मेगा ऋण, मिशन रोज़गार और MSME बूस्ट—विश्वकर्मा जयंती पर CM योगी का बड़ा ऐलान
विश्वकर्मा एक्सपो-2025 में ₹1.32 लाख करोड़ का मेगा ऋण, 12,000 कारीगरों को टूलकिट और 111 युवाओं को नियुक्ति पत्र
लखनऊ | 17 सितम्बर 2025
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित “विश्वकर्मा एक्सपो-2025” का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस मौके पर MSME क्षेत्र और कारीगर वर्ग को नई ऊर्जा देने वाले कई बड़े फैसले और घोषणाएं की गईं।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
- ₹1,32,000 करोड़ का मेगा ऋण पैकेज MSME क्षेत्र के लिए स्वीकृत।
- 12,000 कारीगरों/हस्तशिल्पियों को टूलकिट वितरित, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत।
- 111 कनिष्ठ सहायकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए।
- “मिशन रोज़गार” के तहत युवाओं को नए अवसर।
- ‘विश्वकर्मा एक्सपो’ में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम प्रस्तुत।
MSME सेक्टर को मिलेगा नया पंख
MSME को मजबूती देने के लिए घोषित ₹1.32 लाख करोड़ का ऋण पैकेज न सिर्फ उद्योगों को वित्तीय सहारा देगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बल प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पैकेज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के उत्पादन और रोजगार सृजन क्षमता को दोगुना कर सकता है।
कारीगरों और हस्तशिल्पियों के लिए सशक्तिकरण
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत 12,000 कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक टूलकिट प्रदान की गई। यह कदम परंपरागत कला और हुनर को जीवित रखने के साथ-साथ उन्हें बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।
रोज़गार सृजन पर सीधा असर
- “मिशन रोज़गार” के अंतर्गत 111 युवाओं को कनिष्ठ सहायक पद पर नियुक्ति पत्र दिए गए।
- विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पहलें उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े रोजगार केंद्र के रूप में स्थापित करने में मददगार होंगी।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
- राजनीतिक संदेश: यह कार्यक्रम सीधे तौर पर गरीब, कारीगर और युवा वर्ग को साधने की कोशिश है।
- आर्थिक महत्व: ₹1.32 लाख करोड़ का पैकेज MSME क्षेत्र में क्रांति ला सकता है, जिससे स्थानीय से वैश्विक बाजार तक विस्तार संभव होगा।
- सामाजिक असर: कारीगरों को टूलकिट और युवाओं को रोजगार देकर सरकार ने “आत्मनिर्भर भारत – आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के विज़न को मजबूत किया।
निष्कर्ष
‘विश्वकर्मा एक्सपो-2025’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और परंपरा को नई दिशा देने वाला प्रयास है। CM योगी आदित्यनाथ की इस घोषणा ने MSME और कारीगर वर्ग को नई उम्मीदें दी हैं












