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बिजनौर में न्याय की गूंज: डीजे विवाद में हिमांशु की हत्या, आठ अभियुक्तों को उम्रकैद

बिजनौर में न्याय की गूंज: डीजे विवाद में हिमांशु की हत्या, आठ अभियुक्तों को उम्रकैद

दो साल बाद मिला न्याय, पीड़ित परिवार ने जताई संतोष की सांस
 हाईलाइट्स
  • डीजे विवाद से शुरू हुआ खूनी खेल: जन्मदिन की पार्टी में गाने बंद कराने को लेकर हुआ झगड़ा।
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला: आठ दोषियों को आजीवन कारावास और कुल ₹40,000 अर्थदंड
  • लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या: घायल हिमांशु ने इलाज के दौरान तोड़ा दम।
  • कु. अलका चौधरी का आदेश: भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सजा सुनाई।

 घटना का विस्तार से सिलसिला

मंडावर थाना क्षेत्र के ग्राम नारायणपुर निवासी हिमांशु पेशे से डीजे ऑपरेटर था।
28 सितम्बर 2023 की रात वह ग्राम सेफपुर निवासी राकेश के बेटे के जन्मदिन समारोह में डीजे बजाने गया।

समारोह में लोग नाच-गाने में मशगूल थे, तभी रात लगभग 10 बजे कुछ युवक मौके पर पहुंचे और हिमांशु से डीजे बंद करने को कहा।
इन युवकों में शामिल थे:

  • शिवा पुत्र ऋषिपाल (ग्राम टीप)
  • चाहत पुत्र बेगराज (ग्राम बहादुरपुर)
  • अनिकेत पुत्र महेंद्र, सुमित पुत्र महेंद्र (ग्राम फजलपुर)
  • शिवकुमार पुत्र धर्मवीर (ग्राम बहादुरपुर)
  • अंकुल पुत्र राजपाल (ग्राम बहादुरपुर)
  • रोहित पुत्र सोमपाल (ग्राम टीप)
  • कृष्ण उर्फ लाला पुत्र लेखराज (ग्राम बहादुरपुर जट)

जब हिमांशु ने गाली-गलौज का विरोध किया, तो आरोपियों ने उसे घेर लिया और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीट-पीटकर घायल कर दिया।
बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वहां उसने दम तोड़ दिया।

 अदालत का फैसला

प्रकरण की सुनवाई प्रथम फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई।
न्यायाधीश कु. अलका चौधरी ने अभियोजन पक्ष की दलीलें मानते हुए, सभी आठ अभियुक्तों को दोषी ठहराया और भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत सजा सुनाई।

📌 सजा का विवरण:

  • आजीवन कारावास
  • प्रत्येक अभियुक्त पर ₹5,000 का जुर्माना (कुल ₹40,000)
  • जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त कारावास की सजा भी भुगतनी होगी।

 पीड़ित परिवार को मिला न्याय

हिमांशु की मौत से परिवार और गांव में गहरा आक्रोश था।
करीब दो साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत का यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद का सहारा बना।
परिजनों का कहना है कि “हालांकि बेटा वापस नहीं आ सकता, लेकिन अदालत ने कड़ी सजा देकर हमारी पीड़ा को कुछ हद तक कम किया है।”

 सामाजिक संदेश

  • मनोरंजन का मंच भी हिंसा का कारण न बने: डीजे विवाद एक छोटी सी नोकझोंक से शुरू होकर जानलेवा साबित हुआ।
  • असहिष्णुता और गुस्सा: समाज में बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियों का यह ज्वलंत उदाहरण है।
  • कानून का डर जरूरी: अदालत का यह कड़ा फैसला ऐसे अपराधियों के लिए नजीर साबित होगा, जो कानून को हाथ में लेते हैं।

👉 यह रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे छोटी-सी तकरार कभी-कभी जिंदगी और मौत का कारण बन जाती है। कानून का डंडा भले देर से चले, लेकिन जब चलता है तो सख्ती से न्याय दिलाता है।

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