ऊर्जा मंत्री के निजीकरण बयान से बिजली कर्मियों में आक्रोश, संघर्ष समिति ने किया प्रदर्शन तेज

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा विधानसभा में बिजली के निजीकरण के पक्ष में दिए गए बयान से प्रदेश के बिजली कर्मियों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि विकसित भारत के लिए बिजली का निजीकरण नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली उद्योग का संचालन आवश्यक है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निजी क्षेत्र के लिए बिजली एक व्यापार मात्र है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र इसे एक सेवा के रूप में देखता है। आगरा में टोरेंट पॉवर कंपनी का प्रयोग इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जहां निजीकरण से उपभोक्ताओं को महंगी दरों पर बिजली मिल रही है और पॉवर कारपोरेशन को भारी घाटा झेलना पड़ रहा है।
महंगे बिजली खरीद करारों पर उठाए सवाल
ऊर्जा मंत्री ने विधानसभा में स्वीकार किया कि निजी घरानों के साथ महंगे दरों पर बिजली खरीद के करार बिजली विभाग की खराब स्थिति का एक प्रमुख कारण हैं। संघर्ष समिति के अनुसार, पावर कारपोरेशन 5.55 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को 4.36 रुपये प्रति यूनिट पर बेचती है, जिससे 2023-24 में 275 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। दूसरी ओर, टोरेंट पावर ने इसी बिजली को औसतन 7.98 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेचकर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
बिजली कर्मियों की छंटनी की आशंका
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि ऊर्जा मंत्री के बयान से स्पष्ट होता है कि निजीकरण के बाद बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों की छंटनी होगी। आगरा के उदाहरण का हवाला देते हुए समिति ने कहा कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों में कार्यरत लगभग 76,500 कर्मचारियों को अन्य निगमों में समायोजित करना असंभव होगा, जिससे संविदा कर्मियों की नौकरी पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे पर सवाल
समिति ने राज्यपाल के अभिभाषण का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में पहले से ही जनपदों में 24 घंटे, तहसील स्तर पर 22 घंटे 35 मिनट और गांवों में 20 घंटे 34 मिनट बिजली आपूर्ति हो रही है। ऐसे में ऊर्जा मंत्री का यह कहना कि 24 घंटे बिजली देने के लिए निजीकरण आवश्यक है, पूरी तरह भ्रामक है।
प्रदर्शन रहेगा जारी
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 84वें दिन प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। समिति ने कहा है कि किसी भी परिस्थिति में निजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा और निर्णय वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि बिजली कर्मियों की नौकरियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और सार्वजनिक क्षेत्र में ही बिजली उद्योग को संचालित किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर बिजली मिल सके और प्रदेश का विकास हो सके।











