अमृत योजना 2.0: बिजनौर में जीआईएस आधारित महायोजना क्रियान्वयन पर जोर

बिजनौर, 19 फरवरी 2025: भारत सरकार की महत्त्वाकांक्षी अमृत योजना 2.0 के अंतर्गत बिजनौर में 50,000 से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित महायोजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
इस बैठक में जिलाधिकारी ने बिजनौर जनपद के विनियमित क्षेत्रों जैसे बिजनौर, नजीबाबाद, धामपुर, नगीना और चांदपुर की महायोजना तैयार करने के संबंध में गहन समीक्षा की। इस समीक्षा के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हुए विकास प्राधिकरणों के गठन, निकायों और राजस्व ग्रामों में सम्मिलित प्रस्तावों पर विशेष ध्यान देने को कहा।
जीआईएस आधारित महायोजना:
अमृत योजना 2.0 के तहत जीआईएस तकनीक का उपयोग नगरों के विकास और नियोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस तकनीक की मदद से शहरी बुनियादी ढांचे की योजना, जल आपूर्ति, सीवरेज, हरित क्षेत्र, यातायात प्रबंधन आदि में सुधार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जीआईएस आधारित महायोजना को समयबद्ध तरीके से लागू करें, जिससे शहरी विकास योजनाएं अधिक प्रभावी और पारदर्शी हों। उन्होंने यह भी कहा कि विकास प्राधिकरणों के गठन के लिए प्रस्तावों और कार्यवाहियों का गहन अध्ययन किया जाए, ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो।
विभागीय समन्वय पर जोर:
बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, समस्त उप जिलाधिकारी, तहसीलदार और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। यह व्यापक भागीदारी दर्शाती है कि प्रशासन इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर है। सभी विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए, जिससे किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा का सामना न करना पड़े।
क्या बदल सकता है आमजन के लिए?
इस महायोजना के सफल क्रियान्वयन से बिजनौर और आस-पास के नगरों में शहरी सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। जीआईएस आधारित योजना से बेहतर सड़कों, स्वच्छ पेयजल, सीवरेज, पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास संभव होगा, जिससे स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
विशेषज्ञों की राय:
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि जीआईएस तकनीक के उपयोग से योजना निर्माण की प्रक्रिया न केवल तेज होगी, बल्कि इसके परिणाम भी दीर्घकालिक और प्रभावी होंगे। इस तकनीक की मदद से विकास के लिए आवश्यक डाटा का संग्रहण, विश्लेषण और उसे योजनाओं में समाहित करना आसान हो जाएगा।
निष्कर्ष:
जिलाधिकारी जसजीत कौर के नेतृत्व में आयोजित यह बैठक बिजनौर के शहरी विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। अमृत योजना 2.0 के माध्यम से केंद्र सरकार का उद्देश्य शहरों को स्मार्ट, टिकाऊ और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है। अगर इस योजना को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू किया जाता है, तो निश्चित रूप से बिजनौर और इसके आसपास के क्षेत्रों का भविष्य उज्ज्वल होगा।












