“आधुनिकता बनाम परंपरा” के दौर में गुरुकुल की वापसी: विजेंद्र गुप्ता का बड़ा संदेश, यज्ञशाला-छात्रावास का उद्घाटन
TargetTvLive | नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली के ग्रामीण अंचल में स्थित अर्श गुरुकुल, टटेसर (जौंती) एक बार फिर सुर्खियों में है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने यहां आयोजित ‘समवर्तन संस्कार’ (दीक्षांत समारोह) में भाग लेते हुए नवनिर्मित यज्ञशाला और छात्रावास का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने न केवल गुरुकुल परंपरा की महत्ता को रेखांकित किया, बल्कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर भी एक गहरा सांस्कृतिक विमर्श प्रस्तुत किया।
गुरुकुल बनाम मॉडर्न एजुकेशन: क्या लौट रही है भारतीय शिक्षा की जड़ें?
अपने संबोधन में विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि आज का दिन केवल एक संस्थान का उत्सव नहीं, बल्कि “सनातन संस्कृति और भारतीय शिक्षा पद्धति के पुनर्जागरण” का प्रतीक है। उन्होंने चिंता जताई कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होता जा रहा है।
उन्होंने अर्श गुरुकुल जैसे संस्थानों को “प्रकाश स्तंभ” बताते हुए कहा कि ये संस्थान न केवल शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों को भी जीवित रख रहे हैं।
गुरुकुल मॉडल: केवल पढ़ाई नहीं, जीवन जीने की कला
गुरुकुल परिसर, गौशाला और योग साधना का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने कहा कि यहां शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि “जीवन को दिशा देना” है।
👉 उनका स्पष्ट संदेश था:
- शिक्षा + दीक्षा = संपूर्ण विकास
- गुरुकुल में विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार और अनुशासन तीनों मिलते हैं
- यह मॉडल “नैतिक नेतृत्व” तैयार करता है
दीक्षांत समारोह में छात्रों को बड़ा संदेश
समवर्तन संस्कार के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब वे जीवन के नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां उनकी जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी है।
उन्होंने छात्रों से आह्वान किया:
✔ गुरुओं के उपदेशों को जीवन में उतारें
✔ समाज सेवा को प्राथमिकता दें
✔ भारतीय संस्कृति के संवाहक बनें
यज्ञशाला और छात्रावास: सिर्फ भवन नहीं, विचारधारा का केंद्र
नई यज्ञशाला के उद्घाटन पर गुप्ता ने इसे “विचारों की शुद्धि का केंद्र” बताया। उन्होंने ‘इदं न मम’ (यह मेरा नहीं है) की भावना को समाज कल्याण की मूल आधारशिला बताया।
वहीं, नए छात्रावास को लेकर उन्होंने कहा कि इससे दूर-दराज क्षेत्रों के छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे गुरुकुल शिक्षा का दायरा और व्यापक होगा।
वेद ज्ञान के संरक्षण में अहम भूमिका
महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान से संबद्ध इस गुरुकुल द्वारा वेद ज्ञान के संरक्षण और प्रसार के प्रयासों की भी उन्होंने सराहना की।
आचार्य जितेंद्र जी और गुरुकुल परिवार को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान “संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिकों” के निर्माण की आधारशिला हैं।
विश्लेषण: क्यों बढ़ रहा है गुरुकुल मॉडल का प्रभाव?
आज जब NEP (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) में भी भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, ऐसे में गुरुकुल मॉडल का पुनरुत्थान एक बड़ा संकेत है।
🔎 मुख्य कारण:
- पश्चिमी शिक्षा मॉडल से असंतोष
- नैतिक शिक्षा की कमी
- योग, आयुर्वेद और वेदों की वैश्विक स्वीकार्यता
- भारतीय पहचान की पुनर्स्थापना
निष्कर्ष: शिक्षा का भविष्य—परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
अर्श गुरुकुल में हुआ यह आयोजन केवल एक उद्घाटन नहीं, बल्कि एक संदेश है—
👉 “भारत का भविष्य तभी सशक्त होगा, जब उसकी शिक्षा प्रणाली अपनी जड़ों से जुड़ी होगी।”
विजेंद्र गुप्ता का यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में पारंपरिक शिक्षा मॉडल और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन ही नई दिशा तय करेगा।
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