“राजा भैया का शस्त्र पूजन: परंपरा, ताक़त और समर्थकों का संगम”
खास बातें
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दशहरे पर बेती महल में हथियारों की चमक से सजा अनोखा नज़ारा
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राजा भैया बोले – “जो समर्थकों का है, वही मेरा है”
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परिवार और समर्थकों के दर्जनों हथियारों का विधि-विधान से पूजन
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क्षेत्रीय जनता में उल्लास और गर्व का माहौल
📍 प्रतापगढ़: बेती महल बना आस्था और शक्ति का केंद्र
https://youtu.be/O1k240PebIA
दशहरे का पर्व यूं तो हर घर में मनाया जाता है, लेकिन कुंडा के बेती महल परिसर का दृश्य गुरुवार को बिल्कुल अलग था। एक लम्बी मेज पर हथियारों की कतार – छोटे रिवॉल्वर से लेकर बड़े-बड़े रायफल तक – चमचमाते अंदाज़ में सजे थे। सामने बैठे थे कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, जो विजयादशमी के अवसर पर हर साल की तरह इस बार भी शस्त्र पूजन कर रहे थे।
हथियारों की सजावट ने खींचा ध्यान
- इस बार शस्त्र पूजन में राजा भैया के करीब 30 लाइसेंसी हथियारों के अलावा उनके समर्थकों के हथियार भी एक साथ रखे गए।
- हथियारों की इतनी बड़ी संख्या देखकर हर कोई हैरान रह गया।
- पूजा के समय धूप-दीप और मंत्रोच्चार के बीच यह दृश्य शक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम पेश कर रहा था।
राजा भैया का जवाब, जिसने जीता दिल
जब उनसे पूछा गया कि इन हथियारों में आपके कितने और समर्थकों के कितने हैं, तो राजा भैया ने मुस्कराते हुए कहा –
👉 “सब हथियार हमारे ही हैं… जो मेरे समर्थकों का है, वही मेरा है और जो मेरा है, वही मेरे समर्थकों का है।”
यह एक वाक्य समर्थकों के बीच रिश्ते की मजबूती का प्रतीक बन गया।
परंपरा और गर्व
- सनातन धर्म में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन को धर्म और शक्ति की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
- राजा भैया इस परंपरा को सालों से निभाते आ रहे हैं।
- इस बार उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों ने भी हिस्सा लिया, जिससे आयोजन और भव्य हो गया।
लोगों का उत्साह
पूरे इलाके में इस आयोजन को लेकर गहमागहमी रही।
- पूजा के दौरान हथियारों की चमक से माहौल रौशन हो उठा।
- लोग हथियारों को देखकर चर्चा करते नहीं थक रहे थे।
- क्षेत्रीय जनता के लिए यह न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान, बल्कि गर्व और उत्सव का अवसर था।
विश्लेषण: धर्म, शक्ति और राजनीति का अनोखा मिश्रण
राजा भैया का शस्त्र पूजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं है। यह उनके समर्थकों को संदेश भी देता है –
- हथियार सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक हैं।
- यह आयोजन समर्थकों में एकजुटता और ताक़त का अहसास कराता है।
- साथ ही यह राजा भैया की राजनीतिक छवि को भी और मजबूत करता है।
✅ निष्कर्ष
बेती महल का यह शस्त्र पूजन सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि परंपरा, आस्था, शक्ति और राजनीति का संगम था। विजयादशमी पर राजा भैया और उनके समर्थकों का यह आयोजन लोगों के बीच लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।












