“नहटौर में ‘ग्रीन मर्डर’! एक रात में सैकड़ों आम के पेड़ साफ, भूमाफिया पर बड़े आरोप—सीधे CM तक पहुंची शिकायत”
📍 नहटौर, बिजनौर | ग्राउंड रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नहटौर क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जिम्मेदारी दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 21 मार्च 2026 की रात को कोतवाली रोड स्थित ऑक्सफोर्ड स्कूल के पास सैकड़ों हरे-भरे आम के पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
रातों-रात उजाड़ा गया हरियाली का साम्राज्य
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्षों पुराने फलदार आम के पेड़ों को देर रात मशीनों और मजदूरों की मदद से काटा गया। सुबह होते-होते पूरा क्षेत्र वीरान नजर आया।
👉 प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि
- पेड़ों की संख्या सैकड़ों में थी
- कटाई बेहद सुनियोजित तरीके से की गई
- किसी भी तरह की सरकारी अनुमति नहीं ली गई
शिकायत में क्या-क्या आरोप?
शिकायतकर्ता पंकज कुमार (चेयरमैन, सहकारी समिति नहटौर) ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं:
- भूमाफियाओं द्वारा अवैध रूप से पेड़ों की कटाई
- प्लॉटिंग के उद्देश्य से हरित क्षेत्र को खत्म करना
- बिना किसी वैधानिक अनुमति के रात में ऑपरेशन
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली स्थानीय लोगों की भूमिका संदिग्ध है।
मौके पर पहुंचे, लेकिन नहीं रुकी कटाई!
शिकायत के अनुसार, सूचना मिलने पर पंकज कुमार खुद मौके पर पहुंचे और कटाई रोकने का प्रयास किया। उस समय पुलिस और कुछ स्थानीय लोग भी मौजूद थे।
👉 सवाल यह उठता है:
अगर सूचना मिल चुकी थी, तो कार्रवाई तुरंत क्यों नहीं हुई?
कानून और पर्यावरण—दोनों का उल्लंघन
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की अवैध कटाई कई कानूनों का सीधा उल्लंघन है:
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम
- वन एवं वृक्ष संरक्षण नियम
- स्थानीय प्रशासनिक अनुमति प्रक्रिया
एक परिपक्व आम का पेड़:
- सालों में तैयार होता है
- सैकड़ों लोगों को ऑक्सीजन देता है
- पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखता है
👉 ऐसे में सैकड़ों पेड़ों की एक साथ कटाई “ग्रीन डिजास्टर” मानी जा रही है।
CM से क्या मांगा गया?
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है:
✔️ उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन
✔️ दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई
✔️ भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस नीति
❗ प्रशासन पर उठे बड़े सवाल
इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल सामने आए हैं:
- क्या प्रशासन को पहले से जानकारी नहीं थी?
- क्या बिना संरक्षण के पेड़ों को काटना इतना आसान है?
- क्या भूमाफियाओं के सामने सिस्टम कमजोर पड़ रहा है?
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे
जहां एक ओर सरकार “हरित प्रदेश” बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं जमीनी स्तर पर बड़ी खामियों की ओर इशारा करती हैं।
अब आगे क्या?
फिलहाल पूरे मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
👉 स्थानीय लोगों का कहना है कि
“अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो हरियाली का नामोनिशान मिट जाएगा।”
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