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“अवैध हिरासत में रखा, फिर वसूले ₹1.35 लाख!”—अमरोहा में थानाध्यक्ष सस्पेंड, पुलिस सिस्टम पर बड़ा सवाल

EXCLUSIVE: “थाने में 24 घंटे कैद, ₹1.35 लाख वसूली!”—पुराने वायरल केस से जुड़ा अमरोहा कनेक्शन, थानाध्यक्ष सस्पेंड

रिपोर्ट: एम पी सिंह | #TargetTvLive

अमरोहा। थाना रहरा क्षेत्र में अवैध हिरासत और कथित वसूली के गंभीर मामले में बड़ा खुलासा सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने सख्त कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष बृजेश कुमार को निलंबित कर दिया है। यह मामला अब केवल एक घटना नहीं, बल्कि पुलिस कार्यशैली पर उठते लगातार सवालों की कड़ी बनता जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

ग्राम परोरा निवासी रामदास ने 26 मार्च 2026 को पुलिस कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि—

  • उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई
  • 20 मार्च को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा
  • परिवार से “समझौते” के नाम पर ₹1.35 लाख की वसूली की गई

शिकायत मिलते ही उच्चाधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी।

जांच में खुला ‘दबाव और वसूली’ का खेल

क्षेत्राधिकारी स्तर की जांच में सामने आया कि—

  • पहले एक व्यक्ति पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया
  • अगले ही दिन नए नाम जोड़कर मामला विस्तारित किया गया
  • मुकदमे के भय का इस्तेमाल कर आर्थिक दबाव बनाया गया
  • पीड़ित को 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया

यह पूरा मामला सुनियोजित दबाव और शोषण की ओर इशारा करता है।

थानाध्यक्ष पर कार्रवाई

जांच में थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर—

  • बृजेश कुमार को तत्काल निलंबित किया गया
  • विभागीय जांच शुरू
  • संबंधित आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे ही सवाल

यहां पर उल्लेखनीय है कि इस विशेष केस का समाचार हमारे द्वारा प्रकाशित नहीं किया गया था, किन्तु इससे पूर्व 11 मार्च को #TargetTvLive ने एक अन्य मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसमें—

  • अशोक नामक व्यक्ति को कथित रूप से हिरासत में रखा गया
  • “फैसले” के नाम पर ₹20,000 वसूले जाने का आरोप सामने आया
  • इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ

उस खबर ने भी थाना स्तर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब वर्तमान मामला सामने आने के बाद यह आशंका और गहरा गई है कि कहीं यह एक पैटर्न तो नहीं?

विश्लेषण: क्या बन रहा है ‘खतरनाक ट्रेंड’?

🔸 1. ‘समझौता मॉडल’ का दुरुपयोग

दो अलग-अलग मामलों में समान प्रकार के आरोप यह संकेत देते हैं कि “सेटलमेंट” के नाम पर वसूली का एक अनौपचारिक तंत्र विकसित हो रहा है।

🔸 2. पुलिस निगरानी पर सवाल

लगातार ऐसे मामलों का सामने आना यह दर्शाता है कि थानों की निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की जरूरत है।

🔸 3. मीडिया की भूमिका अहम

#TargetTvLive द्वारा पूर्व में उठाए गए मुद्दों ने इस तरह के मामलों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जनता में बढ़ी चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है। लोगों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अमरोहा का यह मामला अब एक व्यापक संकेत बन चुका है कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
जहां एक ओर वर्तमान मामले में त्वरित कार्रवाई हुई है, वहीं पूर्व में सामने आए मामलों के मद्देनज़र यह जरूरी हो गया है कि ऐसे घटनाक्रमों की गहराई से जांच कर स्थायी समाधान निकाला जाए।

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