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“मेरठ से उठी आवाज, रूस में गूंजी—‘ग्लोबल नॉर्थ’ को खुली चुनौती, भारत का कानून बना दुनिया के लिए मिसाल!”

“मेरठ से उठी आवाज, रूस में गूंजी—‘ग्लोबल नॉर्थ’ को खुली चुनौती, भारत का कानून बना दुनिया के लिए मिसाल!”

MSU के अंतरराष्ट्रीय मंच पर डॉ. विवेक त्यागी का बड़ा दावा—अब विकसित देश सीखेंगे विकासशील देशों से!

EXCLUSIVE | ANALYTICAL NEWS REPORT

मेरठ/मास्को | 17 अप्रैल 2026 | रिपोर्ट: अवनीश त्यागी (TargetTvLive)

दुनिया की कानून व्यवस्था में दशकों से चला आ रहा एकतरफा प्रभुत्व अब दरकता नजर आ रहा है। रूस के प्रतिष्ठित मास्को राज्य विश्वविद्यालय (MSU) के अंतरराष्ट्रीय मंच से मेरठ के एक प्रोफेसर ने ऐसा विमर्श छेड़ा, जिसने वैश्विक दिवालिया कानून (Insolvency Law) की दिशा ही बदलने का संकेत दे दिया।

डॉ. विवेक कुमार त्यागी, समन्वयक—विधि अध्ययन संस्थान, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय—ने अपने धारदार व्याख्यान से “ग्लोबल नॉर्थ बायस” की जड़ों पर सीधा प्रहार किया।

“अब नहीं चलेगा एकतरफा कानून मॉडल”

Challenging Global North Bias” विषय पर दिए गए अपने व्याख्यान में डॉ. त्यागी ने दो टूक कहा—

👉 अब तक दुनिया के दिवालिया कानून अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के नजरिए से बनाए गए
👉 लेकिन यह मॉडल हर देश के लिए कारगर नहीं है
👉 विकासशील देशों के अनुभवों को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं

उनका यह बयान केवल आलोचना नहीं, बल्कि वैश्विक कानून सुधार की नई रूपरेखा पेश करता है।

भारत का IBC—‘गेम चेंजर’ क्यों?

डॉ. त्यागी ने भारत के Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा और बताया—

✔️ समयबद्ध समाधान (Time-bound resolution)
✔️ ऋणदाताओं को सशक्त अधिकार
✔️ कॉर्पोरेट संकट में तेज निर्णय

👉 उनके अनुसार, IBC ने भारत में आर्थिक अनुशासन लाया और अब यह
“दुनिया के लिए एक व्यावहारिक मॉडल” बन चुका है।

ग्लोबल साउथ की ताकत—जिन्हें दुनिया ने नजरअंदाज किया

डॉ. त्यागी ने यह भी उजागर किया कि—
ब्राजील, मलेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, उरुग्वे, कोलंबिया और चिली जैसे देशों ने

👉 अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार
👉 अधिक लचीले और प्रभावी कानून विकसित किए

लेकिन “ग्लोबल नॉर्थ” के प्रभाव के कारण
 इन नवाचारों को कभी वैश्विक मंच पर उचित स्थान नहीं मिला

सबसे बड़ा हथियार—“Reverse Learning”

इस पूरे व्याख्यान का सबसे विस्फोटक हिस्सा रहा—

👉 “Reverse Learning” का कॉन्सेप्ट

डॉ. त्यागी ने कहा—

 अब विकसित देशों को भी विकासशील देशों से सीखना होगा
 कानून सिर्फ ऊपर से नीचे (North to South) नहीं,
बल्कि नीचे से ऊपर (South to North) भी जाएगा

👉 यह सोच अगर लागू होती है, तो
वैश्विक कानून व्यवस्था का पावर बैलेंस बदल सकता है

15 देशों के विशेषज्ञ—एक मंच, एक बहस

इस अंतरराष्ट्रीय सत्र में 15 देशों के करीब 30 विधि विशेषज्ञ शामिल हुए।
अर्जेंटीना, इटली, पेरू और ब्राजील के विद्वानों की मौजूदगी ने

👉 इस मंच को वैश्विक नीति निर्माण का हॉटस्पॉट बना दिया

मेरठ से मॉस्को तक—CCSU की बढ़ी साख

यह उपलब्धि सिर्फ एक व्याख्यान नहीं, बल्कि—

👉 चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की
👉 वैश्विक शैक्षणिक पहचान का विस्तार है

👉 विधि अध्ययन संस्थान अब
अंतरराष्ट्रीय कानूनी विमर्श का सक्रिय हिस्सा बन चुका है

क्यों यह खबर बड़ी है? (Deep Analysis)

 पहली बार “ग्लोबल नॉर्थ बायस” पर इतने बड़े मंच से खुली चुनौती
 भारत का IBC वैश्विक मॉडल के रूप में स्थापित
 विकासशील देशों को मिला बौद्धिक नेतृत्व
 अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था में बदलाव के संकेत

बड़ा संकेत: आने वाला है ‘Legal Power Shift’?

विशेषज्ञ मानते हैं कि—

👉 अगर “Reverse Learning” को अपनाया गया
👉 तो आने वाले वर्षों में

✔️ कानून अधिक समावेशी होंगे
✔️ विकासशील देशों की भूमिका बढ़ेगी
✔️ वैश्विक आर्थिक संकटों का समाधान अधिक व्यावहारिक होगा

निष्कर्ष: मेरठ से उठी आवाज, दुनिया तक पहुंचा संदेश

डॉ. विवेक कुमार त्यागी का यह व्याख्यान
👉 केवल एक अकादमिक प्रस्तुति नहीं,
👉 बल्कि वैश्विक न्याय व्यवस्था में बदलाव की दस्तक है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि—
👉 क्या दुनिया “ग्लोबल साउथ” की इस आवाज को स्वीकार करती है
या फिर पुराने ढांचे में ही सिमटी रहती है।

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