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कलेक्ट्रेट पर गरजे शिक्षक: पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में बड़ा आंदोलन

कलेक्ट्रेट पर गरजे शिक्षक: पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में बड़ा आंदोलन

📍 बिजनौर से बड़ी खबर

पदोन्नति में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग को लेकर सोमवार को जिले के सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं सड़कों पर उतर आए। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम एडीएम को मांग पत्र सौंपा

 शिक्षकों की मांग

  • पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता समाप्त हो
  • 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता के आधार पर पदोन्नति दी जाए।
  • उच्चतम न्यायालय के आदेश में संशोधन कर शिक्षकों को राहत दी जाए।
  • नियुक्ति के समय योग्य पाए गए शिक्षकों को दोबारा परीक्षा न देनी पड़े।

नेताओं के तेवर

सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार चौहान ने कहा –

“किसी भी शिक्षक का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। संगठन मजबूती से हर शिक्षक के साथ खड़ा है।”

जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने ऐलान किया कि –

“शिक्षक अब किसी भी प्रकार की परीक्षा नहीं देंगे।”

अन्य वक्ताओं ने शिक्षकों से एकजुट रहने और आंदोलन को जारी रखने का आह्वान किया।

 कई संगठनों का मिला समर्थन

इंदिरा बाल भवन में आयोजित सभा में शिक्षकों को समर्थन देने पहुंचे:

  • माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र पाल मालिक,
  • जिला अध्यक्ष गयूर आसिफ,
  • अटेवा के उपाध्यक्ष चंद्रहास,
  • शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष सुधीर कुमार चौहान,
  • जिला महामंत्री सुभाष कुमार और अन्य कई संगठनों के पदाधिकारी।

इनके साथ-साथ जिलेभर से बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया, जिससे माहौल जोशीला हो गया।

 प्रमुख चेहरे

  • भूपेंद्र कुमार चौहान (जिला अध्यक्ष)

  • राजेंद्र कुमार (जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष)

  • प्रशांत सिंह (जिला मंत्री)

  • सुरेंद्र पाल मालिक (प्रांतीय उपाध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ)

  • गयूर आसिफ (जिला अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ)

  • चंद्रहास (अटेवा)

  • सुधीर कुमार चौहान (शिक्षामित्र संघ

शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गए मांग पत्र के जरिये उन्होंने सरकार को चेताया है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।

 

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