“गैस संकट के बीच फेल सिस्टम! 9000 लक्ष्य पर सिर्फ 1500 PNG कनेक्शन—डीएम का फूटा गुस्सा”
✍️ रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
📍 बिजनौर: योजना बड़ी, ज़मीनी हकीकत कमजोर
बिजनौर में घरेलू उपभोक्ताओं को पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस (PNG) उपलब्ध कराने की योजना कागज़ों से आगे बढ़ती नहीं दिख रही। 9000 परिवारों को कनेक्शन देने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक महज 1500 घरों तक ही गैस पहुंच पाई है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डीएम की सख्ती: “लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी”
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में इस धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को चेतावनी दी कि लक्ष्य पूरा करने में किसी भी प्रकार की ढिलाई अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
खाड़ी संकट का असर—PNG बन सकता था राहत का विकल्प
बैठक में डीएम ने वैश्विक हालात, खासकर खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
👉 ऐसे समय में PNG कनेक्शन समय पर दिए जाते, तो हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती थी।
लेकिन धीमी कार्यशैली के चलते यह योजना लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पाई।
जमीनी सवाल: देरी की असली वजह क्या?
विश्लेषण के अनुसार PNG विस्तार में देरी के पीछे कई संभावित कारण सामने आते हैं:
- ❌ एजेंसियों की धीमी कार्यप्रणाली
- ❌ इंफ्रास्ट्रक्चर (पाइपलाइन नेटवर्क) की कमी
- ❌ स्थानीय स्तर पर समन्वय की कमी
- ❌ उपभोक्ताओं में जागरूकता का अभाव
यह सभी कारक मिलकर योजना की रफ्तार को प्रभावित कर रहे हैं।
डीएम के निर्देश: अब एक्शन मोड में प्रशासन
- सभी पात्र परिवारों को जल्द PNG कनेक्शन देने के निर्देश
- पहले से जुड़े उपभोक्ताओं की गैस सप्लाई बाधित न हो, इसकी सख्त हिदायत
- मुख्यालय पर PNG डिपो के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अंशिका दीक्षित, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कुणाल रस्तोगी समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।
TargetTvLive विश्लेषण
यह मामला सिर्फ एक योजना की धीमी प्रगति नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सिस्टम की कार्यक्षमता का भी आईना है।
👉 अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना जनता के भरोसे पर असर डाल सकती है।
👉 वहीं, अगर डीएम के सख्त निर्देशों के बाद गति आती है, तो यह संकट के समय राहत का बड़ा जरिया बन सकता है।
निष्कर्ष: अब परिणाम चाहिए, बहाने नहीं
बिजनौर में PNG योजना अब “टारगेट बनाम हकीकत” की लड़ाई बन चुकी है।
प्रशासन के सख्त रुख के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि
➡️ क्या 9000 का लक्ष्य समय पर पूरा होगा?
➡️ या फिर यह योजना भी कागज़ों में ही सिमटकर रह जाएगी?
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