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“क्या बिक रही है पत्रकारिता?” मेरठ में गूंजा बड़ा सवाल, विद्यार्थी के नाम पर मचा मंथन

“क्या बिक रही है पत्रकारिता?” मेरठ में गूंजा बड़ा सवाल, विद्यार्थी के नाम पर मचा मंथन



मेरठ में हुई एक गोष्ठी ने पत्रकारिता की साख पर ऐसा सवाल खड़ा किया, जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है…

गणेश शंकर विद्यार्थी के बलिदान दिवस पर मेरठ में पत्रकारों ने खुद अपनी भूमिका पर उठाए सवाल। जानिए क्यों चर्चा में है मीडिया की विश्वसनीयता और भविष्य।

मेरठ | 26 मार्च 2026। TargetTvLive 

देश की निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता के प्रतीक गणेश शंकर विद्यार्थी के बलिदान दिवस पर मेरठ में आयोजित एक विचार गोष्ठी ने आज के मीडिया जगत को कठघरे में खड़ा कर दिया। वक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा—“अगर चौथे स्तंभ की साख बचानी है, तो विद्यार्थी जी के रास्ते पर लौटना ही होगा।”

ऑल इंडिया न्यूज़ पेपर एसोसिएशन (आईना) के तत्वाधान में रामानुज वैष्ण अनाथालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पत्रकारिता की दिशा, दशा और जिम्मेदारी पर गहन मंथन हुआ।

“निर्भीक पत्रकारिता ही असली राष्ट्र सेवा”

वक्ताओं ने गणेश शंकर विद्यार्थी को सिर्फ एक पत्रकार नहीं, बल्कि “आवाज़हीनों की आवाज” बताया।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जी ने अपने समय में—

  • गरीबों, किसानों और मजदूरों के हक में खुलकर लिखा
  • सत्ता और अन्याय के खिलाफ निर्भीकता से आवाज उठाई
  • सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने के लिए जीवन समर्पित किया

यही वजह रही कि 25 मार्च 1931 को कानपुर में दंगों के बीच लोगों को बचाते हुए उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

आज की मीडिया पर तीखा प्रहार: “तेज खबरों में सच कहीं खो रहा है”

गोष्ठी में वक्ताओं ने आधुनिक पत्रकारिता पर गंभीर सवाल उठाए—

👉 “आज खबरें पहले वायरल होती हैं, बाद में सत्यापन होता है”
👉 “संसाधन बढ़े, लेकिन पत्रकारिता का साहस घटा”
👉 “सत्ता से सवाल करने की परंपरा कमजोर पड़ती दिख रही है”

उन्होंने कहा कि पहले सीमित संसाधनों के बावजूद पत्रकारों ने अंग्रेजी हुकूमत तक को चुनौती दी, लेकिन आज तकनीक के बावजूद निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

डिजिटल युग: अवसर भी, खतरा भी

डिजिटल मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा—

  • अब खबरें “बोलकर लिखी” जा रही हैं
  • कुछ ही सेकंड में वैश्विक स्तर पर पहुंच रही हैं
  • लेकिन फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं का खतरा भी तेजी से बढ़ा है

ऐसे में पत्रकारों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

नई पीढ़ी के लिए संदेश: “पत्रकारिता पेशा नहीं, मिशन है”

वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि आने वाली पीढ़ी को यह समझाना जरूरी है कि पत्रकारिता सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक गंभीर दायित्व है।

👉 “अगर इतिहास को जिंदा रखना है, तो आदर्शों को अपनाना होगा”

गोष्ठी में कौन-कौन रहा मौजूद?

कार्यक्रम की अध्यक्षता हर्षवर्धन विटन एडवोकेट ने की, जबकि संचालन पुनीत सिंगल ने किया।

इस दौरान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—

  • पूर्व संपादक पुष्पेंद्र शर्मा
  • रवि कुमार बिश्नोई (केसरपुर टाइम्स)
  • दीप जैन, नरेंद्र जैन, नरेश दत्त
  • प्रशांत कौशिक, सुंदर स्वरूप शर्मा
  • गिरीश थापर, संदीप अल्फा, अंकित बिश्नोई सहित अनेक पत्रकार

ऑल इंडिया न्यूजपेपर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।

क्यों आज भी प्रासंगिक हैं विद्यार्थी जी?

आज जब मीडिया पर—

  • पक्षपात
  • फेक न्यूज
  • कॉर्पोरेट और राजनीतिक दबाव

जैसे आरोप लग रहे हैं, ऐसे समय में गणेश शंकर विद्यार्थी का जीवन एक मार्गदर्शक की तरह सामने आता है।

उनकी पत्रकारिता हमें सिखाती है—
✔ सच बोलने का साहस
✔ समाज के कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशीलता
✔ और सत्ता से निर्भीक सवाल करने की ताकत

“चौथा स्तंभ तभी मजबूत होगा, जब कलम ईमानदार होगी”

मेरठ की इस गोष्ठी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि पत्रकारिता की असली ताकत तकनीक नहीं, बल्कि नैतिकता और निर्भीकता है।

अगर मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बने रहना है, तो उसे गणेश शंकर विद्यार्थी के दिखाए मार्ग पर लौटना ही होगा।

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