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बिजनौर में खुल रहे 3 नए खनन ज़ोन! — सरकार ने ड्राफ्ट रिपोर्टें सार्वजनिक कीं, जनता की राय पर तय होगा अंतिम फैसला

बिजनौर में खुल रहे 3 नए खनन ज़ोन! — सरकार ने ड्राफ्ट रिपोर्टें सार्वजनिक कीं, जनता की राय पर तय होगा अंतिम फैसला

30 दिन का मौका: अपनी आपत्ति या सुझाव अब सीधे प्रशासन को भेजें

बिजनौर में खनन को लेकर बड़ा अपडेट — प्रशासन ने जनता को दी खुली छूट

बिजनौर, 02 दिसंबर 2025:
जिले में खनन से जुड़े एक अहम फैसले में जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जानकारी दी है कि 3 नए खनन क्षेत्रों को शामिल करने के लिए तैयार की गई जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट–2025 और Replenishment Study Report (Pre & Post Monsoon)–2025 को अब जनता के लिए जारी कर दिया गया है।

यह रिपोर्टें पहले ही Sub-Divisional Committee (SDC) द्वारा मंज़ूर की जा चुकी हैं और अब अंतिम निर्णय जनता की राय के आधार पर होगा।

 कहां देखें ये रिपोर्टें?

प्रशासन ने पारदर्शिता दिखाते हुए इन रिपोर्टों को 30 दिनों के लिए पब्लिक डोमेन पर डाल दिया है।
आप इन्हें यहां आसानी से देख सकते हैं:
👉 bijnor.nic.in

इसके अलावा रिपोर्टों की कॉपी:

  • जिलाधिकारी कार्यालय
  • खनिज विभाग कार्यालय
  • दोनों कार्यालयों के नोटिस बोर्ड
    पर भी उपलब्ध है।

ये रिपोर्टें आखिर बताती क्या हैं? (आम भाषा में)

खनन कहां हो सकता है और कहां नहीं—ये रिपोर्टें उसी का पूरा वैज्ञानिक हिसाब लगाती हैं।
इनमें शामिल है:

  • इलाके में मिट्टी/रेत की मात्रा
  • पर्यावरण पर असर
  • नदी में रेत के प्राकृतिक पुनर्भरण (replenishment) का आंकड़ा
  • मानसून से पहले और बाद में मिट्टी-रेत का स्तर
  • किन स्थानों पर खनन सुरक्षित रहेगा

सरल शब्दों में: ये रिपोर्टें खनन की पूरी ‘साइंटिफिक फिटनेस रिपोर्ट’ हैं।

 जनता की राय क्यों ज़रूरी?

किसी भी खनन क्षेत्र से सीधा असर पड़ता है—
गांव की ज़मीन, नदी किनारे की सुरक्षा, पेड़-पौधे, सड़कें, और यहां रहने वाले लोग भी प्रभावित होते हैं।

इसलिए सरकार ने कहा है:
“पहले जनता बोलेगी, फिर खनन का फैसला होगा।”

अगर आपको लगता है—

  • खनन से आपके गांव को खतरा होगा
  • पर्यावरण पर असर पड़ेगा
  • कोई तकनीकी/स्थानीय जानकारी है जो रिपोर्ट में नहीं है
  • या आप खनन को समर्थन देना चाहते हैं

तो आपकी बात 100% सुनी जाएगी।

 कैसे और कहां दें अपनी आपत्ति/सुझाव?

आप अपनी आपत्ति या सुझाव लिखित रूप में 30 दिनों के भीतर दे सकते हैं।
पता:
👉 जिलाधिकारी कार्यालय (खनन अनुभाग), बिजनौर

सभी टिप्पणियां अंतिम रिपोर्ट में शामिल की जाएंगी—खुला और पारदर्शी सिस्टम।

 क्यों माना जा रहा है यह फैसला अहम?

  • जिले में खनन व्यवस्था होगी “साइंटिफिक + पारदर्शी”
  • अवैध खनन पर सख्त लगाम
  • पर्यावरण संतुलन बना रहेगा
  • जनता भी अब इस फैसले का हिस्सा
  • विकास और संरक्षण का संतुलित मॉडल तैयार होगा

विशेषज्ञों का कहना है कि बिजनौर का यह कदम भविष्य में अन्य जिलों के लिए भी मॉडल प्रोजेक्ट बन सकता है।

 निष्कर्ष: यह सिर्फ खनन की सूचना नहीं, बल्कि पर्यावरण-संवेदनशील शासन का मजबूत संदेश है 

जिला प्रशासन चाहता है कि खनन पर अंतिम निर्णय जनता + विज्ञान + प्रशासन तीनों के संयुक्त आधार पर हो।
अब गेंद जनता के पाले में है—30 दिनों में दी गई आपत्तियां और सुझाव ही तय करेंगे कि ये 3 नए खनन क्षेत्र हरी झंडी पाएंगे या नहीं।

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