“घटतौली से त्रस्त किसान सड़कों पर: बिजनौर में भाकियू लोकशक्ति का हुंकार, कर्जमाफी से पेंशन तक 10 बड़ी मांगें”
📍 बिजनौर से बड़ी खबर | किसानों का उबाल, प्रशासन को सौंपा मांग पत्र
बिजनौर, 23 मार्च 2026।
खराब मौसम के कारण स्थगित हुई मासिक पंचायत के बाद आज जिले में किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया। भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) ने गन्ना समिति बिजनौर में विशाल पंचायत आयोजित कर किसानों की समस्याओं पर जोरदार आवाज उठाई। इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
“खून-पसीने की फसल पर डाका” – जिलाध्यक्ष का बड़ा आरोप
जिलाध्यक्ष चौ. वीर सिंह सहरावत के नेतृत्व में आयोजित इस पंचायत में किसानों की समस्याओं पर गहन चर्चा हुई। उन्होंने साफ कहा:
“किसान पूरे साल मेहनत करता है, लेकिन शुगर मिलों में घटतौली कर उसे लूटा जा रहा है। विरोध करने पर धमकियां और झूठे मुकदमे दिए जाते हैं, जो अब बर्दाश्त नहीं होंगे।”
उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि जिले में कहीं भी घटतौली की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कराई जाए।
बड़े आंदोलन की तैयारी, प्रशासन को चेतावनी
पंचायत में यह भी संकेत दिए गए कि यदि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो किसान एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे। कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा।
👉 प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि
- जिला स्तर की समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा
- और शासन स्तर की मांगों को तत्काल भेजा जाएगा
किसानों की 10 बड़ी मांगें – जानिए क्या है पूरा एजेंडा
किसानों ने अपने ज्ञापन में कई अहम मुद्दे उठाए:
- शुगर मिलों व क्रय केंद्रों पर घटतौली पूरी तरह बंद हो
- गन्ना भुगतान 14 दिन के भीतर अनिवार्य किया जाए
- ओवरलोड/ओवरहाइट वाहनों पर सख्त कार्रवाई
- शुगर मिलों के प्रदूषण पर नियंत्रण और जांच
- आदमखोर गुलदारों के आतंक से मुक्ति
- मिल अधिकारियों की अभद्रता पर कड़ी कार्रवाई
- गंगा कटान रोकने के लिए स्थायी तटबंध निर्माण
- किसानों का सम्पूर्ण कर्ज माफ किया जाए
- 60 वर्ष से ऊपर किसानों-मजदूरों को ₹10,000 मासिक पेंशन
- नांगल सोती में आधार सेवा केंद्र की स्थापना
स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों तक—किसानों की एकजुटता
इस पंचायत में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए, जिनमें राष्ट्रीय और जिला स्तर के कई नेता मौजूद रहे। यह स्पष्ट संकेत है कि किसानों का यह आंदोलन केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर सरकार की नीतियों को चुनौती देने की तैयारी है।
विश्लेषण: क्यों अहम है यह आंदोलन?
- गन्ना किसानों का मुद्दा: पश्चिमी यूपी में गन्ना अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भुगतान और घटतौली जैसे मुद्दे सीधे किसानों की आय को प्रभावित करते हैं।
- कर्ज और पेंशन: कर्जमाफी और पेंशन की मांग ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने की कोशिश है।
- कानून व्यवस्था और पर्यावरण: ओवरलोडिंग, प्रदूषण और वन्यजीव हमले जैसे मुद्दे प्रशासनिक विफलता को दर्शाते हैं।
👉 अगर इन मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन राजनीतिक रूप से भी बड़ा असर डाल सकता है, खासकर चुनावी माहौल में।
निष्कर्ष: चेतावनी या शुरुआत?
बिजनौर में हुई यह पंचायत सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि आगामी बड़े किसान आंदोलन की चेतावनी है। अब नजरें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या समाधान होगा या सड़कों पर संघर्ष और तेज होगा?
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