“₹5000 में ‘हरा खजाना’ साफ!” बिजनौर में नीम कांड ने खोली सिस्टम की पोल—मिलीभगत से कटा विशाल पेड़, अफसरों की चुप्पी ने बढ़ाया शक
📍 अकबरपुर चौगांवा, नजीबाबाद रेंज (बिजनौर)
एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन | डिजिटल न्यूज डेस्क
हाइलाइट्स (Big Takeaways)
- 12-13 गोलाई वाला विशाल नीम का पेड़ संदिग्ध हालात में काटा गया
- ₹5000 की अग्रिम रसीद से ‘सेटिंग’ के आरोप
- रेंज अधिकारियों की मिलीभगत की चर्चा तेज
- प्रभागीय अधिकारी और आरओ ने कॉल रिसीव नहीं किया
- ग्रामीणों में भारी आक्रोश, जांच की मांग तेज

एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: कैसे कटा ‘हरा खजाना’?
बिजनौर के सामाजिक वानिकी प्रभाग की नजीबाबाद रेंज के ग्राम अकबरपुर चौगांवा में एक बड़े नीम के पेड़ की कटाई अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। करीब 12-13 गोलाई वाले इस पेड़ को कथित रूप से अवैध तरीके से काटा गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
यह सिर्फ पेड़ कटान का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम में संभावित मिलीभगत और भ्रष्टाचार की कहानी बनता जा रहा है।
₹5000 की रसीद—‘डील’ का सबूत या औपचारिकता?
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, इस पेड़ को काटने से पहले ही ₹5000 की अग्रिम रसीद काट दी गई थी। यही नहीं, चर्चा यह भी है कि रेंज प्रशासन ने पहले से ही ‘सेटिंग’ कर इस पूरे मामले को दबाने की तैयारी कर ली थी।
इतने बड़े और मूल्यवान पेड़ की कीमत महज ₹5000 दिखाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
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क्या पेड़ का सही मूल्यांकन हुआ?
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क्या यह रकम सिर्फ कागजी औपचारिकता थी?
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क्या असली लेन-देन कुछ और था?
❗ मिलीभगत के आरोप—रेंज प्रशासन घेरे में
स्थानीय स्तर पर यह आरोप तेजी से फैल रहे हैं कि रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से ही यह अवैध कटान संभव हुआ। यदि यह सच साबित होता है, तो यह मामला विभागीय भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बन सकता है।
अफसरों की चुप्पी—सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले पर जब सामाजिक वानिकी प्रभाग, बिजनौर के प्रभागीय अधिकारी और नजीबाबाद रेंज अधिकारी (आरओ) से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो दोनों अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया।
उनकी यह चुप्पी अब और भी ज्यादा संदेह पैदा कर रही है—
क्या वे जवाब देने से बच रहे हैं या फिर मामला सच में गंभीर है?
पर्यावरण पर चोट—कितना बड़ा नुकसान?
नीम का पेड़ सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुरक्षा कवच होता है:
- वायु को शुद्ध करता है
- औषधीय महत्व रखता है
- स्थानीय पारिस्थितिकी को संतुलित करता है
ऐसे विशाल पेड़ का इस तरह कट जाना पर्यावरण के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
ग्रामीणों का गुस्सा—“यह सीधा घोटाला है”

स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर जबरदस्त आक्रोश है।
लोगों का कहना है:
“इतना बड़ा पेड़ ₹5000 में काट देना सीधा-सीधा घोटाला है। इसमें बड़े स्तर पर जांच होनी चाहिए।”
कानूनी पेच—क्या हो सकती है कार्रवाई?
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो:
- संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई
- अवैध कटान पर जुर्माना और कानूनी केस
- पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के आदेश
ग्राउंड एनालिसिस: सिस्टम बनाम पर्यावरण
यह मामला अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहा। यह सवाल खड़ा करता है कि
👉 क्या पर्यावरण संरक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?
👉 क्या सरकारी तंत्र में जवाबदेही खत्म हो रही है?
₹5000 की रसीद, कथित मिलीभगत और अफसरों की चुप्पी—ये तीनों पहलू मिलकर इस पूरे मामले को संभावित घोटाले की दिशा में ले जा रहे हैं।
निष्कर्ष: अब क्या करेगा प्रशासन?
बिजनौर का यह ‘नीम कांड’ अब प्रशासन की साख पर सीधा सवाल बन गया है।
यदि जल्द ही पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
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