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“प्रतापगढ़ में हाइटेक तस्करी: मोबाइल-कुंजी और मोटरसाइकिल से चल रहा था ड्रग्स कारोबार”

प्रतापगढ़ में ड्रग्स माफिया पर पुलिस का शिकंजा

33 लाख की एमडी ड्रग्स और स्मैक बरामद | एक तस्कर गिरफ्तार, दूसरा फरार

प्रतापगढ़ जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार पर बड़ी चोट की है। लीलापुर थाना पुलिस और स्पेशल टीम की संयुक्त कार्रवाई में 33 लाख रुपये की अवैध ड्रग्स बरामद की गई हैं। इस अभियान में एक तस्कर को दबोच लिया गया जबकि उसका साथी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।


📍 कैसे हुई कार्रवाई?

  • मंगलवार को थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज पांडेय अपनी टीम के साथ पतुलकी तिराहे पर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे।
  • इसी दौरान एक बाइक सवार को रोककर तलाशी ली गई।
  • जांच में तस्कर की जेब और बैग से 116 ग्राम स्मैक और 25 ग्राम एमडी (मेथ) ड्रग्स बरामद हुई।
  • आरोपी की पहचान राजेश सिंह उर्फ रोहित (32 वर्ष) निवासी अजमतुलागंज हरिचंदपुर, रायबरेली के रूप में हुई।

 बरामदगी की कीमत

  • स्मैक (116 ग्राम): लगभग ₹8 लाख
  • एमडी (25 ग्राम): लगभग ₹25 लाख
  • साथ ही: एक बाइक और चार की-पैड मोबाइल फोन
    👉 कुल कीमत: लगभग 33 लाख रुपये

 पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा

गिरफ्तार आरोपी राजेश उर्फ रोहित ने पूछताछ में पुलिस को बताया:

  • वह लंबे समय से नशे के कारोबार में शामिल है।
  • उसका साथी अनिल सिंह पुत्र रामलौट सिंह, निवासी बैजलपुर, अंतू (प्रतापगढ़) ड्रग्स की आपूर्ति करता है।
  • दोनों मिलकर कमाई को बराबर बांटते हैं।
  • पुलिस की भनक लगते ही अनिल मौके से फरार हो गया।

 पुलिस की अगली रणनीति

  • फरार आरोपी अनिल सिंह की तलाश में पुलिस की दबिशें जारी।
  • सप्लाई नेटवर्क को तोड़ने के लिए राजेश से पूछताछ जारी।
  • दोनों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज।
  • मोबाइल फोनों की कॉल डिटेल्स से पूरे गिरोह का खुलासा होने की संभावना।

क्यों खतरनाक है एमडी और स्मैक?

  • एमडी (मेथ) – बेहद खतरनाक सिंथेटिक ड्रग, युवाओं की मानसिक और शारीरिक सेहत पर गहरा असर।
  • स्मैक – हेरोइन का एक रूप, जिसकी लत जानलेवा साबित होती है।
  • असर:
    • शुरुआत में नशा करने वाला “ट्रेंड” या “फैशन” में इस्तेमाल करता है।
    • धीरे-धीरे यह लत जिंदगी बर्बाद कर देती है।
    • चोरी, अपराध और मानसिक बीमारियों तक की नौबत आ जाती है।

सामाजिक असर

  • छोटे कस्बों और गांवों तक अब नशे की पैठ।
  • बेरोजगार युवाओं को आसानी से बना लिया जाता है शिकार।
  • ड्रग्स माफिया को मोटा मुनाफा, समाज को अपराध और बरबादी।
  • हर महीने लाखों रुपये का अवैध कारोबार, जिसका इस्तेमाल कई बार संगठित अपराधों में होता है।

जनता का सवाल

  • नशा माफिया का नेटवर्क आखिर कहां से संचालित हो रहा है?
  • क्या यह सिर्फ दो लोगों का खेल है या पीछे कोई बड़ा गिरोह है?
  • युवाओं को बचाने के लिए प्रशासन और समाज मिलकर क्या कदम उठा रहे है

प्रतापगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन असली चुनौती फरार आरोपी को पकड़ना और इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचना है।
अगर इस तरह की सख्त कार्रवाई लगातार होती रही, तो जिले और प्रदेश को नशे के जाल से बचाया जा सकता है।

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