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पढ़े ! प्रियंका सौरभ की मस्ती भरी अल्हड़ कविता “फागुन में यूं प्यार से…”

फागुन में यूं प्यार से…

भूमिका:  अवनीश त्यागी 
होली का पर्व रंगों, उल्लास और भाईचारे का प्रतीक है। यह कविता, “फागुन में यूं प्यार से…”, इस त्यौहार की आत्मा को बड़े ही सुंदर और कोमल शब्दों में उकेरती है। कवयित्री प्रियंका सौरभ ने प्रेम, सद्भावना और एकता का संदेश देते हुए, होली के रंगों को मन के रंगों से जोड़ने का प्रयास किया है। कविता में फागुन के उत्सव की मस्ती, गुलाल की सुगंध, और हर गली-चौक पर मचने वाली उमंग को सजीव किया गया है।

इस कविता के माध्यम से कवयित्री हमें बैर-भाव भूलकर प्रेम और अपनत्व को अपनाने का संदेश देती हैं। वे चाहती हैं कि होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का भी पर्व बने। कविता में उल्लास, प्रेम, और समरसता की भावना इतनी सहजता से प्रवाहित होती है कि पाठक खुद को होली के रंगों में डूबा हुआ महसूस करता है। कुल मिलाकर, यह कविता होली के पर्व की पवित्रता, हर्ष और सौहार्द का उत्सव मनाती है, जो हमें इंसानियत और परस्पर प्रेम की ओर प्रेरित करती है।

फागुन में यूं प्यार से…

होली के त्यौहार में, ऐसी उठे तरंग।
तन-मन में जो प्यार की, भर दे ख़ूब उमंग॥

आँगन-आँगन रंग हो, हो रंगीला फाग।
बैर-भाव को छोड़कर, मिलें सभी के राग॥

झूम उठे उल्लास से, क्या बूढ़े क्या बाल।
उड़े ख़ूब इस फाग में, सौरभ रंग गुलाल॥

सड़क-गली हर चौक पर, मचे फाग की धूम।
रार बैर की छोड़कर, राग प्रीत ले चूम॥

होली के त्यौहार में, इतनी तो हो बात।
सबके गालों को मिले, रंगों की सौगात॥

आते होली फाग यूं, देते हैं सन्देश।
प्रेम परस्पर दे सदा, मिटे हृदय से क्लेश॥

फागुन में यूं प्यार से, गा होली के गीत।
पुष्प खिले बस चाह के, होकर के मनमीत॥

 

 

 

प्रियंका सौरभ

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