ‘पीडीए चौपाल’ के मंच से योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “प्रदेश की जनता अब योगी सरकार की नीतियों और अधिकारियों की मनमानी से छुटकारा चाहती है।”
“महंगाई-बेरोजगारी ने तोड़ी कमर, जनता बेहाल”
अपने संबोधन में सिद्दीकी ने सीधे तौर पर योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए कहा कि महंगाई और बेरोजगारी ने आम आदमी का जीना मुश्किल कर दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं
- युवाओं के लिए रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं
- सरकारी मशीनरी में जवाबदेही खत्म हो चुकी है
👉 “जनता कराह रही है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है”—यह बयान सियासी तौर पर बड़ा संकेत माना जा रहा है।
PDA चौपाल से बड़ा सियासी मैसेज
हसनपुर में सपा नेता बदर कुरैशी के आवास पर आयोजित ‘पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)’ चौपाल कार्यक्रम में सिद्दीकी ने स्पष्ट कर दिया कि सपा अब अपने कोर सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले को और मजबूत करने में जुटी है।
उन्होंने कहा कि:
👉 “पूरा प्रदेश घूमकर PDA गठबंधन को मजबूत किया जा रहा है।”
यह रणनीति सीधे तौर पर अखिलेश यादव की 2027 चुनावी योजना का हिस्सा मानी जा रही है।
2027 का बिगुल: “पश्चिम यूपी से बजेगी खतरे की घंटी”
सिद्दीकी ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम उत्तर प्रदेश से भाजपा के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है।
उन्होंने कहा:
- “अबकी बार बदलाव की बारी है”
- “सपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी”
- “अखिलेश यादव फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे”
👉 यह बयान साफ तौर पर चुनावी माहौल को गरमाने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
ग्राउंड पर एक्टिव मोड में सपा कार्यकर्ता
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान:
- बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर दिया गया
- घर-घर जाकर सपा की नीतियों को पहुंचाने का आह्वान हुआ
- कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर चुनाव जीतने का संकल्प लिया
प्रमुख रूप से पूर्व विधायक हाजी शब्बन, जिलाध्यक्ष मस्तराम यादव, चंद्रपाल सैनी, आरिफ अख्तर, यूसुफ कुरैशी, जावेद जरताब, रवि शंकर शर्मा, साजिद खान, डॉ. रईस कुरैशी और अरशद चौधरी सहित कई नेता मौजूद रहे।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या बदल रहा है समीकरण?
इस पूरे घटनाक्रम को अगर गहराई से समझें तो कुछ बड़े संकेत निकलकर सामने आते हैं:
1. आक्रामक मोड में सपा
सपा अब सिर्फ विपक्ष की भूमिका में नहीं, बल्कि सरकार बनाने के स्पष्ट लक्ष्य के साथ मैदान में उतर चुकी है।
2. PDA कार्ड पर बड़ा दांव
पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट कर बड़ा सामाजिक समीकरण तैयार करने की कोशिश।
3. स्थानीय मुद्दों को बना हथियार
महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक मनमानी जैसे मुद्दों को जनता से जोड़कर चुनावी नैरेटिव सेट करना।
पश्चिम यूपी क्यों बना सियासी रणभूमि?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से चुनावी दृष्टि से निर्णायक रहा है।
- यहां का जातीय और सामाजिक समीकरण चुनाव का रुख बदल देता है
- किसान, युवा और अल्पसंख्यक वोटर बड़ी भूमिका निभाते हैं
- छोटे-छोटे स्थानीय मुद्दे भी बड़ा असर डालते हैं
👉 ऐसे में सपा का फोकस इस क्षेत्र पर बढ़ना स्वाभाविक है।
निष्कर्ष: क्या वाकई बदलाव की आहट?
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बयान सियासी माहौल को जरूर गर्माते हैं, लेकिन असली तस्वीर अभी बाकी है।
✔ क्या जनता वाकई बदलाव के मूड में है?
✔ क्या PDA गठबंधन सपा को सत्ता तक पहुंचा पाएगा?
✔ क्या भाजपा इन आरोपों का जवाब रणनीति से देगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि 2027 की जंग अब धीरे-धीरे तेज होती जा रही है।
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