आयुष्मान का पैसा भी हड़पा, गरीब परिवार से भी वसूले हजारों! बिजनौर के निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप
“इलाज फ्री” कहकर कराया भर्ती, फिर ऑपरेशन के नाम पर मांगे 50 हजार; विरोध करने पर धमकी और अभद्रता का आरोप
अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। गरीबों को मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान भारत योजना पर बिजनौर में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नजीबाबाद के एक निजी अस्पताल पर आरोप है कि उसने पहले मरीज को “फ्री इलाज” का भरोसा देकर भर्ती किया, फिर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूल लिए। इतना ही नहीं, बाद में पता चला कि अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड से भी मोटी रकम क्लेम कर ली।
अब पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निजी अस्पतालों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सिर में चोट लगी, अस्पताल ले गए… फिर शुरू हुआ पैसों का खेल
नगीना निवासी अदनान के मुताबिक उनकी बुजुर्ग नानी सलमा बेगम सीढ़ियों से गिर गई थीं, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। परिवार उन्हें इलाज के लिए नजीबाबाद स्थित लाइफ लाइन हॉस्पिटल लेकर पहुंचा।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने साफ कहा था कि इलाज आयुष्मान कार्ड से होगा और कोई पैसा नहीं देना पड़ेगा। इसी भरोसे पर परिवार ने मरीज को भर्ती करा दिया।
लेकिन कुछ दिन बाद अस्पताल ने अचानक मरीज की हालत गंभीर बताते हुए ऑपरेशन के नाम पर 50 हजार रुपये जमा कराने की मांग कर दी।
“गरीब हूं साहब… इतना पैसा कहां से लाऊं”

पीड़ित परिवार का कहना है कि जब उन्होंने आर्थिक मजबूरी बताई तो अस्पताल कर्मियों ने कथित तौर पर कहा कि आयुष्मान कार्ड में पैसा नहीं है।
परिवार ने मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने की कोशिश की तो उन पर 33 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। आरोप है कि इससे पहले भी अस्पताल अलग-अलग बहाने से करीब 20 हजार रुपये ले चुका था।
विरोध किया तो गाली-गलौज और धमकी!
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब परिवार ने और पैसे देने से मना किया तो अस्पताल स्टाफ ने गाली-गलौज शुरू कर दी। यहां तक कि मारपीट और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई।
पीड़ित का कहना है कि मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी, इसलिए मजबूरी में पैसे देने पड़े। कुल मिलाकर अस्पताल को करीब 55 हजार रुपये दिए गए।
डिस्चार्ज के बाद खुला बड़ा राज
सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब परिवार ने आयुष्मान एप पर इलाज का रिकॉर्ड चेक किया। आरोप है कि अस्पताल ने मरीज के आयुष्मान कार्ड से भी करीब 48,300 रुपये का भुगतान उठा लिया था।
यानी एक तरफ गरीब परिवार से नकद वसूली होती रही और दूसरी तरफ सरकारी योजना से भी पैसा लिया गया।
“हमारी सेटिंग ऊपर तक है…”
पीड़ित ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अस्पताल से सवाल किए तो स्टाफ ने कथित तौर पर कहा —
“हमारी सब जगह सेटिंग है… जो करना है कर लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
यह आरोप अगर सही साबित होते हैं तो मामला सिर्फ अवैध वसूली का नहीं, बल्कि गरीब मरीजों के अधिकारों और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में संभावित भ्रष्टाचार का भी बन सकता है।
प्रशासन पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आयुष्मान योजना के नाम पर चल रहे ऐसे खेल पर कार्रवाई कब होगी?
क्या गरीब मरीजों से डबल वसूली की जा रही है?
क्या सरकारी भुगतान के बाद भी अस्पताल मनमानी कर रहे हैं?
और क्या जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है?
फिलहाल पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।
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