नेग वसूली के नाम पर धोखाधड़ी! किन्नरों ने पकड़ लिया फर्जी किन्नर ‘शावेज’, पुलिस ने कराया समझोता

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शहर में हंगामा: रोज़ी-रोटी छीन रहे थे नकली किन्नर, समुदाय ने किया खुलासा
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किन्नरों ने लगाया आरोप, लंबे समय से हमारी रोज़ी-रोटी पर डाल रहा था डाका
बिजनौर | संवाददाता रिपोर्ट
बिजनौर रोडवेज बस स्टैंड रविवार को उस समय हंगामे का केंद्र बन गया, जब किन्नरों के एक गुट ने एक युवक को पकड़ लिया। आरोप है कि युवक किन्नर का भेष बनाकर नेग और पैसे वसूल रहा था।
आरोपी युवक की पहचान शावेज निवासी नई बस्ती, बिजनौर के रूप में हुई। हाथापाई में शावेज घायल हो गया, जिसके बाद किन्नरों ने उसे पकड़कर सीधे थाना कोतवाली शहर पहुंचाया।
थाना प्रभारी धर्मेंद्र सोलंकी ने सभी पक्षों को बैठाकर मामले का निपटारा कराया। समझौते में तय हुआ कि शावेज अब भविष्य में किन्नरों की पहचान का गलत इस्तेमाल नहीं करेगा।
किन्नरों का आरोप
वरिष्ठ किन्नर नैना ने मीडिया से कहा –
“यह युवक लंबे समय से फर्जी किन्नर बनकर हमारे हक का पैसा ले रहा था। हमारी खबरी ने सूचना दी, तो हमने इसे बस स्टैंड पर रंगे हाथों पकड़ लिया। अब यह वादा कर चुका है कि आगे से हमारी रोज़ी-रोटी पर चोट नहीं करेगा।”
मुद्दे की गहराई
यह मामला केवल झगड़ा नहीं, बल्कि समाज में किन्नर समुदाय के सामने खड़ी चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
- सीमित रोज़गार अवसर: किन्नरों की आय मुख्य रूप से नेग और आशीर्वाद की परंपरा पर निर्भर है।
- फर्जी पहचान का खतरा: ऐसे मामले उनकी आर्थिक स्थिति और सामाजिक सम्मान को सीधे प्रभावित करते हैं।
- कानूनी पहलू: पहचान की धोखाधड़ी और वसूली पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है, सिर्फ समझौता काफी नहीं।
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यह घटना बताती है कि किन्नरों की पहचान और अधिकारों की सुरक्षा कितनी जरूरी है।
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पुलिस ने तत्काल झगड़े को तो सुलझा दिया, लेकिन स्थायी समाधान तभी मिलेगा जब समाज और प्रशासन मिलकर किन्नरों की आजीविका को सुरक्षित करेंगे।
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ऐसे मामले बार-बार सामने आए तो यह सिर्फ किन्नर समुदाय ही नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेंगे।











