Target TV Live की खबर से हिला पंचायत सिस्टम: ऑनलाइन बिल घोटाले में सिर्फ “लापरवाही” या सुनियोजित खेल?

फोटो, प्रस्ताव और खाली पन्नों से निकाला गया सरकारी पैसा — सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम
बिजनौर | स्पेशल वायरल एक्सपोज़े
Target TV Live ने जब पंचायतों में चल रहे ऑनलाइन बिल फीडिंग घोटाले की परतें खोलीं, तब प्रशासन के पास दो ही रास्ते बचे—या तो चुप्पी, या कार्रवाई। मजबूरी में कार्रवाई तो हुई, लेकिन क्या सचमुच पूरा सच सामने आया?
चार ग्राम पंचायतों—समसपुर सद्दी, असलमपुर भुल्लन, बेवरखेडा जाटो और समसपुर नसीब—में सरकारी पोर्टल को “डाटा डंपिंग यार्ड” बना दिया गया, जहां बिल की जगह फोटो, प्रस्ताव, और कहीं-कहीं तो खाली प्रविष्टियां डालकर लाखों रुपये निकाल लिए गए।
एक दिन में दो भुगतान—यह गलती नहीं, सिस्टम टेस्टिंग है!
जांच रिपोर्ट खुद स्वीकार करती है—
- अलग-अलग ठेकेदार
- अलग-अलग कार्य
- एक ही दिन बिल फीडिंग और भुगतान
और जब मामला पकड़ा गया तो जवाब मिला—
👉 “त्रुटिवश हो गया, पैसा वापस जमा करा दिया गया।”
❓ सवाल यह है—अगर Target TV Live कैमरा न उठाता, तो क्या यह ‘त्रुटि’ कभी पकड़ी जाती?
बिल नहीं था… फोटो था! फिर भी भुगतान हुआ!
सरकारी नियम साफ कहते हैं—
बिना वैध बिल, बिना सत्यापन, भुगतान अपराध है।
लेकिन यहां—
- बिल की जगह पंचायत बैठक की फोटो
- प्रस्ताव की स्कैन कॉपी
- और कुछ मामलों में खाली ऑनलाइन एंट्री
फिर भी पैसा खाते में पहुंच गया।
❗ यह लापरवाही नहीं, डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग है।
सफाई के नाम पर सिस्टम गंदा
सफाई कार्य के लिए—
- एक बिल ऑफलाइन
- दूसरा ऑनलाइन
- दोनों की संख्या अलग
मतलब—
जो काम दिखाया गया, वह और था,
जो बिल फीड हुआ, वह और,
और जो भुगतान हुआ, वह सबसे अलग।
Target TV Live: जब पहुंचा, तब फाइलें खुलीं
इस पूरे प्रकरण में एक तथ्य निर्विवाद है—
👉 Target TV Live ने नहीं उठाया होता यह मामला, तो न जांच होती, न निलंबन।
यह कार्रवाई प्रशासन की आत्मा नहीं, बल्कि मीडिया के दबाव की उपज है।
एक अधिकारी निलंबित, बाकी सब पाक-साफ?
ग्राम पंचायत अधिकारी को निलंबित कर देना सबसे आसान कदम था।
लेकिन सवाल उठता है—
- बिल फीड किसने किया?
- पोर्टल लॉग-इन किसके पास था?
- भुगतान किस स्तर पर अप्रूव हुआ?
- तकनीकी ऑडिट कहां था?
❓ क्या यह “वन-मैन स्कैम” था या पूरा नेटवर्क?
निलंबन नहीं, FIR चाहिए
जब—
- सरकारी धन का गलत भुगतान
- डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़
- गलत दस्तावेज़ अपलोड
तो यह सिर्फ विभागीय मामला नहीं, IPC और IT एक्ट का विषय बनता है।
👉 जनता पूछ रही है:
- क्या एफआईआर दर्ज होगी?
- क्या विजिलेंस जांच होगी?
- क्या सभी ग्राम पंचायतों का ऑडिट होगा?
निष्कर्ष: यह बिल घोटाला नहीं, सिस्टम एक्सपोज़र है
यह मामला बताता है कि—
सरकारी योजनाओं की सबसे बड़ी कमजोरी भ्रष्ट अधिकारी नहीं,
बल्कि आंख मूंदे बैठे सिस्टम हैं।
Target TV Live ने उस आंख पर उंगली रखी है।
अब देखना है—
क्या प्रशासन सच में सफाई करेगा या सिर्फ फाइलें धूल से ढक देगा।
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होनी चाहिए।
अगर आपने भी पंचायत कार्यों में—
- फर्जी बिल
- अधूरा काम
- ऑनलाइन हेराफेरी
देखी है, तो सवाल उठाइए।
क्योंकि जब मीडिया चुप रहता है, तभी घोटाले फलते हैं।










