मालन नदी पर पुल निर्माण की मांग: शिक्षा और स्वास्थ्य संकट पर प्रशासन की चुप्पी से जनता में आक्रोश

BIJNOR. नजीबाबाद क्षेत्र में मालन नदी पर पुल निर्माण की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन स्थानीय विधायक और क्षेत्रीय नेतृत्व की चुप्पी से जनता में गहरा असंतोष है। क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से बने सरकारी स्कूलों और इंटर कॉलेजों के विद्यार्थियों को हर साल बरसात के मौसम में जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है, फिर भी जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रही है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के संकट पर कोई पहल नहीं
ग्राम पंचायत वीरूबाला में बने राजकीय कन्या इंटर कॉलेज और बेसिक शिक्षा विभाग के दो स्कूलों में सैकड़ों छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। बरसात के समय मालन नदी के उफान पर आने से उनका स्कूल जाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। वहीं, स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति में भी लोगों को आठ किलोमीटर दूर जर्जर पुल से होकर सफर करना पड़ता है। बावजूद इसके, स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर अब तक कोई ठोस कदम उठाने में विफल रहे हैं।
जनता में बढ़ता आक्रोश और सवालों की बौछार
आरटीआई कार्यकर्ता मनोज शर्मा और समाजसेवी सुरजीत सिंह चीमा ने पुल निर्माण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर जिलाधिकारी बिजनौर तक पत्र भेजा, लेकिन स्थानीय नेताओं की चुप्पी ने लोगों को नाराज कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय वादों की झड़ी लगाने वाले नेता अब जनता की मूलभूत जरूरतों पर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
एक स्थानीय निवासी ने गुस्से में कहा, “वोट मांगने तो बड़े-बड़े वादे लेकर आते हैं, लेकिन जब हमारी शिक्षा और स्वास्थ्य का सवाल है, तब सब मौन साध लेते हैं। क्या जनता की जान की कीमत सिर्फ चुनावी गणित के हिसाब से तय होती है?”
विकास कार्यों में लापरवाही की शिकायतें
स्थानीय लोगों का कहना है कि मालन नदी पर पुल का निर्माण न केवल आवागमन सुगम करेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए भी जरूरी है। किसान, व्यापारी और स्कूली बच्चे सभी इस समस्या से प्रभावित हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थानीय नेतृत्व की निष्क्रियता से लोग हताश हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक और क्षेत्रीय नेता केवल दिखावे के लिए विकास कार्यों की बात करते हैं, जबकि जनता की असल समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। कारसेवा का पुराना पुल जर्जर हो चुका है, और किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। फिर भी इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
जनता की चेतावनी: अगर आवाज न सुनी, तो आंदोलन होगा
स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर जल्द ही पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी समस्याओं की अनदेखी जारी रही, तो वे आने वाले चुनावों में नेताओं को सबक सिखाने से पीछे नहीं हटेंगे।
एक बुजुर्ग किसान ने कहा, “हमारे बच्चों की शिक्षा, बीमारों की जान, और हमारी फसलें सब खतरे में हैं। अगर नेता हमारी मदद नहीं कर सकते, तो हमें भी उन्हें फिर से चुनने की जरूरत नहीं है।”
क्या सरकार जागेगी?
अब सवाल यह है कि क्या स्थानीय विधायक और प्रशासन जनता की आवाज सुनकर समय रहते मालन नदी पर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू करेंगे, या फिर लोगों को आंदोलन की राह पर चलना पड़ेगा? क्षेत्र की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है — उन्हें एक ठोस समाधान चाहिए। पुल का निर्माण केवल एक बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि हजारों लोगों के सुरक्षित और बेहतर जीवन की कुंजी है।











